
यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए दो बड़ी राहत भरी खबरें सामने आई हैं। पहली राहत उन सहायक अध्यापकों को मिलेगी, जो प्रधानाध्यापक के खाली पदों पर कार्यरत हैं और इस संबंध में कोर्ट में याचिका दाखिल कर चुके हैं। ऐसे पात्र शिक्षकों को अधिकतम तीन साल का बकाया वेतन (एरियर) मिलेगा। वहीं, दूसरी राहत अंतरजनपदीय तबादलों को लेकर मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आवेदन करने से वंचित रह गए शिक्षकों को दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया है।
इन शिक्षकों को मिलेगा 3 साल का एरियर
उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कोर्ट के आदेश का पालन कराने के निर्देश सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) को जारी किए हैं। इसका लाभ केवल उन्हीं याचिकाकर्ता सहायक अध्यापकों को मिलेगा, जिन्हें बीएसए ने प्रधानाध्यापक के पद पर कार्य करने के लिए अधिकृत किया है और जिन्होंने वेतन भुगतान के लिए आवेदन भी किया है।
बीएसए यह जांच करेंगे कि संबंधित शिक्षक ने सहायक अध्यापक के रूप में पांच वर्ष की सेवा पूरी की है या नहीं। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वह वास्तव में प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य कर रहा है या नहीं। जांच में पात्र पाए जाने पर शिक्षक को याचिका दाखिल करने की तारीख से अधिकतम पिछले तीन वर्ष का बकाया वेतन दिया जाएगा, भले ही वह इससे अधिक समय से प्रधानाध्यापक का कार्य कर रहा हो।
तबादलों पर हाईकोर्ट से बड़ी राहत
अंतरजनपदीय तबादलों को लेकर भी शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने पति-पत्नी दोनों के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक होने वाले मामलों में स्थानांतरण के लिए आवेदन करने की समय सीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ा दी है।
यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने ज्योति कुशवाहा और अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
क्या है पूरा मामला?
4 जून 2026 को जारी शासनादेश में कहा गया था कि यदि पति-पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक हैं और उनमें से कोई एक स्थानांतरण के लिए आवेदन करता है, तो शिक्षक-छात्र अनुपात कम वाले जिले में दोनों में से किसी एक का स्थानांतरण किया जा सकता है।
इसके बाद 22 जून 2026 को जारी स्पष्टीकरण में कहा गया कि पति या पत्नी में से जिसने आवेदन किया होगा, केवल उसी के स्थानांतरण पर विचार किया जाएगा। इस स्पष्टीकरण के समय सीमा समाप्त होने के ठीक पहले जारी होने के कारण कई शिक्षक आवेदन नहीं कर सके।
सरकार की सहमति के बाद बढ़ी समय सीमा
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने भी आवेदन की समय सीमा बढ़ाने पर कोई आपत्ति नहीं जताई। इसके बाद हाईकोर्ट ने समय सीमा दो सप्ताह के लिए बढ़ाने का आदेश दे दिया। इससे ऐसे शिक्षकों को अब आवेदन करने का एक और अवसर मिल गया है, जो पहले आवेदन नहीं कर पाए थे।
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