
नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के प्रमुख वाईएस जगन मोहन रेड्डी के हालिया बयानों ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है। चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाने और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के समर्थन के बीच उनके रुख में बदलाव के संकेत देखे जा रहे हैं। वाम दलों के साथ बातचीत की खबरों ने भी संभावित नए राजनीतिक गठबंधन को लेकर अटकलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, वाईएसआरसीपी की ओर से एनडीए से दूरी बनाने या किसी नए मोर्चे में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जगन मोहन रेड्डी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़ी व्यवस्था पर अपने पुराने रुख को लेकर दुख जताया है। उन्होंने कथित तौर पर कहा कि तीन सदस्यीय चयन समिति वाली व्यवस्था का समर्थन करना गलत था। इस समिति में प्रधानमंत्री, प्रधानमंत्री की ओर से नामित एक मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं।
जगन ने नियुक्ति प्रक्रिया में भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने और संबंधित कानून में बदलाव की मांग की है। उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए व्यवस्था की खामियों को दूर करना जरूरी है।
NDA सरकार का समर्थन करती रही है वाईएसआरसीपी
वाईएसआरसीपी ने संसद में कई अहम मुद्दों पर एनडीए सरकार का समर्थन किया है, लेकिन पार्टी ने औपचारिक रूप से भाजपा के साथ गठबंधन करने या एनडीए में शामिल होने की घोषणा नहीं की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी के एक नेता ने कहा कि वाईएसआरसीपी मुद्दों के आधार पर सरकार का समर्थन करती रही है। हालांकि, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के मुद्दे पर पार्टी को लगता है कि सरकार की ओर से जनता को अधिक आश्वासन दिए जाने की जरूरत है।
अतीत में पार्टी ने कृषि कानूनों, नागरिकता संशोधन कानून और अनुच्छेद 370 हटाने जैसे मुद्दों पर सरकार का समर्थन किया था। वर्ष 2023 में संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह में भी वाईएसआरसीपी के नेता शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में पार्टी ने उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में पी. राधाकृष्णन का समर्थन किया था।
ऐसे में चुनाव आयोग की व्यवस्था पर जगन की मौजूदा टिप्पणी को उनके पुराने रुख के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वाम दलों से बातचीत की खबरों ने बढ़ाई हलचल
वाईएसआरसीपी और वाम दलों के बीच बातचीत होने की खबरें भी सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पार्टी आंध्र प्रदेश में विपक्ष की भूमिका निभाते हुए उन लोगों के साथ खड़ा होना चाहती है, जिनके हितों और मताधिकार पर असर पड़ने का आरोप लगाया जा रहा है।
वाईएसआरसीपी ने राज्य की टीडीपी सरकार पर राज्य निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर काम करने और चुनावी प्रक्रिया में पक्षपात का आरोप लगाया है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का जवाब उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
मिधुन रेड्डी को लेकर भी आरोप-प्रत्यारोप
वाईएसआरसीपी ने आरोप लगाया है कि पार्टी के लोकसभा नेता पीवी मिधुन रेड्डी को निशाना बनाने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, टीडीपी की तरफ से मिधुन रेड्डी पर स्थानीय चुनावों में नामांकन के दौरान भीड़ को आगजनी के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया है।
दोनों पक्षों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप ने आंध्र प्रदेश में राजनीतिक टकराव को और बढ़ाया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
CJP के समर्थन में क्या बोले जगन?
रिपोर्ट के अनुसार, जगन मोहन रेड्डी ने चुनावी प्रक्रिया में लोगों का भरोसा बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने सौरव दास और आशुतोष रांका की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि इससे समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि स्थिति और बिगड़ सकती है। उन्होंने व्यवस्था में मौजूद खामी को दूर करने की जरूरत भी बताई।
इसी घटनाक्रम के दौरान जगन ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का समर्थन किया। इस रुख को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उनकी बदलती रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है।
क्या क्षेत्रीय दल बना सकते हैं तीसरा मोर्चा?
क्षेत्रीय दलों के संभावित तीसरे मोर्चे को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। रिपोर्ट्स में डीएमके की संभावित भूमिका का जिक्र किया गया है। हाल ही में डीएमके सांसद कनिमोझी की पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की खबर भी सामने आई थी। उद्धव ठाकरे और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं से संभावित मुलाकातों को लेकर भी चर्चा रही है।
हालांकि, जगन मोहन रेड्डी और इन दलों के बीच किसी औपचारिक गठबंधन या साझा मोर्चे को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इसे राजनीतिक संभावनाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के स्तर पर ही देखा जा सकता है।
आंध्र प्रदेश में टीडीपी गठबंधन के खिलाफ विकल्प की तलाश?
रिपोर्ट में एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि जगन मोहन रेड्डी ऐसे राजनीतिक गठबंधनों के लिए तैयार रहे हैं, जो वाईएसआरसीपी को समर्थन दे सकें। सूत्र के मुताबिक, राज्य में टीडीपी के नेतृत्व वाले गठबंधन का मुकाबला करने के लिए वाम दलों या क्षेत्रीय पार्टियों के साथ किसी व्यापक मोर्चे की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
फिलहाल, जगन के चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल, CJP को समर्थन और वाम दलों से बातचीत की खबरों ने नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा जरूर तेज की है, लेकिन एनडीए से औपचारिक दूरी या तीसरे मोर्चे में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है।
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