
नेशनल डेस्क: संसद के मॉनसून सत्र में सोमवार को पेपर लीक के मुद्दे पर जोरदार बहस होने जा रही है। केंद्र सरकार लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश करेगी। इस विधेयक को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सदन में पेश करेंगे और इसके पारित कराने का प्रस्ताव भी रखेंगे। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून के जरिए पेपर लीक कराने वाले गिरोहों के खिलाफ और अधिक सख्त कार्रवाई का रास्ता तैयार होगा।
8 से 10 घंटे तक चल सकती है चर्चा
लोकसभा में इस विधेयक पर करीब 8 से 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। सत्ता पक्ष और उसके सहयोगी दलों ने इस अहम बहस के लिए अपने युवा सांसदों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंपी है। भाजपा की ओर से तेजस्वी सूर्या और बांसुरी स्वराज अपनी बात रखेंगे। वहीं सहयोगी दलों की ओर से सायोनी घोष, मिताली बाग, लावु श्री कृष्ण देवरायलु, डॉ. श्रीकांत शिंदे, अनुप्रिया पटेल और लल्लन सिंह सहित कई सांसद चर्चा में हिस्सा लेंगे।
इसके अलावा नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी पहली बार प्रश्नकाल के दौरान शिक्षा से जुड़े सवालों का जवाब देंगे।
2024 के कानून को और सख्त बनाएगा नया संशोधन
सरकार के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 का उद्देश्य वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को और अधिक प्रभावी बनाना है। संशोधन के जरिए पेपर लीक और परीक्षा में धांधली करने वाले संगठित नेटवर्क के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने वाला विधेयक भी होगा पेश
पेपर लीक विधेयक के अलावा लोकसभा में उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया जाएगा। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल इस विधेयक को सदन में रखेंगे। इसका उद्देश्य शीर्ष अदालत में न्यायाधीशों की संख्या से जुड़े प्रावधानों में आवश्यक बदलाव कर न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है।
पीएम मोदी ने किया था हाई-पावर टास्क फोर्स का ऐलान
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा था कि परीक्षा में धांधली करने वाले आरोपी जेल में हैं और उनके मामलों की सुनवाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट में कराई जा रही है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा भी की। इस टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व प्रमुख डॉ. एस. सोमनाथ और पूर्व आईबी प्रमुख तपन डेका समेत कई विशेषज्ञ शामिल हैं।
तकनीक के साथ जवाबदेही पर रहेगा फोकस
टास्क फोर्स के सदस्य और आईआईटी मद्रास के निदेशक डॉ. वी. कामकोटि ने कहा कि वर्षों में परीक्षार्थियों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक, केवल तकनीक के भरोसे पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र की तर्ज पर ‘मेकर-चेकर’ मॉडल अपनाकर प्रत्येक स्तर पर सत्यापन की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। साथ ही प्रश्नपत्र तैयार करने और उसकी गोपनीयता बनाए रखने की प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
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