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BPSC Success Story: 9 से 5 की नौकरी, छह महीने की बेटी को संभाला और फिर हासिल की 166वीं रैंक, SDM बनीं प्रीति

बिहार डेस्क: बिहार के नवादा जिले की रहने वाली और मुजफ्फरपुर की बहू प्रीति कुमारी ने नौकरी, परिवार और छह महीने की बेटी की जिम्मेदारी के बीच BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। प्रीति ने पूरे राज्य में 166वीं रैंक हासिल कर अनुमंडल पदाधिकारी यानी SDM का पद प्राप्त किया। उनकी सफलता इसलिए खास है क्योंकि BPSC इंटरव्यू के दौरान उनकी छह महीने की बेटी भी उनके साथ थी और वह उसे गोद में लेकर इंटरव्यू देने पहुंची थीं।

नवोदय विद्यालय से JNU तक की पढ़ाई

प्रीति कुमारी का परिवार शुरू से ही शिक्षा से जुड़ा रहा है। उनके पिता नंदकिशोर प्रसाद नवोदय विद्यालय में शिक्षक हैं, जबकि मां अनिता कुमारी गृहिणी हैं। प्रीति ने 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, दरभंगा से पूरी की।

इसके बाद उन्होंने भुवनेश्वर के रीजनल कॉलेज से बीएससी और बीएड की पढ़ाई की। आगे उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय से लाइफ साइंस में एमएससी की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद प्रीति ने करीब तीन वर्षों तक नवोदय विद्यालय और दिल्ली के सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में काम किया।

शादी, नौकरी और मां बनने के बाद भी नहीं छोड़ा सपना

वर्ष 2023 में प्रीति की शादी मुजफ्फरपुर निवासी सरोज कुमार से हुई। शादी के बाद उनके सामने पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक नौकरी की जिम्मेदारी भी थी। इसी दौरान वह मां बनीं और घर में बेटी का जन्म हुआ।

छह महीने की बच्ची की देखभाल, नौकरी और घर की जिम्मेदारियों के बीच भी प्रीति ने प्रशासनिक सेवा में जाने का सपना नहीं छोड़ा। BPSC इंटरव्यू के समय उनकी बेटी सिर्फ छह महीने की थी। वह बेटी को गोद में लेकर इंटरव्यू बोर्ड के सामने पहुंचीं।

पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास, लेकिन आगे नहीं मिली सफलता

प्रीति ने BPSC की परीक्षा में पहले प्रयास में प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन वह आगे के चरण में सफल नहीं हो सकीं। इस असफलता को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी तैयारी की रणनीति पर दोबारा काम किया और यह समझने की कोशिश की कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।

दूसरे प्रयास में बदली रणनीति ने दिलाई सफलता

शादी और बच्चे के बाद लंबे समय तक लगातार बैठकर पढ़ाई करना उनके लिए आसान नहीं था। ऐसे में प्रीति ने उपलब्ध समय का बेहतर इस्तेमाल करने पर ध्यान दिया। जब भी समय मिला, उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ पढ़ाई की और अपनी कमजोरियों पर काम किया।

प्रीति का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में केवल लंबे समय तक पढ़ना ही सफलता की गारंटी नहीं है। निरंतरता और समय का सही इस्तेमाल भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी रणनीति के साथ उन्होंने दूसरे प्रयास में BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में 166वीं रैंक हासिल की और SDM बनने का सपना पूरा किया।

परिवार के सहयोग ने बढ़ाया हौसला

प्रीति की सफलता में उनके परिवार का सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। नौकरी, परिवार और बच्ची की जिम्मेदारियों के बीच तैयारी जारी रखना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों के साथ तालमेल बैठाते हुए अपनी तैयारी को जारी रखा। आखिरकार उनकी मेहनत और बदली हुई रणनीति ने उन्हें राज्य की प्रतिष्ठित प्रशासनिक सेवा में स्थान दिलाया।

 

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