
लखनऊ डेस्क : उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का हिस्सा गिरने से हुए हादसे के बाद प्रदेश सरकार ने मामले में कड़ा रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर दुर्घटना की गहन जांच के लिए दो उच्चस्तरीय समितियों का गठन किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न की जाए और दुर्घटना के कारणों का जल्द से जल्द पता लगाया जाए। प्रशासन और संबंधित विभागों को भी तत्काल आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
निर्माणाधीन पुल का सेगमेंट गिरने से हुआ हादसा
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक बेतवा नदी पर बन रहे पुल के पिलर संख्या पी-5 और पी-6 के बीच स्थित सेगमेंटल स्पान अचानक ढह गया था। इसी घटना के चलते बड़ा हादसा हुआ, जिससे कई श्रमिक प्रभावित हुए। हादसे के बाद निर्माण स्थल पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई और राहत एवं बचाव अभियान तत्काल शुरू किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए गठित समितियों को निर्माण कार्य से जुड़े सभी पहलुओं की विस्तार से जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जांच के दौरान तकनीकी मानकों, निर्माण प्रक्रिया, डिजाइन और उपयोग की गई सामग्री की गुणवत्ता का भी मूल्यांकन किया जाएगा।
तकनीकी और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की होगी जांच
जांच समितियां यह भी पता लगाएंगी कि पुल निर्माण के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानकों और तकनीकी दिशानिर्देशों का पालन किया गया था या नहीं। इसके साथ ही निर्माण एजेंसी, निगरानी से जुड़े अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।
प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। यदि किसी अधिकारी, संस्था या संबंधित पक्ष की लापरवाही उजागर होती है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बीएनएस की धाराओं में दर्ज हुआ मामला
हादसे को लेकर कुरारा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) और 125(ए) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।
मृतक श्रमिकों के परिजनों को मिलेगी आर्थिक सहायता
दुर्घटना में जान गंवाने वाले छह श्रमिकों के परिवारों के लिए राज्य सरकार ने आर्थिक सहायता की घोषणा की है। प्रत्येक मृतक के परिजनों को चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान की जाएगी।
इसके अलावा निर्माण कार्य से जुड़ी कंपनी ने भी मृतक श्रमिकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की सहायता देने का फैसला किया है। वहीं श्रम विभाग की ओर से प्रत्येक प्रभावित परिवार को 1.25 लाख रुपये की अतिरिक्त वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकारी योजनाओं का भी मिलेगा लाभ
प्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों को केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं रखा है। प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि पात्र परिवारों को पेंशन, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना, राशन कार्ड, आवास योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाए।
हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिक राजेश पाल के परिवार के लिए विशेष सहायता का भी प्रावधान किया गया है। उनकी दोनों बेटियों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जोड़ा जाएगा। योजना के तहत दोनों बच्चियों को 18 वर्ष की आयु पूरी होने तक प्रतिमाह 2500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
हमीरपुर पुल हादसे के बाद सरकार की पहली प्राथमिकता प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना और दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाना है। दो उच्चस्तरीय जांच समितियों के गठन के बाद अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि रिपोर्ट सामने आने के बाद हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान होगी और उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई की दिशा तय की जाएगी।
Navyug Samachar