यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET)-2026 को लेकर राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परीक्षा को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में आयोजित कराने के निर्देश देते हुए कहा है कि यह परीक्षा लाखों युवाओं के भविष्य और आकांक्षाओं से जुड़ी हुई है, इसलिए इसकी विश्वसनीयता किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि परीक्षा का सफल संचालन केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की जवाबदेही का विषय है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी अभ्यर्थियों को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और तनावमुक्त माहौल उपलब्ध कराया जाए।
2 से 4 जुलाई तक होगी परीक्षा
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को 2, 3 और 4 जुलाई 2026 को आयोजित होने वाली यूपीटीईटी-2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि परीक्षा प्रदेश के 60 जिलों में बनाए गए 955 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।
परीक्षा कुल पांच पालियों में होगी। 2 जुलाई को दोनों पालियों में उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। 3 जुलाई को पहली पाली में उच्च प्राथमिक और दूसरी पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा होगी। वहीं 4 जुलाई को पहली पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा संपन्न कराई जाएगी।
करीब 20 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार इस बार यूपीटीईटी में कुल 19,94,661 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इनमें 17,67,180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के हैं, जबकि 2,27,481 उम्मीदवार अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे।
इसके अलावा परीक्षा में 1,85,791 सेवारत शिक्षक और 18,08,870 नए अभ्यर्थी भाग लेंगे। प्राथमिक स्तर के लिए 3,88,179, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 8,16,436 और दोनों स्तरों के लिए 3,95,023 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है।
सेवारत शिक्षकों के लिए अलग टीईटी कराने का फैसला
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देश दिया कि कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग से शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित की जाए।
उन्होंने कहा कि पात्रता सुनिश्चित करने के लिए सेवारत शिक्षकों को पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए और केवल अवसर की कमी के कारण किसी शिक्षक को कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े।
दूसरे राज्यों से आने वाले अभ्यर्थियों के लिए विशेष व्यवस्था
सरकार ने उन लाखों अभ्यर्थियों के लिए भी विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं जो दूसरे जिलों और अन्य राज्यों से परीक्षा देने आएंगे। मुख्यमंत्री ने रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और प्रमुख यातायात केंद्रों पर सहायता व्यवस्था मजबूत करने को कहा है।
साथ ही परिवहन निगम, रेलवे और जरूरत पड़ने पर निजी परिवहन संचालकों के साथ समन्वय कर अतिरिक्त बसों और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा के दौरान संभावित भीड़ को देखते हुए विशेष यातायात प्रबंधन भी लागू किया जाएगा।
खाद्य पदार्थों की कीमतों पर भी रहेगी नजर
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि परीक्षा अवधि के दौरान बड़ी संख्या में युवाओं की आवाजाही को देखते हुए खाद्य और पेय पदार्थों के दाम अनावश्यक रूप से न बढ़ाए जाएं। जिला प्रशासन को इस पर विशेष निगरानी रखने के लिए कहा गया है।
हर केंद्र पर अनिवार्य होंगी मूलभूत सुविधाएं
सभी परीक्षा केंद्रों पर पेयजल, स्वच्छ शौचालय, छायादार प्रतीक्षास्थल, निर्बाध बिजली आपूर्ति, अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन तंत्र को भी पूरी तरह सक्रिय रखने को कहा गया है। प्रत्येक जिले में बनाए गए कंट्रोल रूम 24 घंटे प्रभावी ढंग से कार्य करेंगे और किसी भी सूचना पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
परीक्षा की शुचिता पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा की शुचिता सर्वोच्च प्राथमिकता है। परीक्षा ड्यूटी में केवल स्वच्छ छवि वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती की जाए। गोपनीय परीक्षा सामग्री के भंडारण, परिवहन और परीक्षा के बाद आयोग तक सुरक्षित पहुंचाने की प्रक्रिया भी उच्च सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी।
इसके अलावा सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर अफवाह या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कड़ी निगरानी रखने और त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
वाराणसी, प्रयागराज और लखनऊ में सबसे ज्यादा अभ्यर्थी
बैठक में बताया गया कि सर्वाधिक परीक्षा केंद्र और अभ्यर्थियों वाले जिलों में वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा और जौनपुर शामिल हैं।
वाराणसी में 68 परीक्षा केंद्रों पर 1,27,239 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। प्रयागराज में 53 केंद्रों पर 76,634 और लखनऊ में 43 केंद्रों पर 76,720 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इन जिलों में सुरक्षा, यातायात, चिकित्सा और आवास संबंधी व्यवस्थाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
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