लाइफस्टाइल डेस्क : हार्ट अटैक को लेकर की गई एक नई रिसर्च में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के मुताबिक महिलाओं और पुरुषों में हृदयाघात से पहले दिखाई देने वाले संकेत एक जैसे नहीं होते। शोधकर्ताओं का कहना है कि यदि इन शुरुआती चेतावनी संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो अचानक होने वाले हार्ट अटैक से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
अमेरिका के स्मिड्ट हार्ट इंस्टीट्यूट के चिकित्सकों द्वारा किए गए इस अध्ययन को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोध में पाया गया कि अचानक हृदयाघात का शिकार हुए लगभग 50 प्रतिशत लोगों में घटना से 24 घंटे पहले कुछ स्पष्ट लक्षण दिखाई दिए थे।
महिलाओं और पुरुषों में दिखे अलग-अलग चेतावनी संकेत
वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ सुमीत चुघ के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन में सामने आया कि महिलाओं और पुरुषों में हार्ट अटैक से पहले दिखाई देने वाले प्रमुख संकेत अलग-अलग थे। शोध के अनुसार महिलाओं में सांस लेने में तकलीफ सबसे प्रमुख लक्षण के रूप में सामने आई, जबकि पुरुषों में सीने में दर्द सबसे आम चेतावनी संकेत पाया गया।
हालांकि दोनों ही समूहों में दिल की धड़कन तेज होना और फ्लू जैसे लक्षण भी देखे गए। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन संकेतों की पहचान समय रहते हो जाए तो मरीज को तत्काल चिकित्सा सहायता मिल सकती है।
अस्पताल के बाहर होने वाले हार्ट अटैक अधिक घातक
रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के बाहर हार्ट अटैक का शिकार होने वाले करीब 90 प्रतिशत लोगों की जान नहीं बच पाती। यही वजह है कि विशेषज्ञ हृदयाघात के शुरुआती संकेतों को पहचानने और जोखिम की बेहतर भविष्यवाणी करने पर जोर दे रहे हैं।
दो बड़े समुदाय आधारित अध्ययनों से जुटाए गए आंकड़े
अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वेंचुरा काउंटी और ओरेगॉन के पोर्टलैंड में किए गए समुदाय आधारित अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। वेंचुरा अध्ययन में शामिल 823 लोगों में से लगभग आधे लोगों ने हार्ट अटैक से 24 घंटे पहले कम से कम एक स्पष्ट चेतावनी लक्षण महसूस किया था। ओरेगॉन में किए गए अध्ययन में भी इसी तरह के नतीजे सामने आए।
भविष्य में हार्ट अटैक की भविष्यवाणी हो सकती है और बेहतर
शोधकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में इन लिंग-विशिष्ट चेतावनी संकेतों को मरीजों की चिकित्सीय प्रोफाइल और बायोमेट्रिक आंकड़ों के साथ जोड़कर हार्ट अटैक के जोखिम की अधिक सटीक पहचान की जा सकेगी। इससे समय रहते इलाज शुरू करने और गंभीर परिणामों को रोकने में मदद मिल सकती है।
Navyug Samachar