
नेशनल डेस्क: भारतीय वायुसेना आज 8 अक्टूबर को अपना 94वां स्थापना दिवस मना रही है। वर्ष 2026 के वायुसेना दिवस की थीम ‘भारतीय वायुसेना – अचूक, अभेद्य और सटीक’ रखी गई है। हर साल 8 अक्टूबर को वायुसेना दिवस मनाया जाता है, क्योंकि इसी दिन 1932 में भारतीय वायुसेना की स्थापना हुई थी। इस मौके पर देशभर में वायुसेना की ताकत, शौर्य और आधुनिक क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाता है।
इस वर्ष मुख्य समारोह गाजियाबाद के हिंडन एयर फोर्स स्टेशन पर आयोजित किया जाएगा। यहां भव्य परेड और एयर शो के दौरान लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर हवाई करतब दिखाएंगे। तेजस, प्रचंड, राफेल और सुखोई-30 जैसे विमान अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इसके साथ ही आकाश मिसाइल और अत्याधुनिक रडार प्रणालियों समेत भारत की बढ़ती सैन्य और हवाई ताकत की झलक भी देखने को मिलेगी।
क्या है 2026 की वायुसेना दिवस की थीम
हर साल भारतीय वायुसेना दिवस के लिए एक विशेष थीम तय की जाती है। इस बार की थीम ‘भारतीय वायुसेना – अचूक, अभेद्य और सटीक’ है। यह थीम वायुसेना की सटीक कार्रवाई, मजबूत रक्षा क्षमता और आधुनिक युद्धक क्षमताओं को रेखांकित करती है।
दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना
भारतीय वायुसेना को अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बताया जाता है। इसकी भूमिका केवल युद्ध के दौरान देश की रक्षा तक सीमित नहीं है। प्राकृतिक आपदाओं के समय राहत और बचाव अभियानों में भी वायुसेना महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
इसके अलावा दूसरे देशों में शांति प्रयासों के दौरान भी भारतीय वायुसेना की भूमिका रही है। किसी देश में अस्थिरता या अन्य संकट की स्थिति बनने पर वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के अभियानों में भी वायुसेना हिस्सा लेती है।
क्या है भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य
भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य ‘नभ: स्पृशं दीप्तम’ है। इसे भगवद्गीता के 11वें अध्याय से लिया गया है। यह महाभारत के युद्ध के दौरान कुरुक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है।
1932 में हुई थी भारतीय वायुसेना की स्थापना
देश की आजादी से पहले भारतीय वायुसेना को रॉयल इंडियन एयर फोर्स कहा जाता था। 8 अक्टूबर 1932 को इसे देश की सशस्त्र सेनाओं में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया था। इसके बाद 1 अप्रैल 1933 को वायुसेना का पहला दस्ता बनाया गया, जिसमें 6 आरएएफ-प्रशिक्षित अधिकारी और 19 हवाई सिपाही शामिल थे।
आजादी के बाद वायुसेना के नाम से ‘रॉयल’ शब्द हटा दिया गया और इसे इंडियन एयरफोर्स कहा जाने लगा। भारतीय वायुसेना ने द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वर्ष 1950 के बाद वायुसेना ने कई महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में हिस्सा लिया, जिनमें ऑपरेशन विजय, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस और ऑपरेशन पूमलाई प्रमुख हैं।
आजादी से पहले वायुसेना आर्मी के तहत काम करती थी। इसे आर्मी से अलग स्वतंत्र रूप से स्थापित करने का श्रेय भारतीय वायुसेना के पहले कमांडर इन चीफ एयर मार्शल सर थॉमस डब्ल्यू एल्महर्स्ट को दिया जाता है। आजादी के बाद वह भारतीय वायुसेना के पहले चीफ, एयर मार्शल बने और 15 अगस्त 1947 से 22 फरवरी 1950 तक इस पद पर रहे।
वायुसेना का ध्वज कैसा है
