
नेशनल डेस्क: अगर आपने बैंक में एफडी यानी फिक्स्ड डिपॉजिट करा रखी है, तो दिल्ली हाई कोर्ट का एक अहम फैसला समझना जरूरी है। अदालत ने साफ किया है कि कोर्ट के आदेश पर बनाई गई एफडी पर बैंक अपनी मर्जी से ब्याज दर कम नहीं कर सकता। इस मामले में करीब 5.89 करोड़ रुपये की एफडी पर बैंक ने पहले 7.75 फीसदी और 8.25 फीसदी तक ब्याज दिया, लेकिन बाद में इसे घटाकर 3.5 फीसदी कर दिया था। ब्याज में इस कटौती को लेकर विवाद अदालत पहुंचा और अब हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने बैंक की अपील खारिज कर दी है।
5.89 करोड़ की FD का पूरा मामला क्या है?
यह मामला Hero Exports और Tiffins Barytes, Asbestos & Paints Ltd. के बीच चल रहे विवाद से जुड़ा है। जुलाई 2008 में दिल्ली हाई कोर्ट ने Tiffins Barytes के बैंक खातों में मौजूद करीब 8.5 करोड़ रुपये सुरक्षित रखने का आदेश दिया था। इस रकम में से करीब 5.89 करोड़ रुपये उस समय ABN Amro Bank में जमा थे।
बाद में ABN Amro का बैंकिंग कारोबार Royal Bank of Scotland और फिर NatWest Markets PLC से जुड़ गया। अदालत ने 5.89 करोड़ रुपये की रकम को ऐसी एफडी में रखने का निर्देश दिया था, जिस पर उस समय बैंक में उपलब्ध सबसे ज्यादा ब्याज दर मिल रही हो।
इसलिए यह सामान्य ग्राहक की ओर से कराई गई एफडी नहीं थी, बल्कि अदालत के आदेश के तहत बनाई गई जमा राशि थी।
बैंक ने पहले दिया ज्यादा ब्याज, फिर कर दी बड़ी कटौती
एफडी शुरू होने के बाद इस पर 7.75 फीसदी ब्याज मिला। कुछ समय बाद ब्याज दर बढ़कर 8.25 फीसदी हुई और फिर 7.75 फीसदी हो गई। लेकिन 30 जनवरी 2018 से बैंक ने इस एफडी पर ब्याज दर घटाकर सीधे 3.5 फीसदी कर दी।
Hero Exports ने बैंक की इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई। उसका कहना था कि जब एफडी अदालत के आदेश पर बनाई गई थी और उसमें बैंक की उपलब्ध सबसे ज्यादा ब्याज दर देने की बात कही गई थी, तो बैंक बाद में अपनी तरफ से ब्याज दर को इस तरह कम नहीं कर सकता।
मामला फिर दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा
ब्याज दर में कटौती के बाद मामला दोबारा अदालत पहुंचा। मई 2019 में हाई कोर्ट के एकल जज ने बैंक को पूरी रकम हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करने का आदेश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि 30 जनवरी 2018 से मिलने वाले ब्याज की गणना पिछले तीन साल में लागू रही औसत ब्याज दर के आधार पर की जाए।
NatWest Markets PLC ने इस फैसले को चुनौती दी। इसके बाद मामला हाई कोर्ट की दो जजों वाली डिवीजन बेंच के सामने पहुंचा। बैंक ने ब्याज दर घटाने की अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की दलील दी।
बैंक ने RBI के नियमों का दिया हवाला
NatWest ने अदालत में दलील दी कि RBI के नियमों के तहत कमर्शियल बैंकों को घरेलू टर्म डिपॉजिट यानी एफडी की ब्याज दर तय करने की स्वतंत्रता होती है।
बैंक का यह भी कहना था कि अगर एफडी की अवधि पूरी हो जाती है और उसे आगे नवीनीकृत नहीं किया जाता, तो उसके बाद जमा रकम पर बचत खाते की ब्याज दर लागू हो सकती है।
हालांकि, अदालत ने इस मामले में बैंक की इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के सामने अहम बात यह थी कि संबंधित एफडी सामान्य बैंकिंग प्रक्रिया के तहत नहीं, बल्कि अदालत के स्पष्ट आदेश के तहत बनाई गई थी।
हाई कोर्ट ने बैंक की अपील क्यों खारिज की?
जस्टिस अवनीश झिंगन और जस्टिस शैल जैन की डिवीजन बेंच ने NatWest की अपील खारिज कर दी। बेंच ने माना कि एकल जज के फैसले में ऐसी कोई कानूनी या तथ्यात्मक गलती नहीं है, जिसके आधार पर उसमें बदलाव किया जाए।
इसका मतलब है कि बैंक केवल अपनी सामान्य एफडी नीति या ब्याज दरों का हवाला देकर अदालत के आदेश के तहत बनाई गई इस एफडी पर ब्याज कम नहीं कर सकता। बैंक को अदालत के निर्देश के मुताबिक 5.89 करोड़ रुपये की रकम पर तय आधार के अनुसार ब्याज देना होगा।
क्या सभी FD पर लागू होगा यह फैसला?
दिल्ली हाई कोर्ट का यह फैसला हर सामान्य एफडी पर लागू होने वाला ऐसा नियम नहीं है कि बैंक किसी भी स्थिति में ब्याज दर से जुड़े नियम नहीं बदल सकता। यह मामला खास परिस्थितियों में बनाई गई उस एफडी से जुड़ा है, जिसे अदालत के आदेश पर तय शर्तों के साथ बनाया गया था।
सामान्य एफडी में ब्याज दर और दूसरी शर्तें बैंक की लागू नीति, एफडी की अवधि और संबंधित RBI नियमों के आधार पर तय होती हैं।
FD ग्राहकों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अदालत के आदेश के तहत रखी गई रकम और सामान्य बैंक एफडी में अंतर होता है। अगर किसी रकम को कोर्ट के निर्देश पर किसी खास शर्त के साथ जमा कराया गया है, तो बैंक केवल अपनी सामान्य शर्तों के आधार पर उस व्यवस्था को बदल नहीं सकता।
यही वजह है कि 5.89 करोड़ रुपये की इस एफडी का मामला अहम है। अदालत ने बैंक की ब्याज दर घटाने की कार्रवाई को स्वीकार नहीं किया और पहले दिए गए आदेश के मुताबिक ब्याज देने की व्यवस्था को बरकरार रखा।
Navyug Samachar