
बिहार डेस्क: बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा 2023 के प्रश्नपत्र लीक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने इस मामले के आरोपी कौशिक कुमार कर से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत करीब 2.01 करोड़ रुपये बताई गई है। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना स्थित एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी संपत्तियां शामिल हैं। जांच में परीक्षा के प्रश्नपत्र छापने का ठेका हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी कंपनियों का इस्तेमाल करने और करोड़ों रुपये के लेनदेन में अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
दरअसल, बिहार में 21,391 सिपाहियों की भर्ती के लिए 1 अक्टूबर 2023 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र लीक होने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) ने पूरी परीक्षा रद्द कर दी थी। अब इसी मामले की जांच में ईडी को कथित वित्तीय गड़बड़ियों, फर्जी कंपनियों और धन के लेनदेन से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।
एसके सिंघल के कार्यकाल में मिला था परीक्षा छपाई का ठेका
ईडी की जांच के अनुसार, कौशिक कुमार कर ने कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स नाम से एक प्रॉक्सी कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी के माध्यम से बिहार सिपाही भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई का ठेका हासिल किया गया था। यह ठेका केंद्रीय चयन पर्षद के तत्कालीन अध्यक्ष और बिहार के पूर्व डीजीपी एसके सिंघल के कार्यकाल में दिया गया था।
जांच में सामने आया कि कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स के पास न तो प्रश्नपत्र छापने का कोई पुराना अनुभव था और न ही उसका अपना प्रिंटिंग प्रेस था। इसके बावजूद उसे परीक्षा के प्रश्नपत्रों की छपाई का बड़ा ठेका मिल गया। ईडी के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की वास्तविक भूमिका को छिपाया गया था। इस कंपनी को इससे पहले भी प्रश्नपत्र लीक के एक मामले में प्रतिबंधित किया जा चुका था।
ब्लैकलिस्टेड कंपनी को सामने आने से बचाने के लिए बनाई गई थी दूसरी कंपनी
ईडी ने आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) की ओर से दर्ज प्राथमिकी के आधार पर मामले में जांच शुरू की थी। इस दौरान टेलीग्राम लिंक, मोबाइल नंबर और बैंक खातों की पड़ताल की गई। जांच एजेंसी के अनुसार, कौशिक कर ने अपनी पहले से प्रतिबंधित कंपनी ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस की पहचान छिपाने के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड का इस्तेमाल किया था।
आरोप है कि कैल्टेक्स ने धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश के जरिए प्रश्नपत्रों की छपाई का ठेका हासिल किया। इसके बाद केंद्रीय चयन पर्षद के साथ हुए समझौते की शर्तों का उल्लंघन करते हुए छपाई का काम ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को सौंप दिया गया।
इस काम के लिए कैल्टेक्स मल्टीवेंचर्स को करीब 5.9 करोड़ रुपये अग्रिम भुगतान के रूप में मिले थे। हालांकि, कंपनी ने इस रकम का पूरा भुगतान ब्लेसिंग्स सिक्योर्ड प्रेस को नहीं किया। ईडी की जांच में करीब 2.01 करोड़ रुपये का हिसाब नहीं मिलने की बात सामने आई है। आरोप है कि इस रकम को अलग-अलग फर्जी कंपनियों के माध्यम से दूसरी जगह भेज दिया गया।
कोलकाता की फर्जी कंपनियों के नेटवर्क से इधर-उधर की गई रकम
जांच एजेंसी के मुताबिक, कथित तौर पर अपराध से अर्जित धन को छिपाने के लिए कोलकाता की कई फर्जी कंपनियों और संस्थाओं का नेटवर्क तैयार किया गया था। इस नेटवर्क के जरिए रकम को अलग-अलग बैंक खातों और संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
ईडी को जब करीब 2.01 करोड़ रुपये के लेनदेन का संतोषजनक हिसाब नहीं मिला तो उसने कौशिक कुमार कर की दूसरी कंपनी एनसी प्रिंट प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी पांच अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया। इनकी कुल कीमत 2.01 करोड़ रुपये आंकी गई है।
अन्य आरोपियों और कंपनियों की भूमिका भी जांच के घेरे में
ईडी अब इस मामले में अपराध से अर्जित अन्य संपत्तियों और धन का पता लगाने में जुटी है। इसके साथ ही कथित धन शोधन में शामिल दूसरे आरोपियों और कंपनियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि प्रश्नपत्र छपाई के ठेके से जुड़े धन का इस्तेमाल किन-किन माध्यमों से किया गया और इस पूरे नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल थे।
Navyug Samachar