यूपी डेस्क : उत्तर प्रदेश में गैर-पंजीकृत वित्तीय संस्थाओं द्वारा ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज देने, मनमानी प्रोसेसिंग फीस वसूलने और फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को ठगने वाले नेटवर्क पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। योगी सरकार ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए संबंधित एजेंसियों को तत्काल और प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
मुख्य सचिव एस.पी. गोयल की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा संयोजित राज्य स्तरीय समन्वय समिति (एसएलसीसी) की 21वीं बैठक में वित्तीय अनियमितताओं और आर्थिक अपराधों पर व्यापक चर्चा की गई। बैठक में स्पष्ट किया गया कि गैर-पंजीकृत वित्तीय इकाइयों की अवैध गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ऊंचे ब्याज और अतिरिक्त शुल्क वसूलने वालों पर शिकंजा
बैठक में बताया गया कि कई गैर-पंजीकृत संस्थाओं द्वारा अत्यधिक ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने, अतिरिक्त प्रोसेसिंग शुल्क लेने, ऋण वसूली के लिए अनैतिक तरीके अपनाने और फर्जी सेविंग बॉन्ड जारी करने जैसी शिकायतें सामने आई हैं।
इन शिकायतों को देखते हुए संबंधित विभागों और एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि ऐसे मामलों में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए।
आर्थिक अपराधों की जांच और अभियोजन पर विशेष जोर
मुख्य सचिव ने कहा कि आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में केवल जांच ही नहीं, बल्कि प्रभावी अभियोजन और दोष सिद्धि तक अधिकारियों को सक्रिय रहना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कठोर और त्वरित कार्रवाई सरकार की प्राथमिकता है।
निवेश से पहले जांच-पड़ताल करने की सलाह
बैठक के दौरान आम जनता को वित्तीय धोखाधड़ी से बचाने के लिए जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। मुख्य सचिव ने कहा कि लोगों को किसी भी निवेश योजना में धन लगाने से पहले संबंधित कंपनी के दस्तावेजों की सावधानीपूर्वक जांच करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि निवेश से पहले कंपनी के आधिकारिक पोर्टल और उपलब्ध सूचनाओं का सत्यापन करना जरूरी है, ताकि किसी प्रकार की ठगी का शिकार होने से बचा जा सके।
फर्जी कंपनियों और अवैध जमा योजनाओं पर नजर
बैठक में बहुराज्यीय सहकारी समितियों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों, आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) और रजिस्ट्रार सहकारी समितियों द्वारा की जा रही कार्रवाई की भी समीक्षा की गई।
इसके साथ ही अनियमित रूप से जमा स्वीकार करने वाली कंपनियों, गैर-पंजीकृत संस्थाओं की अवैध वित्तीय गतिविधियों और उनसे जुड़ी खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।
‘सचेत’ पोर्टल पर शिकायतों का होगा त्वरित निस्तारण
मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि ‘सचेत’ पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों का संबंधित विभाग समयबद्ध तरीके से निस्तारण करें और कार्रवाई की पूरी जानकारी पोर्टल पर अपलोड करें। इससे शिकायतकर्ताओं को भी अपने मामले की प्रगति की जानकारी मिलती रहेगी।
साइबर और वित्तीय अपराध रोकने के लिए बढ़ेगा समन्वय
बैठक में वित्तीय और साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए बैंकों, प्रवर्तन एजेंसियों और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भारतीय रिजर्व बैंक के क्षेत्रीय निदेशक राजीव द्विवेदी ने भी वित्तीय साक्षरता बढ़ाने की जरूरत बताई और कहा कि जागरूक उपभोक्ता ही वित्तीय धोखाधड़ी से सबसे बेहतर तरीके से बच सकता है।
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