भारतीय वायुसेना का ध्वज वायुसेना निशान से अलग नीले रंग का है। इसके शुरुआती एक चौथाई हिस्से में राष्ट्रीय ध्वज बना है, जबकि बीच में राष्ट्रीय ध्वज के तीनों रंगों केसरिया, सफेद और हरे रंग से बना एक वृत्त है। इस ध्वज को वर्ष 1951 में अपनाया गया था।
आज भारतीय वायुसेना देश की रक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। आधुनिक विमान, उन्नत तकनीक और बेहतर सैन्य क्षमताओं के साथ वायुसेना देश की संप्रभुता और हवाई क्षेत्र की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है। नियमित प्रशिक्षण, रणनीतिक साझेदारी और मानवीय अभियानों के जरिए भी वायुसेना अंतरराष्ट्रीय सहयोग में योगदान दे रही है।
94वें एयर फोर्स डे पर क्या होगा खास
94वें एयर फोर्स डे के अवसर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें एयर फोर्स डे परेड, भारतीय वायुसेना के विभिन्न सैन्य संसाधनों का स्थैतिक प्रदर्शन, टीम शक्ति एयर वॉरियर ड्रिल टीम का प्रदर्शन, भारतीय वायुसेना के ड्रमर्स टीम की प्रस्तुति और हेरिटेज फ्लाइट का एयर डिस्प्ले शामिल है।
मुख्य कार्यक्रम 8 अक्टूबर को एयर फोर्स स्टेशन हिंडन में आयोजित होगा। परेड की समीक्षा चीफ ऑफ एयर स्टाफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह करेंगे। इस अवसर पर थल सेना प्रमुख, नौसेना प्रमुख और भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख भी मौजूद रहेंगे।
परेड से पहले Mi-17-1V हेलीकॉप्टरों के जरिए ध्वज फ्लाईपास्ट किया जाएगा। समारोह में फाइटर विमान, ट्रांसपोर्ट विमान, हेलीकॉप्टर, सतह से हवा और सतह से सतह पर मार करने वाली गाइडेड हथियार प्रणालियां, रडार और वन-वे अटैक अनमैन्ड एरियल सिस्टम प्रदर्शित किए जाएंगे। इन सैन्य प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय वायुसेना के ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने पर भी जोर दिखेगा।
ऑल-विमेन टीम शक्ति भी दिखाएगी दम
टीम शक्ति भारतीय वायुसेना की प्रमुख ऑल-विमेन एयर वॉरियर ड्रिल टीम है। यह टीम सटीकता, फुर्ती और अनुशासन के लिए जानी जाती है। टीम की सदस्य आपसी तालमेल के साथ जटिल मूवमेंट और फॉर्मेशन प्रस्तुत करती हैं।
टीम शक्ति विभिन्न आयोजनों में भारतीय वायुसेना का प्रतिनिधित्व करती है और इसे महिला सशक्तीकरण तथा पेशेवर उत्कृष्टता की मिसाल के तौर पर देखा जाता है।
वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने क्षमताएं और तेज बढ़ाने पर दिया जोर
एयर फोर्स डे के मौके पर वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना सही दिशा में आगे बढ़ रही है, लेकिन इसकी गति को थोड़ा और तेज किया जा सकता है। उन्होंने तेजी से बदलती प्रौद्योगिकी के दौर में वायुसेना की क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
वायु योद्धाओं और वायुसेना के पूर्व कर्मियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे क्षेत्र हैं, जहां अधिक उन्नत क्षमताओं, तेजी से नए संसाधनों को शामिल करने और अधिक युद्धक संसाधनों की जरूरत है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय वायुसेना का ध्यान प्लेटफॉर्म-केंद्रित दृष्टिकोण से हटकर क्षमता-केंद्रित दृष्टिकोण पर केंद्रित हुआ है। विभिन्न इकाइयों के एकीकरण पर भी जोर दिया गया है।
एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने कहा कि वायुसेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने पराक्रम का लोहा मनवाया। उन्होंने कहा कि वायुसेना की क्षमताओं के विस्तार और अन्य क्षेत्रों में प्रगति हो रही है, हालांकि कुछ परियोजनाओं में हो रही देरी को लेकर उन्होंने चिंता भी जताई।
Navyug Samachar