Monday , 5 October 2026

छात्र प्रदर्शन में पैलेट गन पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, पूछा- हिंसक भीड़ को रोकने का विकल्प क्या होगा?

नेशनल डेस्क: दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर दायर याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि जब अत्यंत गंभीर परिस्थितियों में लाठीचार्ज और आंसू गैस से भीड़ को नियंत्रित नहीं किया जा सके, तब पुलिस को गोली चलाने तक की अनुमति होती है। ऐसे में यदि कोई विरोध-प्रदर्शन असामाजिक तत्वों के कारण हिंसक हो जाए, तो पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल से पूरी तरह कैसे रोका जा सकता है, इस पर भी विचार करना होगा।

घायलों के इलाज का दिया निर्देश

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि पैलेट गन से कथित रूप से घायल हुए प्रदर्शनकारियों का समुचित इलाज सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने केंद्र सरकार से कहा कि रैपिड एक्शन फोर्स के गोला-बारूद का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए।

याचिकाकर्ता से भी कोर्ट ने किए सवाल

अदालत ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर पूर्ण रोक लगाने की मांग करने वाले याचिकाकर्ता और पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद से भी कई सवाल किए। जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि पुलिस नियम विशेष परिस्थितियों में ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल की अनुमति देते हैं और जब तक उन नियमों को चुनौती नहीं दी जाती, तब तक केवल किसी एक घटना के आधार पर व्यापक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स’ पर हुई विस्तृत चर्चा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत को बताया कि इस मामले में धातु के पेलेट का इस्तेमाल किया गया, जिन्हें कई लोगों के शरीर से निकाला गया। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि पुलिस की ‘ग्रेडेड रिस्पॉन्स’ प्रणाली के तहत पैलेट गन का इस्तेमाल भी एक चरण हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत किसी विशेष मामले में पेलेट के इस्तेमाल की जांच के खिलाफ नहीं है, लेकिन यह दिखाना होगा कि मौजूदा नियमों में इसका उपयोग किस प्रकार निर्धारित किया गया है।

प्रोटोकॉल बनाने की मांग पर कोर्ट की टिप्पणी

सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता का कहना है कि पैलेट गन का अत्यधिक इस्तेमाल हुआ है, तो अदालत से इनके उपयोग के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल तय करने की मांग की जा सकती है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि मांग विशेष रूप से धातु के पेलेट के उपयोग को लेकर है। जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि अदालत को ऐसे नियम या उदाहरण दिखाने होंगे, जिनसे यह स्पष्ट हो कि पैलेट गन का इस्तेमाल मनमाने तरीके से किया जा रहा है।

सुनवाई में पुराने नियमों का भी हुआ जिक्र

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कलकत्ता हाई कोर्ट के एक पुराने नियम का उल्लेख किया, जिसमें गोला-बारूद बचाने के उद्देश्य से गोली चलाने को लेकर प्रावधान था। इस पर सॉलिसिटर जनरल ने टिप्पणी की कि वह संभवतः औपनिवेशिक दौर का नियम रहा होगा। इसके जवाब में जस्टिस बागची ने कहा कि वह नियम बाद में समाप्त कर दिया गया था।

विपक्ष ने भी उठाए सवाल

दिल्ली में छात्रों पर पैलेट गन के कथित इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ बर्बरता हुई और उन पर पैलेट गन चलाई गई। उन्होंने इस मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के साथ जो हुआ, उसकी नैतिक जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

 

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