Monday , 26 October 2026

बुद्धि से लेकर परोपकार तक… PM मोदी ने बताए इंसान को महान बनाने वाले 8 गुण, संस्कृत श्लोक शेयर कर दिया खास संदेश

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। इस श्लोक के जरिए उन्होंने मनुष्य के जीवन को प्रकाशमान करने वाले आठ गुणों का उल्लेख किया। पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक, “अष्टौ गुणाः पुरुषं दीपयन्ति प्रज्ञा सुशीलत्वदमौ श्रुतं च। पराक्रमश्च बहुभाषिता च दानं यथाशक्ति कृतज्ञता च।।” पोस्ट किया।

इस श्लोक में बुद्धि, सदाचार, संयम, ज्ञान, वीरता, वाणी की कुशलता, अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान और कृतज्ञता को मनुष्य के महत्वपूर्ण गुण बताया गया है। प्रधानमंत्री की ओर से साझा किए गए श्लोक के अर्थ में कहा गया है कि बुद्धि व्यक्ति के मार्ग को स्पष्ट करती है, सदाचार उसके आचरण को पवित्र बनाता है और संयम उसे अनुशासन में रखता है।

इन गुणों से निखरता है व्यक्तित्व

श्लोक के अनुसार ज्ञान व्यक्ति को विवेक प्रदान करता है, जबकि वीरता कठिन परिस्थितियों में उसे दृढ़ बनाए रखती है। वाणी की कुशलता व्यक्ति को समाज में सम्मान दिलाती है। वहीं अपनी क्षमता के अनुसार दान करना और दूसरों से मिले उपकारों के प्रति कृतज्ञ रहना व्यक्ति के व्यक्तित्व को पूर्णता प्रदान करता है।

सोमवार को भी साझा किया था संस्कृत श्लोक

इससे एक दिन पहले सोमवार को भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से एक संस्कृत श्लोक साझा किया गया था। उन्होंने लिखा था, “भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥”

इसका हिंदी अर्थ बताया गया था कि मनुष्य को सत्य, शुभ और ज्ञानवर्धक वचन सुनने चाहिए तथा कल्याणकारी विचारों को अपनाना चाहिए। स्वस्थ शरीर, उत्तम आचरण और श्रेष्ठ गुणों के साथ जीवन को लोकहित के लिए समर्पित करने और सत्य, प्रामाणिक तथा जनहितकारी सूचनाओं के प्रसार के जरिए राष्ट्र और समाज को जागरूक, सशक्त और समरस बनाने का संदेश इसमें दिया गया है।

7 अगस्त को परोपकार को लेकर साझा किया था सुभाषित

इससे पहले 7 अगस्त को भी प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया था। उन्होंने पोस्ट में लिखा था, “किं चन्द्रमाः प्रत्युपकारलिप्सया करोति गोभिः कुमुदावबोधनम्। स्वभाव एवोन्नतचेतसां सतां परोपकारव्यसनं हि जीवितम्॥”

इस श्लोक के जरिए बताया गया कि चंद्रमा किसी प्रत्युपकार की अपेक्षा से अपनी किरणों के जरिए कुमुदिनी को प्रकाशित नहीं करता, बल्कि ऐसा करना उसका स्वाभाविक गुण है। इसी तरह महान और उदार हृदय वाले सज्जन बिना किसी स्वार्थ या अपेक्षा के दूसरों का हित करते रहते हैं। परोपकार उनके स्वभाव का हिस्सा होता है।

 

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