
सेहत डेस्क : भारत में युवाओं के बीच मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। डिप्रेशन, एंग्जायटी और लगातार रहने वाला तनाव अब केवल भावनात्मक परेशानी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और डिजिटल दुनिया पर बढ़ती निर्भरता युवाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर रही है।
करियर की दौड़ बढ़ा रही मानसिक दबाव
आज के दौर में पढ़ाई और करियर को लेकर युवाओं पर पहले से कहीं अधिक दबाव है। प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता, अच्छे अंक हासिल करने की होड़ और परिवार की अपेक्षाएं कई युवाओं को लगातार तनाव की स्थिति में रखती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक तनाव में रहने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिसका असर याददाश्त, सीखने की क्षमता और भावनाओं को नियंत्रित करने की क्षमता पर पड़ता है।
डिजिटल दुनिया बन रही नई चुनौती
मोबाइल फोन, सोशल मीडिया, रील्स और शॉर्ट वीडियो आज युवाओं की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। लगातार स्क्रीन पर समय बिताने से दिमाग को बार-बार त्वरित संतुष्टि मिलने लगती है, जिससे डिजिटल प्लेटफॉर्म की आदत बढ़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसका असर ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, नींद की गुणवत्ता और मानसिक संतुलन पर पड़ सकता है। इसके चलते चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और एकाग्रता की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
शहरी जीवनशैली बढ़ा रही अकेलेपन की भावना
शिक्षा और रोजगार के लिए बड़ी संख्या में युवा अपने घरों से दूर शहरों की ओर रुख कर रहे हैं। नए माहौल में सामाजिक समर्थन की कमी और बढ़ती प्रतिस्पर्धा कई बार अकेलेपन की भावना को जन्म देती है। नौकरी की अनिश्चितता, आर्थिक दबाव और भविष्य की चिंता मानसिक तनाव को और बढ़ा सकती है, जिससे एंग्जायटी और अवसाद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
नशे की आदत दिमाग के विकास पर डाल सकती है असर
विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में निकोटीन, शराब या अन्य नशीले पदार्थों का सेवन दिमाग के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इससे निर्णय लेने की क्षमता, आत्मनियंत्रण और व्यवहार संबंधी कार्यों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ जाती है। युवावस्था में ऐसी आदतें भविष्य में मानसिक और न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
मानसिक स्वास्थ्य को लेकर झिझक भी बड़ी वजह
आज भी समाज के कई हिस्सों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को खुलकर स्वीकार नहीं किया जाता। इसी कारण कई युवा अपनी परेशानियां साझा करने या विशेषज्ञ की मदद लेने से बचते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर सहायता न मिलने पर मानसिक तनाव धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकता है और इसके लक्षण थकान, भूलने की समस्या, चक्कर आना या लगातार सिरदर्द के रूप में भी सामने आ सकते हैं।
समय रहते जागरूकता है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना और समय पर सहायता लेना बेहद जरूरी है। संतुलित जीवनशैली, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम, सीमित स्क्रीन टाइम और परिवार व दोस्तों के साथ संवाद मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
Navyug Samachar