
एजुकेशन डेस्क: आसमान में उड़ते हवाई जहाज को देखकर बहुत से छात्रों के मन में पायलट बनने का सपना आता है। कमर्शियल पायलट का करियर रोमांचक होने के साथ अच्छी सैलरी और दुनिया घूमने का अवसर भी देता है। अगर आपने 10वीं की पढ़ाई पूरी कर ली है और एविएशन सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, तो अभी से सही दिशा में तैयारी शुरू की जा सकती है। हालांकि 10वीं के बाद सीधे पायलट नहीं बना जा सकता, बल्कि आगे की पढ़ाई और निर्धारित ट्रेनिंग पूरी करनी होती है।
10वीं के बाद सबसे पहले क्या करें
10वीं पास करने के बाद पायलट बनने की दिशा में सबसे जरूरी कदम सही विषयों का चयन करना है। 11वीं और 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स यानी PCM स्ट्रीम से पढ़ाई करना अनिवार्य है।
इसके अलावा 12वीं बोर्ड परीक्षा में कम से कम 50 प्रतिशत अंक हासिल करना जरूरी होता है, ताकि आगे की पायलट ट्रेनिंग और परीक्षाओं के लिए पात्रता पूरी की जा सके।
SPL से शुरू होता है पायलट बनने का सफर
12वीं पास करने के बाद उम्मीदवार को नागर विमानन महानिदेशालय यानी DGCA से मान्यता प्राप्त फ्लाइंग स्कूल में दाखिला लेना होता है। पायलट बनने की प्रक्रिया में मुख्य रूप से तीन लाइसेंस महत्वपूर्ण होते हैं।
स्टूडेंट पायलट लाइसेंस यानी SPL के लिए फ्लाइंग एकेडमी में दाखिले के बाद थ्योरी परीक्षा पास करनी होती है। इसके लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 16 वर्ष होनी चाहिए।
इसके बाद प्राइवेट पायलट लाइसेंस यानी PPL की बारी आती है। इसके लिए करीब 40 से 50 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करनी होती है और मेडिकल टेस्ट पास करना होता है।
कमर्शियल पायलट बनने के लिए CPL जरूरी
अगर किसी कमर्शियल एयरलाइन में विमान उड़ाना है तो कमर्शियल पायलट लाइसेंस यानी CPL हासिल करना जरूरी है। इसके लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष होनी चाहिए। साथ ही DGCA की लिखित परीक्षाएं पास करनी होती हैं और 200 घंटे की फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करना अनिवार्य है।
मेडिकल फिटनेस भी है जरूरी
पायलट बनने के लिए केवल पढ़ाई और फ्लाइंग ट्रेनिंग पर्याप्त नहीं है। उम्मीदवार का शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होना भी जरूरी है। इसके लिए क्लास 1 और क्लास 2 मेडिकल टेस्ट होते हैं।
आंखों की रोशनी भी DGCA के निर्धारित मानकों के अनुरूप होनी चाहिए। इसके साथ ही उम्मीदवार को किसी गंभीर बीमारी से मुक्त होना जरूरी है।
पायलट की कितनी होती है सैलरी
कमर्शियल पायलट का करियर आर्थिक रूप से काफी आकर्षक माना जाता है। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद एयरलाइन में जूनियर फर्स्ट ऑफिसर के तौर पर करियर शुरू करने पर शुरुआती सैलरी करीब 1.5 लाख से 2.5 लाख रुपये प्रति माह तक हो सकती है।
अनुभव बढ़ने और कैप्टन बनने के बाद कमाई 5 लाख से 8 लाख रुपये प्रति माह या उससे भी अधिक हो सकती है।
अगर आपके अंदर लगन, अनुशासन और आसमान में उड़ान भरने का जुनून है, तो कमर्शियल पायलट का करियर आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है।
Navyug Samachar