
यूपी डेस्क: सावन के पवित्र महीने में अयोध्या की धार्मिक धरती एक ऐतिहासिक पल की गवाह बनी। शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित 500 वर्ष पुराने विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में 60 फीट ऊंचे और 11 फीट चौड़े विशाल महा त्रिशूल की स्थापना की गई। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा महा त्रिशूल है। वैदिक मंत्रोच्चार, हर-हर महादेव के जयघोष और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच यह धार्मिक आयोजन संपन्न हुआ।
विघ्नेश्वर धाम में विधि-विधान से हुई महा त्रिशूल की स्थापना
अयोध्या के शाहगंज बाजार के पास रमपुरवा गांव स्थित प्राचीन विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में सोमवार को महा त्रिशूल स्थापना कार्यक्रम आयोजित किया गया। 500 वर्ष पुराने इस मंदिर में स्थापित किए गए विशाल त्रिशूल को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने इस ऐतिहासिक अवसर पर भगवान शिव का जलाभिषेक किया और पूजा-अर्चना की।
दो दिनों तक चले धार्मिक अनुष्ठान
महा त्रिशूल स्थापना से पहले मंदिर परिसर में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रविवार सुबह से 24 घंटे तक अखंड ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया गया। सोमवार सुबह जप पूर्ण होने के बाद 365 पुजारियों ने एक साथ वैदिक मंत्रों के बीच हवन, पूजन और पुष्प-अक्षत अर्पित किए।
इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच विशेष पूजा के बाद क्रेन की सहायता से विशाल महा त्रिशूल को निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया। स्थापना के बाद संतों और विद्वानों ने श्रद्धालुओं को धर्म और सनातन परंपरा का संदेश दिया।
भंडारे में हजारों श्रद्धालुओं ने ग्रहण किया प्रसाद
महा त्रिशूल स्थापना के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सावन के कारण पहले से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन विशेष आयोजन के चलते श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ गई।
भगवान शिव के त्रिशूल का है विशेष धार्मिक महत्व
सनातन परंपरा में त्रिशूल को भगवान शिव का प्रमुख आयुध माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रिशूल के तीन फलक सृष्टि के तीन प्रमुख तत्वों सृजन, पालन और संहार के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश से भी जोड़ा जाता है।
एक अन्य मान्यता के अनुसार त्रिशूल मनुष्य के दैहिक, दैविक और भौतिक कष्टों के नाश का प्रतीक है। शिव मंदिरों में स्थापित त्रिशूल को नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
500 साल पुराना है विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर
विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर अयोध्या क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल माना जाता है। मंदिर की पहचान इसकी पुरानी परंपराओं और धार्मिक महत्व के कारण भी है। मंदिर के पुजारी अमित योगी के अनुसार यहां 365 पुजारियों की सेवा व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है।
सावन, महाशिवरात्रि और अन्य शिव पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
सनातन संस्कृति के नए प्रतीक के रूप में देखा जा रहा महा त्रिशूल
मंदिर के पुजारी अमित योगी ने बताया कि महा त्रिशूल की स्थापना केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि सनातन संस्कृति और शिवभक्ति के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उनका कहना है कि आने वाले समय में यह विशाल त्रिशूल देशभर के शिवभक्तों और धार्मिक पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन की तैयारियां लंबे समय से चल रही थीं। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मंदिर परिसर और आसपास विशेष व्यवस्था की गई थी।
धार्मिक आयोजन में कई प्रमुख लोग हुए शामिल
महा त्रिशूल स्थापना कार्यक्रम में गोसाईंगंज के पूर्व विधायक इंद्रप्रताप तिवारी ‘खब्बू’, पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा, अमित योगी, अनिल उपाध्याय, मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद आर्य, शरद तिवारी, दिग्विजय सिंह, डॉ. राकेश गुप्त, धर्मेंद्र सिंह सहित कई संत, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों शिवभक्त मौजूद रहे।
धार्मिक जानकारों का मानना है कि 60 फीट ऊंचे महा त्रिशूल की स्थापना से विघ्नेश्वर धाम की पहचान और मजबूत होगी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन बढ़ा है, ऐसे में यह नया धार्मिक स्थल भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
Navyug Samachar