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Gold Silver Price Today: जुलाई के आखिरी दिन सोना फिर हुआ महंगा, खरीदारी से पहले जानें आपके शहर का नया रेट

बिजनेस डेस्क: जुलाई के आखिरी दिन सर्राफा बाजार से सोना खरीदने वालों के लिए अहम अपडेट सामने आया है। 31 जुलाई 2026 को सोने की कीमतों में एक बार फिर तेजी दर्ज की गई है, जबकि चांदी के भाव में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के बाद वैश्विक बाजार में सोने को मजबूती मिली, जिसका असर घरेलू बाजार में भी देखने को मिला। अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो पहले अपने शहर का ताजा भाव जरूर जान लें।

31 जुलाई 2026: 24, 22 और 18 कैरेट सोने का ताजा भाव

मात्रा 24 कैरेट 22 कैरेट 18 कैरेट
1 ग्राम ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840
8 ग्राम ₹1,15,584 ₹1,05,960 ₹86,720
10 ग्राम ₹1,44,480 ₹1,32,450 ₹1,08,400

देश के प्रमुख शहरों में आज का गोल्ड और सिल्वर रेट

शहर 24K (1 ग्राम) 22K (1 ग्राम) 18K (1 ग्राम) चांदी (₹/किलो)
लखनऊ ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840 ₹2,35,000
जयपुर ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840 ₹2,35,000
दिल्ली ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840 ₹2,35,000
पटना ₹14,438 ₹13,235 ₹10,830 ₹2,35,000
मुंबई ₹14,433 ₹13,230 ₹10,825 ₹2,35,000
अहमदाबाद ₹14,438 ₹13,235 ₹10,830 ₹2,35,000
पुणे ₹14,433 ₹13,230 ₹10,825 ₹2,35,000
कोलकाता ₹14,433 ₹13,230 ₹10,825 ₹2,35,000
मेरठ ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840 ₹2,35,000
लुधियाना ₹14,448 ₹13,245 ₹10,840 ₹2,35,000

नोट: उपरोक्त कीमतें सांकेतिक हैं। अलग-अलग शहरों और ज्वैलर्स के मेकिंग चार्ज, जीएसटी तथा अन्य शुल्क के कारण अंतिम कीमतों में अंतर हो सकता है।

सोने की कीमतों में तेजी की ये हैं प्रमुख वजहें

अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले से सोने को वैश्विक बाजार में मजबूती मिली है। इसके अलावा डॉलर इंडेक्स में कमजोरी के कारण निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है।

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के चलते सुरक्षित निवेश की मांग बनी हुई है। वहीं वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच भी निवेशक सोने को सुरक्षित विकल्प मानकर खरीदारी कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और फेड की आगे की नीति को लेकर भी निवेशकों की नजर बनी हुई है।

बाजार विशेषज्ञों की क्या है राय?

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। फेड की आगामी नीति, डॉलर की चाल और पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक स्थिति कीमती धातुओं की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। उनका मानना है कि लंबी अवधि के निवेशक गिरावट आने पर खरीदारी की रणनीति अपना सकते हैं, जबकि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए रखनी चाहिए।

 

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