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एक कंधे पर 50 लीटर गंगाजल, दूसरे पर नानी… गाजियाबाद में दो भाइयों की अनोखी कांवड़ यात्रा ने खींचा सबका ध्यान

यूपी डेस्क: कांवड़ यात्रा में आस्था के अलग-अलग रंग देखने को मिलते हैं, लेकिन गाजियाबाद से गुजर रही कांवड़ यात्रा में दो भाइयों की तस्वीर लोगों का ध्यान खींच रही है। हिमांशु चौहान और उनके भाई प्रिंस राघव अपनी नानी रूपा देवी को कंधे पर बैठाकर यात्रा कर रहे हैं। दोनों भाई हरिद्वार से 50 लीटर गंगाजल लेकर निकले हैं और इसी के साथ अपनी नानी को भी कांवड़ यात्रा में साथ लेकर चल रहे हैं।

नानी को कंधे पर बैठाकर निकले दोनों भाई

हिमांशु चौहान और प्रिंस राघव के लिए यह यात्रा सिर्फ हरिद्वार से गंगाजल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने तक सीमित नहीं है। दोनों ने अपनी नानी की खुशी और अच्छे स्वास्थ्य की कामना के साथ उन्हें भी यात्रा का हिस्सा बनाया है।

हिमांशु चौहान ने बताया कि दोनों भाई 11 अगस्त को नोएडा में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। इसके लिए वे हरिद्वार से 50 लीटर गंगाजल लेकर निकले हैं। उनकी प्रार्थना है कि भगवान शिव उनके परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखें और उनकी नानी रूपा देवी हमेशा स्वस्थ और प्रसन्न रहें।

कभी एक भाई तो कभी दूसरा संभालता है जिम्मेदारी

उम्र के इस पड़ाव पर नानी के लिए लंबी पैदल यात्रा करना आसान नहीं है। ऐसे में दोनों भाइयों ने उन्हें पीछे छोड़ने के बजाय अपने साथ लेकर चलने का फैसला किया। यात्रा के दौरान कभी हिमांशु नानी को कंधे पर उठाते हैं तो कभी प्रिंस राघव यह जिम्मेदारी संभालते हैं।

कांवड़ के साथ कंधे पर बैठी नानी की तस्वीर कांवड़ मार्ग से गुजर रहे लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस यात्रा में नानी उनके लिए सिर्फ परिवार की बुजुर्ग सदस्य नहीं, बल्कि उनकी प्रार्थना और संकल्प का अहम हिस्सा हैं।

गाजियाबाद के खोड़ा में सेवा शिविर में रुके

यात्रा के दौरान दोनों भाई अपनी नानी के साथ सोमवार रात गाजियाबाद के खोड़ा इलाके में स्थित चौहान परिवार कांवड़ सेवा शिविर में रुके। यहां कांवड़ियों के ठहरने, स्नान, भोजन और प्रसाद की व्यवस्था की गई है।

हिमांशु और प्रिंस राघव ने बताया कि कांवड़ मार्ग पर श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा के लिए की जा रही व्यवस्थाओं से यात्रा का उत्साह और बढ़ जाता है।

एसीपी ने भी किया कांवड़ियों का स्वागत

शिविर में पहुंचे एसीपी इंदिरापुरम सूर्यबली मौर्य ने कांवड़ियों को प्रसाद वितरित किया और पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। उन्होंने चौहान परिवार की 36 वर्षों से चली आ रही कांवड़ सेवा की भी सराहना की।

हालांकि, इस यात्रा में सबसे भावुक तस्वीर दोनों भाइयों और उनकी नानी की रही। एक ओर कांवड़ में पवित्र गंगाजल है और दूसरी ओर कंधे पर परिवार की बुजुर्ग सदस्य के प्रति जिम्मेदारी और स्नेह। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए आगे बढ़ रही यह कांवड़ यात्रा आस्था के साथ परिवार के प्रति समर्पण की भी तस्वीर पेश कर रही है।

 

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