Friday , 9 October 2026

नाना पाटेकर के निधन से बॉलीवुड में मातम, CM योगी से नितिन गडकरी तक ने जताया दुख, सुवेंदु बोले- ‘दिल टूट गया’

नेशनल डेस्क: दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत के साथ राजनीतिक गलियारों में भी शोक की लहर है। 75 वर्षीय नाना पाटेकर का गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को गोवा में निधन हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें डोना पाउला स्थित अपने घर में बेहोशी की हालत में पाया गया था। इसके बाद उन्हें मणिपाल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। अस्पताल के अनुसार, उन्हें सुबह 5:20 बजे मृत घोषित किया गया। मामले में मेडिको-लीगल केस दर्ज किया गया है और पोस्टमार्टम कराया जाना है।

नाना पाटेकर के निधन की खबर सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी समेत कई नेताओं ने शोक व्यक्त किया। नेताओं ने उनके शानदार अभिनय के साथ सामाजिक कार्यों में योगदान को भी याद किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख जताया।

सीएम योगी ने बताया कला जगत की अपूरणीय क्षति

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाना पाटेकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने प्रख्यात अभिनेता, रंगमंच के सशक्त कलाकार और संवेदनशील समाजसेवी नाना पाटेकर के निधन को भारतीय सिनेमा और समाज के लिए बड़ी क्षति बताया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि नाना पाटेकर ने अपने विलक्षण अभिनय से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया। इसके साथ ही सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के जरिए उन्होंने समाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी दिखाई। मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने और शोकाकुल परिवार तथा प्रशंसकों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना की।

गौरतलब है कि अगस्त 2026 में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाना पाटेकर के सामाजिक कार्यों की प्रशंसा की थी। उस दौरान उन्होंने महाराष्ट्र के किसानों के लिए अभिनेता की ओर से किए गए कार्यों और उत्तर प्रदेश पुलिस की जागरूकता मुहिम में उनके योगदान का उल्लेख किया था।

सुवेंदु अधिकारी बोले- महान अभिनेता के जाने से दिल टूट गया

पश्चिम बंगाल के नेता सुवेंदु अधिकारी ने भी नाना पाटेकर के निधन पर गहरा दुख जताया। उन्होंने कहा कि महान अभिनेता के अचानक निधन की खबर से उन्हें गहरा सदमा लगा है और उनका दिल टूट गया है।

सुवेंदु अधिकारी ने नाना पाटेकर के अभिनय की तारीफ करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा ने अपनी एक सशक्त और अपूरणीय आवाज खो दी है। उन्होंने ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘प्रहार’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में नाना पाटेकर के यादगार काम को भी याद किया।

उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर ने सिर्फ किरदारों को पर्दे पर नहीं निभाया, बल्कि अपनी विशिष्ट और प्रभावशाली शैली से उनमें जान डाल दी। सुवेंदु अधिकारी ने उनके सामाजिक कार्यों और ग्रामीण समुदायों के लिए किए गए योगदान को भी याद किया। उन्होंने नाना पाटेकर के परिवार, दोस्तों और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

नितिन गडकरी ने कहा- भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बड़ी क्षति

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने नाना पाटेकर के निधन को बेहद दुखद और चौंकाने वाला बताया। उन्होंने कहा कि नाना पाटेकर के साथ उनके बेहद करीबी और मैत्रीपूर्ण संबंध थे।

गडकरी ने कहा कि नाना पाटेकर ने पांच दशकों से अधिक समय तक मराठी और हिंदी सिनेमा के जरिए दर्शकों के दिलों पर राज किया। उनकी अनूठी संवाद अदायगी और दमदार अभिनय ने कई किरदारों को यादगार बना दिया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नाना पाटेकर का निधन भारतीय फिल्म उद्योग के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने अभिनेता के सामाजिक कार्यों को भी याद किया। गडकरी ने महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों में NAAM Foundation के जरिए जल संरक्षण, जल भंडारण और किसानों की मदद के लिए किए गए नाना पाटेकर के कार्यों की सराहना की।

नितिन गडकरी ने कहा कि किसान आत्महत्या करने वाले परिवारों को नाना पाटेकर की ओर से दी गई मदद कई परिवारों के लिए सहारा बनी। उन्होंने कहा कि नाना सिर्फ महान कलाकार नहीं थे, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील व्यक्तित्व भी थे।

पांच दशक से ज्यादा का रहा शानदार फिल्मी सफर

नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उन्होंने थिएटर से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की और 1978 में फिल्म ‘गमन’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा। इसके बाद उन्होंने ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘अब तक छप्पन’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ समेत कई फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं।

नाना पाटेकर केवल अभिनेता के तौर पर ही सक्रिय नहीं रहे, बल्कि उन्होंने निर्देशन और लेखन में भी काम किया। उन्होंने ‘प्रहार: द फाइनल अटैक’ का निर्देशन किया था। उन्हें तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले थे। साल 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था।

किसानों और ग्रामीण समाज के लिए भी किया अहम काम

नाना पाटेकर की पहचान सिर्फ सिनेमा तक सीमित नहीं थी। वह महाराष्ट्र के ग्रामीण इलाकों और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी सक्रिय रहे। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर NAAM Foundation के माध्यम से किसानों और ग्रामीण समुदायों की मदद के लिए काम किया।

मई 2026 में नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भी नाना पाटेकर ने किसानों की परेशानियों और आत्महत्या के मुद्दे पर खुलकर बात की थी। उन्होंने संकट से गुजर रहे किसानों से मदद लेने और कठिन परिस्थितियों में खुद को अकेला न समझने की अपील की थी।

नाना पाटेकर के अचानक निधन की खबर से हिंदी और मराठी सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है, जिसकी पहचान दमदार अभिनय, अलग अंदाज की संवाद अदायगी और सामाजिक सरोकारों से बनी थी। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है।

 

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