
यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश को ग्रीन एनर्जी और औद्योगिक विकास के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौतम बुद्ध नगर के जेवर में 8200 करोड़ रुपये की लागत वाली इंटीग्रेटेड सोलर मैन्युफैक्चरिंग परियोजना का शिलान्यास किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में जेवर भारत का प्रमुख सोलर निर्माण केंद्र बनकर उभरेगा और इससे विदेशी निर्भरता में कमी आएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में अक्षय और हरित ऊर्जा की जरूरत लगातार बढ़ रही है और उत्तर प्रदेश ने इस दिशा में बड़ा लक्ष्य तय किया है। राज्य अगले दो से तीन वर्षों में 20 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है।
पीएम सूर्यघर योजना से लाखों परिवारों को राहत
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में लाखों परिवार सौर ऊर्जा को अपनाकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं। उनके मुताबिक, पीएम सूर्यघर योजना के तहत बड़ी संख्या में घरों में सोलर पैनल लगाए गए हैं, जिससे बिजली खर्च में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। उन्होंने इसे प्रदेश में बढ़ती सौर ऊर्जा क्षमता का संकेत बताया।
जेवर बनेगा सोलर मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र
कार्यक्रम के दौरान कहा गया कि प्रस्तावित परियोजना के तहत 5 गीगावाट सोलर सेल और 5 गीगावाट सोलर मॉड्यूल निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी। इससे भारत की घरेलू उत्पादन क्षमता को मजबूती मिलेगी और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन तकनीकों के लिए अब तक दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था, भविष्य में उनका निर्माण देश के भीतर ही संभव होगा। इससे औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
20 हजार रोजगार के अवसर बनने का दावा
परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 20 हजार रोजगार अवसर पैदा होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही सहायक उद्योग, परिवहन, भंडारण और तकनीकी सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बताया गया कि इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए उच्च क्षमता वाले सोलर उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे तेजी से बढ़ती अक्षय ऊर्जा मांग को पूरा करने में मदद मिलेगी।
ग्रीन इकोनॉमी के साथ औद्योगिक विस्तार पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि जेवर क्षेत्र केवल सोलर निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यहां इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण, फिल्म सिटी, परिधान उद्योग, शिक्षा संस्थान, खिलौना उद्योग और लॉजिस्टिक ढांचे का भी तेजी से विस्तार किया जा रहा है। इससे यह क्षेत्र बड़े औद्योगिक और आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित होगा।
निवेश बढ़ाने की भी तैयारी
परियोजना से जुड़े प्रतिनिधियों के अनुसार शुरुआती चरण में 8200 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है और आगामी वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार करोड़ रुपये तक ले जाने की योजना है।
Navyug Samachar