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जापानी तकनीक से बदलेगी किसानों की किस्मत? शिवराज ने कहा- छोटे किसानों तक पहुंचाएं सस्ती मशीनें, घटे लागत और बढ़े उत्पादन

नेशनल डेस्क: भारत और जापान के बीच तकनीकी सहयोग को लेकर आयोजित यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 में कृषि क्षेत्र पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जापानी तकनीक और विशेषज्ञता को सीधे भारतीय किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत-जापान साझेदारी का लाभ केवल निवेश तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका फायदा किसानों, युवाओं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था तक पहुंचना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने जापानी कंपनियों और संस्थानों से ऐसी कृषि तकनीक और मशीनरी विकसित करने की अपील की, जिसे छोटे और सीमांत किसान भी आसानी से इस्तेमाल कर सकें। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि जरूरतों और जापान की तकनीकी क्षमता के मेल से खेती के क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं।

छोटे किसानों के लिए आसान और किफायती मशीनरी पर जोर

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में ऐसी कृषि मशीनरी की जरूरत है, जो छोटे किसानों के लिए उपयोगी होने के साथ-साथ कम लागत वाली हो। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पानी की खपत कम करना, खेती का खर्च घटाना और किसानों की आय बढ़ाना होना चाहिए।

उन्होंने जापानी उद्योग जगत से भारतीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऐसी तकनीक विकसित करने का आग्रह किया, जिसे गांवों तक आसानी से पहुंचाया जा सके।

खेतों तक पहुंचे कृषि अनुसंधान का लाभ

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कृषि अनुसंधान को जमीन स्तर पर लागू करने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक शोध केवल दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे ऐसे उत्पादों और तकनीकों में बदलना चाहिए, जिनका सीधा फायदा किसानों को मिल सके।

उन्होंने कहा कि जब किसान नई तकनीक को अपनाएंगे, तभी कृषि क्षेत्र में वास्तविक बदलाव आएगा और खेती अधिक लाभकारी बन सकेगी।

जापानी निवेश के लिए यूपी बना मजबूत केंद्र

शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश के लिए एक मजबूत केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ा बाजार, बेहतर कनेक्टिविटी, कुशल मानव संसाधन, विकसित होता इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश के लिए अनुकूल माहौल मौजूद है।

उन्होंने जापान को उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जापान यात्रा से दोनों पक्षों के संबंधों को नई मजबूती मिली है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की क्षमता, प्रतिभा, परंपरा, इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल बाजार को जापान की तकनीकी विशेषज्ञता के साथ जोड़ा जाए तो रोजगार, नवाचार और सतत विकास के नए रास्ते खुल सकते हैं।

ग्रामीण युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के अवसर

कृषि तकनीक के साथ ग्रामीण युवाओं को जोड़ने पर भी शिवराज सिंह चौहान ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि मशीनों के संचालन, रखरखाव और उनसे जुड़े व्यवसायों में गांव के युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवा विकास प्रक्रिया के केवल दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदार बन सकते हैं। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के बीच बेहतर तालमेल से किसानों की जरूरतों के अनुसार नई तकनीक और मशीनरी तैयार की जा सकती है।

भारत-जापान साझेदारी में तकनीक और रोजगार पर फोकस

केंद्रीय मंत्री ने भारत-जापान संबंधों को केवल निवेश तक सीमित नहीं बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच सहयोग में तकनीक, नवाचार, कौशल विकास, विनिर्माण और रोजगार को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक ताकत तथा जापान की तकनीकी दक्षता मिलकर विकास की नई संभावनाएं तैयार कर सकती हैं।

200 से ज्यादा जापानी प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा

यूपी-जापान इन्वेस्टमेंट मीट-2026 का आयोजन 18 से 23 अगस्त तक उत्तर प्रदेश और दिल्ली में किया जा रहा है। इस सम्मेलन में 200 से अधिक जापानी उद्योगपति, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, कारोबारी प्रतिनिधि और नीति निर्माता हिस्सा ले रहे हैं।

इस दौरान जापानी कंपनियों के लिए उन्नत तकनीक, हरित हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, कौशल विकास और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं प्रस्तुत की जा रही हैं।

 

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