
ऑटो डेस्क: देश में इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा देने के बीच E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। एक तरफ सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा और आयातित ईंधन पर निर्भरता घटाने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर पुराने वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावे भी चर्चा में हैं। अब सरकार ने इन दावों पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है।
भारत ने तय समय से पहले E20 लक्ष्य हासिल कर लिया है और अब इथेनॉल मिश्रण को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी है। सरकार का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक परीक्षण, तकनीकी तैयारी और संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद लागू की गई है।
सोशल मीडिया के दावों पर सरकार का जवाब
सरकार ने कहा है कि E20 को लेकर कई भ्रामक दावे सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे हैं। कुछ पुराने वीडियो और तस्वीरों को दोबारा साझा कर लोगों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई। हाल में एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वाहन के फ्यूल टैंक पर चींटियां दिखाई गई थीं, लेकिन सरकार ने ऐसे दावों को भ्रामक बताया।
सरकार के अनुसार इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की लगातार निगरानी की जा रही है और इसमें तेल कंपनियों, वाहन निर्माताओं तथा ईंधन परीक्षण एजेंसियों की भागीदारी बनी हुई है।
क्या पुरानी गाड़ियों को हो सकती है परेशानी?
विशेषज्ञों के अनुसार अप्रैल 2023 से पहले बने कुछ वाहनों में E20 ईंधन के उपयोग से तकनीकी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। खासकर पुराने इंजन, कार्बोरेटर तकनीक और पुराने रबर-प्लास्टिक फ्यूल सिस्टम वाले वाहनों में असर की संभावना ज्यादा मानी जाती है।
कुछ रिपोर्टों और सर्वे में यह भी सामने आया कि कुछ वाहन मालिकों ने असामान्य टूट-फूट और अतिरिक्त मरम्मत की जरूरत महसूस की। माना जाता है कि इथेनॉल की सॉल्वेंट प्रकृति पुराने फ्यूल सिस्टम के कुछ हिस्सों पर असर डाल सकती है।
सर्वे में क्या सामने आया
एक सर्वे के अनुसार देश के कई जिलों के हजारों पेट्रोल वाहन मालिकों से मिले जवाबों में कुछ लोगों ने अतिरिक्त रखरखाव की जरूरत की बात कही। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि पुराने फ्यूल पाइप, सील और गैस्केट E20 जैसे मिश्रित ईंधन के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं हो सकते।
हालांकि यह स्थिति सभी पुराने वाहनों पर समान रूप से लागू नहीं मानी गई है और वाहन की तकनीक व स्थिति पर भी निर्भर करती है।
भारत E20 पर इतना जोर क्यों दे रहा है?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में इथेनॉल मिश्रण का उद्देश्य कच्चे तेल पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना और स्वच्छ ईंधन की दिशा में आगे बढ़ना है।
इथेनॉल कृषि आधारित संसाधनों से भी तैयार किया जा सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र को भी समर्थन मिलने की संभावना मानी जा रही है। साथ ही सरकार इसे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाने की रणनीति का हिस्सा भी मानती है।
Navyug Samachar