Thursday , 8 October 2026

त्योहारों से पहले महंगाई का नया खेल! कीमत वही, पैकेट में सामान कम… बिस्कुट से लेकर साबुन तक पर असर

नई दिल्ली: दशहरा और दिवाली से पहले रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले सामान की बढ़ती कीमतों का असर अब अलग तरीके से दिखाई देने लगा है। कच्चे माल और उत्पादन की लागत बढ़ने के बीच कंपनियां हर पैकेट की कीमत सीधे बढ़ाने से बच रही हैं। इसके बजाय छोटे पैक में सामान की मात्रा घटाई जा रही है। कई मामलों में मात्रा 2 से 7 फीसदी तक कम की जा रही है, जबकि बड़े पैक की कीमत सीधे 5 से 6 फीसदी तक बढ़ाई जा रही है। यानी ग्राहक को कई सामान पहले जितने ही रुपये में मिलेंगे, लेकिन पैकेट में सामान कुछ कम होगा।

कंपनियां पैकेट में सामान कम क्यों कर रही हैं?

एफएमसीजी कंपनियों के सामने बढ़ती लागत और ग्राहकों को कीमत का सीधा झटका देने से बचने की दोहरी चुनौती है। पाम ऑयल, पैकेजिंग, कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों और अन्य जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की लागत बढ़ रही है। दूसरी ओर ग्राहक रोजमर्रा की चीजों की कीमतों को लेकर काफी सतर्क हैं।

ऐसे में कंपनियां ऐसी कीमत बनाए रखना चाहती हैं, जिससे बिक्री की मात्रा पर ज्यादा असर न पड़े। इसलिए छोटे पैक में दाम बढ़ाने के बजाय सामान की मात्रा घटाना आसान विकल्प माना जा रहा है। पैकेट की कीमत ग्राहक को पहले जैसी दिखाई देती है, लेकिन उसके भीतर मिलने वाला सामान कम हो जाता है।

बिस्कुट, नमकीन, साबुन और शैंपू तक पर असर

यह बदलाव बिस्कुट, नमकीन, स्नैक्स, नूडल्स, हेयर ऑयल, साबुन, शैंपू, डिटर्जेंट, चीनी और चाय जैसी रोजमर्रा की चीजों में देखने को मिल रहा है। बिस्कुट, नमकीन और स्नैक्स बनाने वाली कई कंपनियों ने बढ़ी लागत से निपटने के लिए कुछ उत्पादों की कीमतें बढ़ाई हैं।

बीकाजी फूड्स के मनोज वर्मा के मुताबिक, पिछले छह-सात महीनों में औसत कच्चे माल की लागत करीब 7 फीसदी बढ़ी है। पाम ऑयल, पैकेजिंग और दूसरी जिंसों की कीमतों में बढ़ोतरी को इसकी प्रमुख वजह बताया गया है। यानी कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा है और इसका असर किसी न किसी रूप में ग्राहकों तक पहुंच रहा है।

दूध और घी की कीमतों पर भी बढ़ सकता है दबाव

त्योहारी सीजन में डेयरी उत्पादों की लागत पर भी दबाव बढ़ रहा है। पारस डेयरी के विपणन अधिकारी वीपीएस मलिक के मुताबिक, त्योहारों के दौरान दूध की कीमत 3 रुपये प्रति लीटर तक और बढ़ सकती है।

घी की कीमत पहले ही 25 से 30 रुपये प्रति किलो बढ़ चुकी है। इसके अलावा इतनी ही और बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। इससे उन परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ सकता है, जिनके घर में दूध और घी की नियमित खपत होती है। त्योहारों में मिठाइयों और दूसरे खाद्य पदार्थों में डेयरी उत्पादों का इस्तेमाल बढ़ने से भी कीमतों पर दबाव बना हुआ है।

10, 20 और 50 रुपये वाले पैक पर कंपनियों का फोकस

डाटा रिसर्च फर्म नीलसन इंडिया के प्रीतम भादुड़ी के मुताबिक, कंपनियों के लिए 10, 20 और 50 रुपये कीमत वाले छोटे पैक काफी महत्वपूर्ण हैं। इन पैकों की कीमत बढ़ने पर ग्राहक को सामान तुरंत महंगा महसूस हो सकता है। इसलिए इन पैकों में मात्रा घटाना कंपनियों के लिए आसान रास्ता बन जाता है।

वहीं, बड़े पैक में कीमत बढ़ाने की गुंजाइश ज्यादा रहती है। आधुनिक खुदरा बाजार और ई-कॉमर्स में बिकने वाले बड़े पैक पर कंपनियां बढ़ी लागत का कुछ हिस्सा सीधे ग्राहक पर डाल सकती हैं। इस तरह कंपनियां छोटे पैक में कीमत को नियंत्रित रखने और बड़े पैक में दाम बढ़ाने की रणनीति अपना रही हैं।

इसका मतलब यह है कि त्योहारों के मौसम में ग्राहकों की जेब पर असर केवल सामान महंगा होने से नहीं पड़ेगा, बल्कि समान कीमत में पहले की तुलना में कम सामान मिलने से भी खर्च बढ़ सकता है।

 

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