
सेहत डेस्क : किडनी की बीमारियों को बेहद गंभीर माना जाता है क्योंकि एक बार किडनी प्रभावित होने पर यह पूरी तरह ठीक नहीं हो पाती। ऐसे में मरीज को डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट पर निर्भर रहना पड़ता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खराब पानी भी किडनी से जुड़ी समस्याओं का एक बड़ा कारण हो सकता है, इसलिए पानी की गुणवत्ता की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
खराब पानी बन सकता है किडनी के लिए खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, पानी में मौजूद कुछ खनिज जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम और सोडियम की मात्रा अगर असंतुलित हो जाए तो यह शरीर पर नकारात्मक असर डाल सकती है। कई इलाकों में हार्ड वॉटर की सप्लाई भी किडनी संबंधी समस्याओं के खतरे को बढ़ा सकती है।
TDS मीटर से करें पानी की जांच
पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए TDS मीटर का उपयोग किया जाता है। यह एक पोर्टेबल डिवाइस होता है जिसे आसानी से घर या बाहर कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे चलाने के लिए विशेष बिजली की आवश्यकता नहीं होती और यह बैटरी या चार्जिंग पर काम करता है।
सस्ती कीमत में उपलब्ध डिवाइस
बाजार में कई कंपनियों के TDS मीटर उपलब्ध हैं, जिन्हें ऑनलाइन भी खरीदा जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, कुछ मॉडल 200 रुपये से भी कम कीमत में मिल जाते हैं और घर तक डिलीवरी की सुविधा भी उपलब्ध होती है।
कितना TDS वाला पानी सुरक्षित माना जाता है
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, पीने के पानी में TDS की मात्रा 300 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होना बेहतर माना जाता है। वहीं 300 से 600 मिलीग्राम प्रति लीटर तक का पानी सामान्य रूप से पीने योग्य हो सकता है। लेकिन यदि TDS 900 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक हो जाए तो ऐसे पानी को पीने के लिए असुरक्षित माना जाता है।
Navyug Samachar