
नेशनल डेस्क: केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पांच नए न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है। इनमें चार हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना शामिल हैं। इस फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की कुल संख्या बढ़कर 37 हो गई है, जिससे लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।
सीजेआई की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मंजूरी
इन नियुक्तियों की सिफारिश सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पिछले सप्ताह की थी। केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया के जरिए इन नियुक्तियों की जानकारी साझा की।
पंजाब-हरियाणा, बॉम्बे, मध्य प्रदेश और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट से आए जज
नियुक्त किए गए जजों में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली शामिल हैं।
जस्टिस शील नागू का न्यायिक अनुभव
जस्टिस शील नागू ने 1987 में वकालत शुरू की थी और सिविल, संवैधानिक व सेवा मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। 2011 में उन्हें मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया और बाद में वे स्थायी न्यायाधीश बने।
जस्टिस श्री चंद्रशेखर का लंबा करियर
रांची में जन्मे जस्टिस चंद्रशेखर ने 1993 में वकालत शुरू की। वे झारखंड हाईकोर्ट में जज रहे और बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई की, जिनमें सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ और मालेगांव विस्फोट मामला शामिल है।
जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस अरुण पल्ली का सफर
जस्टिस संजीव सचदेवा ने दिल्ली हाईकोर्ट से अपने न्यायिक करियर की शुरुआत की और बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सेवाएं दीं। वहीं जस्टिस अरुण पल्ली पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रहने के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने।
वी. मोहना बनीं सुप्रीम कोर्ट की दूसरी महिला जज
वरिष्ठ अधिवक्ता वी. मोहना सुप्रीम कोर्ट में सीधे बार से नियुक्त होने वाली दूसरी महिला हैं। वह सुप्रीम कोर्ट के इतिहास की 12वीं महिला जज भी होंगी। उन्होंने कोयंबटूर लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई की और 1996 में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड बनीं। 2015 में उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों में पैरवी की है, जिनमें महिला अधिकारियों के स्थायी कमीशन और कर्नाटक हिजाब विवाद से जुड़े मामले शामिल हैं। उनका कार्यकाल लगभग पांच वर्षों का रहेगा।
Navyug Samachar