
बिजनेस डेस्क: शेयर बाजार में कभी-कभी नाम का भ्रम भी निवेशकों को मालामाल कर देता है। ऐसा ही एक दिलचस्प मामला सामने आया है, जहां ‘मेलोडी’ टॉफी की चर्चा ने एक ऐसी कंपनी के शेयर को आसमान पर पहुंचा दिया, जिसका उस टॉफी से कोई संबंध ही नहीं है। महज 22 कारोबारी दिनों में इस शेयर ने 116 फीसदी का शानदार रिटर्न देकर निवेशकों का पैसा दोगुने से भी ज्यादा कर दिया।
PM मोदी के गिफ्ट से शुरू हुई चर्चा
पिछले महीने इटली दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मशहूर ‘मेलोडी’ टॉफी भेंट की थी। मुलाकात का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद तेजी से वायरल हो गया और ‘मेलोडी’ नाम चर्चा का विषय बन गया।
इसी दौरान शेयर बाजार में ‘पारले इंडस्ट्रीज’ के शेयरों में अचानक जबरदस्त खरीदारी शुरू हो गई। निवेशकों को लगा कि कंपनी का संबंध मेलोडी टॉफी से है, जिसके चलते शेयर में लगातार तेजी देखने को मिली।
22 दिन में 5 रुपये से 10.81 रुपये तक पहुंचा शेयर
20 मई को पारले इंडस्ट्रीज का शेयर करीब 5 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था। वीडियो वायरल होने के बाद शेयर में लगातार खरीदारी बढ़ती गई और कई सत्रों में अपर सर्किट भी लगा।
11 जून तक यह शेयर बढ़कर 10.81 रुपये पर पहुंच गया। यानी केवल 22 दिनों में निवेशकों को करीब 116 फीसदी का रिटर्न मिला, जो किसी मल्टीबैगर प्रदर्शन से कम नहीं माना जाता।
नाम का भ्रम बना तेजी की वजह
पूरे मामले की सबसे दिलचस्प बात यह है कि जिस कंपनी के शेयरों में निवेशकों ने पैसा लगाया, उसका मेलोडी टॉफी से कोई व्यावसायिक संबंध नहीं है। पारले इंडस्ट्रीज मुख्य रूप से इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट डेवलपमेंट और पेपर वेस्ट रीसाइक्लिंग जैसे क्षेत्रों में काम करती है।
कंपनी मुंबई से संचालित होती है और इसका कारोबार खाद्य उत्पादों या कन्फेक्शनरी सेक्टर से जुड़ा नहीं है।
असल में कौन बनाती है मेलोडी टॉफी?
बाजार में मिलने वाली मेलोडी, पारले-जी, मोनाको, क्रैकजैक और हाइड एंड सीक जैसे लोकप्रिय उत्पाद एक अलग कंपनी बनाती है। यह कंपनी पारले प्रोडक्ट्स है, जो देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनियों में शामिल है।
हालांकि पारले प्रोडक्ट्स शेयर बाजार में सूचीबद्ध नहीं है, इसलिए उसके शेयरों में निवेश संभव नहीं है। दोनों कंपनियों के नाम में ‘पारले’ शब्द होने की वजह से कई निवेशक भ्रमित हो गए और पारले इंडस्ट्रीज के शेयरों में खरीदारी शुरू कर दी।
निवेशकों के लिए सीख
यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि केवल नाम देखकर निवेश का फैसला करना कितना जोखिम भरा हो सकता है। किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले उसके कारोबार, वित्तीय स्थिति और वास्तविक गतिविधियों की पूरी जानकारी लेना जरूरी है।
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