यूपी डेस्क : अयोध्या स्थित राम मंदिर को मिले दान और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। बजरंग दल के संस्थापक और भाजपा नेता विनय कटियार ने इस मामले को लेकर बड़ा बयान देते हुए दावा किया है कि जांच आगे बढ़ने पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, एडमिनिस्ट्रेटर गोपाल राव और पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा को जेल जाना पड़ सकता है।
अयोध्या में मीडिया से बातचीत के दौरान विनय कटियार ने कहा कि मामले में धन के गबन के आरोपों की जांच चल रही है और आने वाले दिनों में बड़े निष्कर्ष सामने आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट है कि पैसे के गबन का मामला सामने आया है और जांच एजेंसियां इसकी पड़ताल कर रही हैं।
पीएम मोदी से चर्चा का भी किया दावा
विनय कटियार ने कहा कि उन्होंने इस मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी बातचीत की थी। उनके मुताबिक, प्रधानमंत्री ने उनसे पूछा था कि भविष्य में इस मामले का क्या परिणाम हो सकता है। इस पर उन्होंने कहा था कि सब कुछ ठीक हो जाएगा, लेकिन जांच के आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
कटियार ने दावा किया कि जांच की दिशा को देखते हुए चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से इनकार नहीं किया जा सकता।
‘राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए दी गईं कुर्बानियां’
भाजपा नेता ने कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए अनेक लोगों ने संघर्ष और बलिदान दिए थे। उन्होंने कहा कि उस स्थान के लिए उनके कई साथियों ने अपनी जान गंवाई थी और यह विषय करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का जिक्र करते हुए कहा कि वह एक कुशल प्रशासक थे और राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी।
जांच के लिए एसआईटी को मिला अतिरिक्त समय
विनय कटियार ने बताया कि राम मंदिर को मिले दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम को अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच का दायरा बढ़ाया गया है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है।
हर पहलू की होगी विस्तृत जांच
जानकारी के अनुसार, विशेष जांच टीम को अतिरिक्त समय इसलिए दिया गया है ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों, दस्तावेजों और आरोपों की विस्तार से जांच की जा सके। जांच एजेंसी अब मामले के विभिन्न पहलुओं को और गहराई से खंगालेगी, ताकि किसी भी संभावित दोषी को कानून के दायरे में लाया जा सके।
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