
बिजनेस डेस्क: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली. सेंसेक्स 570 अंक टूटकर 72,000 के स्तर से नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी 199 अंक गिरकर 22,421 पर पहुंच गया. बाजार में आई इस तेज गिरावट के चलते बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 465 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया. इससे निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति एक ही दिन में कम हो गई.
कारोबार के दौरान एक समय सेंसेक्स करीब 1,200 अंक तक टूट गया था और 52 हफ्ते के निचले स्तर 71,292 पर पहुंच गया. उस समय निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये दांव पर थे. एनएसई पर 2,789 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि सिर्फ 594 शेयर बढ़त में रहे. निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक भी करीब 2 फीसदी टूट गए. बाजार में बढ़ी अनिश्चितता का असर इंडिया विक्स पर भी दिखा, जो 12 फीसदी से ज्यादा चढ़ गया.
विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली ने बढ़ाया दबाव
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली रही. बुधवार को ही विदेशी निवेशकों ने 10,148 करोड़ रुपये के शेयर बेच डाले. इस सप्ताह अब तक उनकी बिकवाली का आंकड़ा करीब 26,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. बाजार से विदेशी पूंजी की निकासी ने निवेशकों के बीच धारणा को कमजोर कर दिया.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से बढ़ी चिंता
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में लगातार बढ़ोतरी ने भी भारतीय बाजार पर दबाव बढ़ाया. 10 साल की अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.31 फीसदी हो गई, जो 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है. बॉन्ड यील्ड बढ़ने पर निवेशकों के लिए शेयर बाजार की तुलना में सुरक्षित निवेश विकल्प ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं. इसी वजह से इक्विटी बाजार से पूंजी निकलने का दबाव बढ़ा.
इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी कमजोर हुआ और 95.98 रुपये प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया. रुपये में गिरावट ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया.
ऑटो शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव
गुरुवार की बिकवाली में ऑटो क्षेत्र के शेयरों पर भी भारी दबाव रहा. निफ्टी ऑटो सूचकांक 4 फीसदी से ज्यादा टूट गया. महिंद्रा और मारुति सुजुकी के शेयरों में खासा नुकसान देखा गया.
सितंबर में ऑटो बिक्री के आंकड़े बाजार की उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे. इसका असर ऑटो कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया और पूरे क्षेत्र में बिकवाली बढ़ गई.
22,500 का अहम स्तर टूटा
तकनीकी स्तर पर भी बाजार के लिए गुरुवार का कारोबार महत्वपूर्ण रहा. निफ्टी 22,500 के अहम समर्थन स्तर से नीचे चला गया और 22,421 पर बंद हुआ. डेरिवेटिव बाजार से जुड़े जानकारों ने पहले ही संकेत दिया था कि 22,500 का स्तर टूटने पर निफ्टी 22,400 के आसपास तक फिसल सकता है.
एक्सिस सिक्योरिटीज के आकलन के मुताबिक, इस अहम समर्थन स्तर के टूटने से बाजार में बिकवाली का दबाव और बढ़ा.
लगातार आठवें हफ्ते गिरावट, 25 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा
भारतीय शेयर बाजार में लगातार आठवें सप्ताह गिरावट दर्ज की जा रही है. साल 2001 में आए डॉट-कॉम संकट के बाद यह पहला मौका बताया जा रहा है, जब बाजार इतने लंबे समय तक लगातार दबाव में रहा है. इस गिरावट की अवधि ने 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और 2020 के कोरोना महामारी के दौरान आई बाजार गिरावट को भी पीछे छोड़ दिया है.
हालांकि, विदेशी निवेशकों का रुझान पूरी तरह बाजार से बाहर निकलने जैसा नहीं है. वे शेयर बाजार में बिकवाली के साथ प्राथमिक बाजार में निवेश भी कर रहे हैं, जिससे निवेश के अलग-अलग क्षेत्रों में उनके रुख का अंतर दिखाई देता है.
कच्चे तेल की कीमतों पर भी बाजार की नजर
बाजार की आगे की दिशा में कच्चे तेल की कीमतें भी अहम भूमिका निभा सकती हैं. ब्रेंट क्रूड के दाम 98 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आने के बाद बाजार में आगे कुछ सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. बाजार विशेषज्ञ मौजूदा गिरावट को अल्प अवधि का चरण मान रहे हैं और लंबी अवधि के निवेशकों के नजरिए से बड़ी कंपनियों के गुणवत्तापूर्ण शेयरों पर नजर रखने की बात कह रहे हैं.
Navyug Samachar