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दुनिया का सबसे अनोखा गांव! जहां सड़कें नहीं, घरों की छतों पर चलता है पूरा जीवन, ईरान का मसुलेह बना आकर्षण का केंद्र

अंतर्राष्ट्रीय डेस्क: क्या आपने कभी ऐसे गांव के बारे में सुना है, जहां एक भी सड़क नहीं हो, लेकिन लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी बिना किसी परेशानी के चलती हो? जहां कार और बाइक का प्रवेश संभव नहीं, फिर भी बाजार सजते हैं, कैफे चलते हैं और हजारों पर्यटक हर साल पहुंचते हैं। ईरान के उत्तरी हिस्से में पहाड़ों के बीच बसा मसुलेह गांव अपनी अनोखी बनावट और जीवनशैली की वजह से पूरी दुनिया का ध्यान खींच रहा है। यहां एक घर की छत दूसरे घर तक पहुंचने का रास्ता बन जाती है।

पहाड़ों की ढलान पर बसा है सदियों पुराना गांव

मसुलेह ईरान के उत्तरी गीलान प्रांत में एल्बोर्ज पर्वत श्रृंखला की ढलानों पर स्थित है। यह गांव समुद्र तल से लगभग एक हजार मीटर से अधिक की ऊंचाई पर बसा है। पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण यहां पारंपरिक सड़कें बनाना आसान नहीं था। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सदियों पहले ऐसी वास्तुकला विकसित की, जिसने आज इस गांव को दुनिया भर में अलग पहचान दिलाई है। प्राकृतिक ढलान के अनुसार बसे इस गांव में घर सीढ़ीनुमा शैली में एक-दूसरे के ऊपर बने हुए हैं।

जहां एक घर की छत ही दूसरे घर की सड़क बन जाती है

मसुलेह की सबसे बड़ी खासियत इसकी अनोखी वास्तुकला है। यहां नीचे बने मकान की छत ऊपर बने घर तक पहुंचने का रास्ता, आंगन और सार्वजनिक स्थान का काम करती है। यानी जिस जगह लोग पैदल चलते हैं, वही किसी दूसरे परिवार के घर की छत होती है। इसी वजह से यहां अलग से सड़क बनाने की जरूरत कभी नहीं पड़ी और पूरा गांव पैदल यात्रियों को ध्यान में रखकर विकसित हुआ।

गांव में नहीं चलती कार या बाइक

मसुलेह के भीतर किसी भी कार, बाइक या बड़े वाहन का प्रवेश संभव नहीं है। संकरी गलियां और छतों से जुड़े रास्ते केवल पैदल आने-जाने के लिए बने हैं। स्थानीय लोग अपने दैनिक कार्य पैदल ही करते हैं। सामान ढोने के लिए छोटे हाथ ठेलों, पशुओं या मानव श्रम का सहारा लिया जाता है। यही कारण है कि यहां ट्रैफिक जाम, हॉर्न और प्रदूषण जैसी समस्याएं देखने को नहीं मिलतीं।

छतों पर सजते हैं बाजार और चलते हैं कैफे

यहां की छतें केवल आने-जाने का रास्ता नहीं हैं, बल्कि गांव की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र हैं। इन छतों पर स्थानीय हस्तशिल्प, ऊनी कपड़े, मसाले, सूखे मेवे और पारंपरिक वस्तुओं की दुकानें सजी रहती हैं। कई छोटे कैफे और भोजनालय भी यहीं संचालित होते हैं, जहां पर्यटक पारंपरिक ईरानी चाय, स्थानीय व्यंजनों और पहाड़ों के खूबसूरत नजारों का आनंद लेते हैं।

कोहरे की चादर में छिप जाता है पूरा गांव

मसुलेह की प्राकृतिक सुंदरता भी इसे खास बनाती है। चारों ओर फैले घने जंगल, पहाड़ और हरियाली इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। सुबह के समय अक्सर पूरा गांव घने कोहरे से ढक जाता है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है मानो घर बादलों के बीच तैर रहे हों। बारिश के मौसम और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा पर्यटकों और फोटोग्राफरों के लिए बेहद आकर्षक होता है।

करीब एक हजार साल पुराना है इतिहास

इतिहासकारों के अनुसार मसुलेह का इतिहास लगभग एक हजार वर्ष पुराना माना जाता है। यहां के अधिकांश मकान लकड़ी, पत्थर, मिट्टी और स्थानीय निर्माण सामग्री से बनाए गए हैं। इनकी बनावट ऐसी है कि सर्दियों की ठंड और लगातार होने वाली बारिश से लोगों को सुरक्षा मिल सके। आज भी नए निर्माण पारंपरिक शैली के अनुरूप ही किए जाते हैं, ताकि गांव की ऐतिहासिक पहचान बरकरार रहे।

घरों के रंग के पीछे भी है खास वजह

मसुलेह के अधिकांश घर हल्के पीले या मिट्टी जैसे रंगों में रंगे गए हैं। इसका कारण यहां अक्सर रहने वाला घना कोहरा है। हल्के रंग के मकान कोहरे में भी आसानी से दिखाई देते हैं, जिससे लोगों को आने-जाने में सुविधा होती है। यह परंपरा आज भी कायम है।

विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की कोशिश

मसुलेह को ईरान की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में गिना जाता है और इसे राष्ट्रीय विरासत के रूप में संरक्षित किया गया है। इसके ऐतिहासिक और वास्तु महत्व को देखते हुए इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने के प्रयास भी किए गए हैं। पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करते समय भी गांव की मूल संरचना और पारंपरिक स्वरूप को सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर जीते हैं यहां के लोग

मसुलेह के निवासी आज भी पारंपरिक जीवनशैली को अपनाए हुए हैं। यहां के लोग खेती, पशुपालन, पर्यटन और हस्तशिल्प के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। महिलाएं हाथ से बने ऊनी वस्त्र और सजावटी सामान तैयार करती हैं, जबकि पुरुष खेती और पर्यटन से जुड़े कार्यों में लगे रहते हैं। स्थानीय समुदाय आज भी अपनी संस्कृति और परंपराओं को पूरी निष्ठा के साथ संरक्षित किए हुए है।

भारतीय पर्यटकों के बीच भी बढ़ रहा आकर्षण

पिछले कुछ वर्षों में भारत से ईरान जाने वाले पर्यटकों के बीच भी मसुलेह की लोकप्रियता बढ़ी है। सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग अनुभव की तलाश करने वाले यात्रियों के लिए यह गांव खास आकर्षण बनकर उभरा है। शांत वातावरण, अनोखी वास्तुकला, प्राकृतिक सौंदर्य और बिना सड़कों वाली जीवनशैली यहां आने वालों को यादगार अनुभव प्रदान करती है।

 

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