
बिजनेस डेस्क: बीमा क्षेत्र को लेकर भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेज बिकवाली देखने को मिली। PB Fintech के शेयरों में एक समय करीब 36 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई, जबकि Turtlemint के शेयर भी करीब 20 फीसदी तक फिसले। HDFC Life और ICICI Prudential Life जैसी बीमा कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव दिखाई दिया। शुक्रवार को भी इन शेयरों में कमजोरी बनी हुई है।
इस गिरावट की प्रमुख वजह IRDAI की ओर से प्रस्तावित नए नियमों को माना जा रहा है। प्रस्तावित बदलावों से बीमा कंपनियों और वितरण चैनलों की कमीशन आधारित कमाई, खर्च और पॉलिसी बेचने के तरीकों पर असर पड़ने की आशंका है। बाजार में इसे लेकर चिंता है कि अगर ये बदलाव लागू होते हैं तो कंपनियों के राजस्व और मार्जिन पर दबाव बढ़ सकता है।
कमीशन पर दोबारा लग सकती है सीमा
IRDAI ने लाइफ, हेल्थ और मोटर बीमा में अलग-अलग उत्पादों और वितरण चैनलों के हिसाब से कमीशन की सीमा फिर से लागू करने का प्रस्ताव रखा है। वर्ष 2023 में कमीशन पर सेगमेंट आधारित सीमा हटा दी गई थी।
प्रस्तावित व्यवस्था में कमीशन को नियंत्रित करने का तरीका बदला जा सकता है। इसी कारण बीमा कंपनियों और उनके वितरण कारोबार पर इसके संभावित वित्तीय असर को लेकर बाजार में चिंता दिखाई दे रही है।
हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस में कमीशन घटने की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रस्तावित ढांचे में हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस के नए कारोबार पर मिलने वाला कमीशन मौजूदा स्तर की तुलना में कम हो सकता है। कुछ मामलों में कमीशन में करीब एक-तिहाई से दो-तिहाई तक की संभावित कटौती का अनुमान लगाया गया है।
अगर ऐसा होता है तो बीमा उत्पाद बेचने वाले वितरण नेटवर्क की शुरुआती कमाई प्रभावित हो सकती है। इसका असर कंपनियों के कारोबार और आय पर भी पड़ने की आशंका है।
लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन भुगतान का तरीका बदलने का प्रस्ताव
फिलहाल लाइफ इंश्योरेंस में कमीशन का बड़ा हिस्सा पॉलिसी बेचने के समय या शुरुआती अवधि में मिल सकता है। प्रस्ताव में कमीशन को पूरी पॉलिसी अवधि में अधिक समान रूप से बांटने की बात कही गई है।
इस बदलाव से बीमा वितरण कारोबार की शुरुआती कमाई कम हो सकती है। बाजार में इसी वजह से कंपनियों के राजस्व पर संभावित असर को लेकर चिंता बनी हुई है।
बीमा कंपनियों के खर्च पर भी नियंत्रण
IRDAI ने बीमा कंपनियों के Expenses of Management यानी EoM को भी तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव रखा है। जनरल इंश्योरेंस के मामले में EoM सीमा को पांच साल की अवधि में GWP के 30 फीसदी से घटाकर घरेलू GDPI के 20 फीसदी तक लाने का प्रस्ताव बताया गया है।
इस बदलाव का उद्देश्य कंपनियों के संचालन से जुड़े खर्चों को नियंत्रित करना है। हालांकि, बाजार में इसे बीमा कंपनियों की कमाई और मार्जिन पर असर डालने वाले संभावित कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
लोन के साथ अनिवार्य बीमा बेचने पर रोक
प्रस्ताव में बैंकों और एनबीएफसी को लोन के साथ इंश्योरेंस को अनिवार्य रूप से जोड़ने से रोकने की बात भी कही गई है। इससे बैंकों को बीमा वितरण से मिलने वाली फीस आय प्रभावित होने की आशंका बाजार में जताई जा रही है।
इस बदलाव का उद्देश्य लोन लेने वाले ग्राहकों पर बीमा उत्पाद खरीदने का दबाव कम करना है।
ग्राहकों को भ्रमित करने वाले तरीके पर रोक
IRDAI ने ऐसे डिजाइन और प्रक्रियाओं पर भी रोक लगाने का प्रस्ताव रखा है, जिनके जरिए ग्राहक को किसी खास विकल्प को चुनने के लिए भ्रमित या मजबूर किया जा सकता है। इसे डार्क पैटर्न के तौर पर जाना जाता है।
उदाहरण के तौर पर किसी बीमा उत्पाद की कीमत या उसकी प्रमुख विशेषताओं की पूरी जानकारी देने से पहले ग्राहक से विस्तृत निजी जानकारी मांगना ऐसी प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।
IRDAI क्यों करना चाहता है ये बदलाव?
प्रस्तावित बदलावों के पीछे बीमा क्षेत्र में मिस-सेलिंग को कम करना, बीमा की लागत घटाना और ग्राहकों के लिए प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना प्रमुख उद्देश्य बताए गए हैं। इसके अलावा बैंक से लोन लेते समय ग्राहकों को जबरन बीमा बेचने की शिकायतों पर भी रोक लगाने की कोशिश है।
इस व्यवस्था के जरिए ग्राहक को यह समझने में मदद मिलने की उम्मीद है कि उसके भुगतान का कितना हिस्सा किस मद में और किसे जा रहा है।
3 जुलाई को सामने आया था बदलाव का संकेत
IRDAI के प्रस्तावित बदलावों को लेकर जुलाई में भी चर्चा हुई थी। 3 जुलाई की Reuters रिपोर्ट में बताया गया था कि बीमा नियामक कमीशन व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रहा है। इसमें खास तौर पर शुरुआती दौर में मिलने वाले बड़े कमीशन को कम करके पॉलिसी की अवधि के दौरान भुगतान फैलाने पर विचार की बात सामने आई थी।
उस समय इस प्रस्ताव को करीब 4 से 5 सप्ताह में लाए जाने की बात कही गई थी, लेकिन इसे करीब 2 से 3 महीने बाद पेश किया गया।
Navyug Samachar