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लखनऊ के इस मंदिर में दशहरे पर होती है रावण की पूजा, 125 साल पुराने दरबार की अनोखी परंपरा

लखनऊ डेस्क: दशहरे पर देशभर में रावण के पुतले जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां इस दिन लंकापति रावण की पूजा की जाती है। पुराने लखनऊ के रानी कटरा स्थित चारों धाम मंदिर में पिछले करीब 125 वर्षों से रावण दरबार सजाने और उसकी आराधना करने की परंपरा चली आ रही है। यहां वैदिक मंत्रोच्चार और आरती के साथ रावण के ज्ञान, विद्वता और भगवान शिव के प्रति उसकी भक्ति को याद किया जाता है।

एक ही मंदिर में देवी-देवताओं के साथ सजा है रावण दरबार

पुराने चौक इलाके की संकरी गलियों में स्थित चारों धाम मंदिर का निर्माण करीब 125 वर्ष पहले लाला कुंदन लाल और कुंज बिहारी लाल ने करवाया था। मंदिर के मुख्य परिसर में रामेश्वरम महादेव समेत प्रमुख देवी-देवताओं के विग्रह स्थापित हैं। इसी परिसर के एक हिस्से में रावण का भव्य दरबार भी बनाया गया है।

इस दरबार में दस सिरों वाले रावण की प्रतिमा सिंहासन पर विराजमान है। उसके दोनों ओर मंत्रियों और दरबारियों की मूर्तियां स्थापित हैं। यह स्थान उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहां रावण को केवल खलनायक के रूप में देखने के बजाय रामायण के एक विद्वान और प्रभावशाली पात्र के तौर पर भी सम्मान दिया जाता है।

रामलीला में रावण का किरदार निभाने वाले विष्णु त्रिपाठी से जुड़ी है परंपरा

रावण को रामायण में अहंकार और अधर्म के प्रतीक के रूप में देखा जाता है, लेकिन उसे प्रकांड विद्वान और भगवान शिव का अनन्य भक्त भी माना जाता है। लखनऊ के चारों धाम मंदिर में रावण पूजा की परंपरा इसी मान्यता से जुड़ी है।

लंबे समय तक रावण का किरदार निभाने वाले विष्णु त्रिपाठी ‘लंकेश’ भी दशहरे पर इस दरबार में पूजा करते रहे। वह वर्ष 1978 से चौक की रामलीला में रावण की भूमिका निभा रहे थे। अभिनय के चलते ही उन्हें ‘लंकेश’ नाम से पहचान मिली। वर्ष 2003 में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने भी उन्हें इस उपाधि से सम्मानित किया था।

विष्णु त्रिपाठी के निधन के बाद मंदिर में रावण पूजा की परंपरा को आगे बढ़ाने को लेकर सवाल उठे थे। अब उनके बेटे इस जिम्मेदारी को संभालेंगे। इसके जरिए पुराने लखनऊ की इस विशिष्ट धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

रावण को केवल उसकी बुराइयों से नहीं आंकते मंदिर के पुजारी

मंदिर के पुजारी सियाराम अवस्थी के मुताबिक, रावण को केवल उसके अहंकार या एक गलती के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, रावण चारों वेदों और छह शास्त्रों का ज्ञाता था। वह भगवान शिव का अनन्य भक्त होने के साथ-साथ अद्वितीय संगीतज्ञ और खगोल-ज्योतिष का बड़ा विद्वान भी था।

पुजारी का मानना है कि रावण की भूमिका नारायण की लीला और मोक्ष की गति को पूर्ण करने से भी जुड़ी थी। मंदिर में उसकी पूजा का उद्देश्य उसकी बुराइयों का महिमामंडन करना नहीं, बल्कि उसके ज्ञान, पांडित्य और शिवभक्ति को नमन करना है।

शहर में जलते हैं रावण के पुतले, यहां होती है आरती

दशहरे पर जब ऐशबाग समेत लखनऊ के अलग-अलग मैदानों में रावण के विशाल पुतले जलाए जाते हैं, उसी समय रानी कटरा स्थित चारों धाम मंदिर में श्रद्धालु रावण के ज्ञान और तपस्या को याद करते हैं। यहां आरती और पूजा के जरिए उससे जुड़े विद्वता और शिवभक्ति के पहलुओं को महत्व दिया जाता है।

लखनऊ की गंगा-जमुनी तहजीब और सांस्कृतिक विविधता के बीच मौजूद यह रावण दरबार शहर की एक अलग पहचान पेश करता है। करीब सवा सौ साल से चली आ रही यह परंपरा दिखाती है कि यहां दशहरे को देखने और रावण के व्यक्तित्व को समझने का एक अलग नजरिया भी मौजूद है।

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