Thursday , 13 August 2026

100 साल में तीसरा सबसे सूखा जून! देशभर में 42% कम बारिश, अल नीनो के असर से मॉनसून पड़ा कमजोर

नेशनल डेस्क : देश में इस वर्ष जून का महीना पिछले एक सदी के इतिहास में तीसरा सबसे सूखा जून साबित होने की ओर बढ़ रहा है। जून समाप्त होने से पहले ही बारिश के आंकड़ों ने चिंता बढ़ा दी है। पूरे देश में सामान्य से 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है, जिसे विशेषज्ञ अल नीनो के बढ़ते प्रभाव से जोड़कर देख रहे हैं। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि भारतीय मानसून पर वैश्विक मौसमीय परिस्थितियों का असर दिखाई देने लगा है।

बारिश के आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता

आंकड़ों के मुताबिक जून महीने में अब तक देशभर में औसतन 92.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जबकि सामान्य स्थिति में यह आंकड़ा 157.7 मिलीमीटर होना चाहिए था। मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि महीने के अंतिम दिन अच्छी बारिश होने की स्थिति में भी कुल वर्षा लगभग 100 मिलीमीटर के आसपास ही रह सकती है।

पिछले 100 वर्षों यानी 1927 से 2026 के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो जून में इससे कम बारिश केवल दो बार दर्ज की गई है। वर्ष 2009 में 87.5 मिलीमीटर और वर्ष 2014 में 92.1 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इस लिहाज से वर्ष 2026 का जून पिछले सौ वर्षों के सबसे शुष्क महीनों में शामिल हो गया है।

केरल में दस्तक के बाद भी नहीं पकड़ पाया रफ्तार

चार जून को केरल पहुंचने के बाद मानसून अपेक्षित गति नहीं पकड़ सका। पूरे महीने के दौरान केवल एक दिन ऐसा रहा जब देशभर में दैनिक वर्षा सामान्य से अधिक दर्ज की गई। बाकी दिनों में बारिश का स्तर औसत से नीचे बना रहा, जिससे कई राज्यों में कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

मध्य भारत में सबसे ज्यादा बारिश की कमी

देश के चारों प्रमुख मौसमीय क्षेत्रों में वर्षा की भारी कमी दर्ज की गई है, जो एक असामान्य स्थिति मानी जा रही है। सबसे ज्यादा प्रभावित मध्य भारत रहा, जहां सामान्य से 54 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में वर्षा 41 प्रतिशत कम रही, जबकि उत्तर-पश्चिम भारत में 30 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। दक्षिण भारत में भी सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

अल नीनो ने बढ़ाई मौसम वैज्ञानिकों की चिंता

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अल नीनो मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर के सतही जल के असामान्य रूप से गर्म होने की प्रक्रिया है। इसका असर दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है और भारतीय मानसून भी इससे प्रभावित होता है।

हाल ही में जारी एक अंतरराष्ट्रीय मौसमीय अपडेट में बताया गया है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में समुद्री तापमान तेजी से बढ़ रहा है और अल नीनो मध्यम स्तर की स्थिति के करीब पहुंच चुका है। आने वाले महीनों में इसके और मजबूत होने की संभावना जताई गई है, जिससे मानसून पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

जुलाई के पहले सप्ताह से राहत की उम्मीद

हालांकि कमजोर मानसून के बीच राहत की संभावना भी बनी हुई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार जुलाई के पहले सप्ताह में देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक और अच्छी बारिश होने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अनुमान के मुताबिक बारिश होती है तो इसका सबसे अधिक लाभ मध्य भारत को मिल सकता है, जहां अब तक वर्षा की सबसे बड़ी कमी दर्ज की गई है। इससे कृषि गतिविधियों और जल भंडारण की स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।

 

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