
यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में देशभर में पहला स्थान हासिल करने का दावा किया है। प्रदेश सरकार के मुताबिक, राज्य में अमृत सरोवरों के निर्माण और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए चलाए गए व्यापक अभियान के चलते उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर सबसे आगे पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि देश के कुल अमृत सरोवरों में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है, जबकि इस सूची में मध्य प्रदेश दूसरे स्थान पर है। अमृत सरोवर निर्माण के मामले में उत्तर प्रदेश अपने निकटतम राज्य मध्य प्रदेश से लगभग तीन गुना आगे है।
पांच साल में 16 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च
प्रदेश सरकार के अनुसार, पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इस अवधि में रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवरों का निर्माण कराया गया, जबकि करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार भी पूरा किया गया। सरकार का दावा है कि इन प्रयासों से ग्रामीण इलाकों में जल उपलब्धता बढ़ी है और जल संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप मिला है।
जल संरक्षण कार्यों का बढ़ा दायरा
सरकार के मुताबिक, मनरेगा और वीबी-जीराम-जी के माध्यम से जल संरक्षण से जुड़े कार्यों का दायरा भी बढ़ाया गया है। पहले मनरेगा के तहत 266 अनुमन्य कार्यों में 78 कार्य जल संरक्षण से संबंधित थे, जबकि अब वीबी-जीराम-जी के तहत 318 अनुमन्य कार्यों में 107 कार्य जल सुरक्षा और जल संरक्षण से जुड़े हैं। इनमें चेक डैम, सोक पिट, रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, तालाब निर्माण, जलाशयों का पुनरोद्धार, मेड़बंदी और पौधरोपण जैसे कार्य शामिल हैं।
भूजल स्तर और सिंचाई व्यवस्था में सुधार का दावा
प्रदेश सरकार का कहना है कि जल संरक्षण अभियान का असर अब कृषि और पर्यावरण पर भी दिखाई देने लगा है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को राहत मिली है। कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है। इसके साथ ही जलाशयों के आसपास हरित क्षेत्र बढ़ने से जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है। सरकार के अनुसार, इन प्रयासों से मत्स्य पालन, पशुपालन और अन्य ग्रामीण आजीविका गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
अन्य राज्यों के लिए मॉडल बनने का दावा
सरकार का दावा है कि जल संरक्षण को विकास, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने वाला यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन रहा है। सरकार के अनुसार, सुनियोजित नीति, जनसहभागिता और प्रभावी क्रियान्वयन के दम पर उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाई है।
आंकड़ों में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियां
प्रदेश सरकार के अनुसार, अब तक 20 हजार अमृत सरोवरों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया गया है। पिछले पांच वर्षों में जल संरक्षण कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। सरकार का दावा है कि देश के कुल अमृत सरोवरों में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 27 प्रतिशत है और अमृत सरोवर निर्माण में प्रदेश मध्य प्रदेश से लगभग तीन गुना आगे है।
जनभागीदारी से मिला अभियान को विस्तार
प्रदेश सरकार के अनुसार, अमृत सरोवर योजना को केवल निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रखा गया। गांवों में पुराने तालाबों के पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की सुरक्षा और पौधरोपण को जनभागीदारी से जोड़कर व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार का कहना है कि इसी सामूहिक प्रयास के चलते जल संरक्षण के साथ ग्रामीण रोजगार, सिंचाई व्यवस्था और स्थानीय पर्यावरण को भी मजबूती मिली है।
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