नेशनल डेस्क : वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट का असर अब कई प्रमुख जिंसों पर भी दिखाई देने लगा है। ईरान-अमेरिका युद्धविराम और होर्मुज मार्ग के फिर से सामान्य रूप से खुलने के बाद पिछले एक महीने में कच्चे तेल समेत कई औद्योगिक और कीमती धातुओं के दाम में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे माल की लागत घटने से उत्पादन खर्च कम होगा, जिससे उद्योगों को राहत मिलेगी और घरेलू व निर्यात मांग दोनों को मजबूती मिल सकती है। इसका सकारात्मक असर देश की अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिल सकता है।
15 फीसदी तक टूटा कच्चे तेल का भाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 73 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने के मुकाबले लगभग 15 प्रतिशत कम है।
कच्चे तेल की कीमतों का सीधा असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स, प्लास्टिक उद्योग और कई अन्य उत्पादों की लागत पर पड़ता है। तेल सस्ता होने से आयात बिल में कमी आती है, जिससे चालू खाते के घाटे पर दबाव घट सकता है और रुपये को भी मजबूती मिल सकती है।
सोना-चांदी में भी बड़ी गिरावट
पिछले एक महीने के दौरान कीमती धातुओं के बाजार में भी नरमी देखने को मिली है। सोने की कीमत में करीब 11 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि चांदी के दाम में लगभग 20 प्रतिशत तक की कमी आई है।
इसके अलावा प्लेटिनम भी करीब 18 प्रतिशत तक सस्ता हुआ है, जिससे कीमती धातुओं के बाजार में व्यापक दबाव देखने को मिला है।
औद्योगिक धातुओं के दाम भी घटे
निर्माण और विनिर्माण क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली कई प्रमुख धातुओं की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई है। एल्युमिनियम में करीब 17 प्रतिशत, तांबे में 6.5 प्रतिशत, जिंक में 3 प्रतिशत और लौह अयस्क में 4.5 प्रतिशत की कमी आई है।
स्टील की कीमतों में भी लगभग 4 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे निर्माण और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
खाद्य और कृषि जिंसों में भी नरमी
कई कृषि और खाद्य जिंसों की कीमतों में भी कमी देखी गई है। सोयाबीन करीब 5.8 प्रतिशत, पाम तेल 2 प्रतिशत और रबर लगभग 9 प्रतिशत तक सस्ता हुआ है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण बारिश में कमी और कुछ फसलों की बुवाई घटने से आने वाले महीनों में खाद्य महंगाई को लेकर चुनौतियां बनी रह सकती हैं।
अर्थव्यवस्था को मिल सकता है फायदा
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि कच्चे तेल और औद्योगिक जिंसों की कीमतों में कमी से उत्पादन लागत घटेगी, जिससे उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ सकती है। साथ ही निर्यात क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटी है, जिससे चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास दर पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि अल नीनो और कमजोर मानसून जैसी चुनौतियों पर नजर बनाए रखना अभी भी जरूरी है।
पिछले एक माह में इन वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट
- कच्चा तेल – 15 प्रतिशत
- सोना – 11 प्रतिशत
- चांदी – 20 प्रतिशत
- तांबा – 6.5 प्रतिशत
- एल्युमिनियम – 17 प्रतिशत
- जिंक – 3 प्रतिशत
- लौह अयस्क – 4.5 प्रतिशत
- स्टील – 4 प्रतिशत
- प्लेटिनम – 18 प्रतिशत
- सोयाबीन – 5.8 प्रतिशत
- पाम तेल – 2 प्रतिशत
- रबर – 9 प्रतिशत
Navyug Samachar
