Wednesday , 23 September 2026

भूकंप से कांप रहा था अस्पताल, बिजली भी गुल… टॉर्च की रोशनी में डॉक्टरों ने कराई डिलीवरी, 1.3 किलो की बच्ची का जन्म

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: इंडोनेशिया के ईस्ट नुसा तेंगारा में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बीच डॉक्टरों ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में एक महिला की डिलीवरी कराई। अस्पताल की इमारत भूकंप के झटकों से हिल रही थी और बिजली भी चली गई थी। इसके बावजूद डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में ऑपरेशन कर बच्ची को सुरक्षित जन्म दिलाया। समय से करीब दो महीने पहले जन्मी इस बच्ची का वजन सिर्फ 1.3 किलोग्राम था। उसका नाम जेम्पिता रखा गया है, जो इंडोनेशियाई शब्द जेम्पा से लिया गया है और इसका अर्थ भूकंप होता है।

39 वर्षीय मारिया फ्लोरिडा नोगो केलेन की गर्भावस्था में पहले से ही जटिलताएं थीं। वह नगेकेओ इलाके में रहती हैं, जो भूकंप के केंद्र के करीब बताया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, उनकी हालत को देखते हुए डिलीवरी में देरी करना जोखिम भरा हो सकता था। उन्हें जानलेवा दौरा पड़ने का खतरा था। इसलिए भूकंप के झटकों के बीच ही तत्काल ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया।

बिजली गई तो टॉर्च की रोशनी में हुआ ऑपरेशन

मारिया की डॉक्टर योना सारा पारदेड़े के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान अस्पताल में बिजली की समस्या बनी हुई थी। बिजली जाने के बाद डॉक्टरों ने टॉर्च की रोशनी में अपना काम जारी रखा। इस दौरान भूकंप के झटके महसूस होते रहे और अस्पताल की इमारत भी हिल रही थी।

डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय से पहले जन्म लेने वाली बच्ची को सुरक्षित निकालना थी। जेम्पिता का जन्म गर्भावस्था पूरी होने से करीब दो महीने पहले हुआ। उसका वजन भी महज 1.3 किलोग्राम था। डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में वेंटिलेटर तक उपलब्ध नहीं था, लेकिन इसके बावजूद टीम ने ऑपरेशन पूरा किया।

जन्म के बाद टेंट में रखा गया इनक्यूबेटर

जन्म के बाद जेम्पिता को इनक्यूबेटर में रखा गया, क्योंकि वह समय से पहले पैदा हुई थी और उसे विशेष निगरानी की जरूरत थी। भूकंप से अस्पताल की इमारत को खतरा होने के कारण बच्ची को अस्पताल के अंदर रखने के बजाय बाहर लगाए गए एक टेंट में रखा गया।

डॉक्टर लगातार बच्ची की निगरानी करते रहे। जन्म के बाद उसकी हालत स्थिर बताई गई। वहीं, डिलीवरी के बाद मारिया को अधिक रक्तस्राव की समस्या हुई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उनका उपचार किया और उनकी स्थिति को संभाला।

बच्ची के नाम के पीछे भी भूकंप की कहानी

जेम्पिता का नाम भी उसके जन्म के हालात से जुड़ा हुआ है। उसका नाम इंडोनेशियाई शब्द जेम्पा से लिया गया है, जिसका अर्थ भूकंप होता है। 7.7 तीव्रता के भूकंप के दौरान जन्म लेने के कारण परिवार और डॉक्टरों ने उसका नाम जेम्पिता रखा।

भूकंप में अब तक 54 लोगों की मौत

ईस्ट नुसा तेंगारा में आए 7.7 तीव्रता के इस भूकंप से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। अब तक 54 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है और अस्पताल भी प्रभावित हुए हैं।

भूकंप के बाद कई मेडिकल टीमों ने अस्पतालों के बाहर टेंट लगाकर घायलों का इलाज शुरू किया। आफ्टरशॉक्स के डर से कई लोग अपने घरों में लौटने से बच रहे हैं। कुछ इलाकों में लोगों के सामने साफ पानी और भोजन की जरूरत भी बनी हुई है।

मारिया ने मुश्किल हालात में इलाज करने वाली मेडिकल टीम का आभार जताया। उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के दौरान वह डरी नहीं और उनका ध्यान अपने बच्चों के लिए स्वस्थ रहने पर था। उन्हें इस बात की राहत है कि मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद डॉक्टरों ने उनका साथ नहीं छोड़ा।

 

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