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हर 9वें भारतीय पर कैंसर का खतरा! समय रहते पहचान बन सकती है जीवनरक्षक, स्क्रीनिंग और जागरूकता पर बढ़ा जोर

हेल्थ डेस्क: भारत में कैंसर के मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, बड़ी चुनौती केवल बीमारी नहीं बल्कि इसकी देर से पहचान है। जागरूकता की कमी, समय पर जांच न कराना और स्क्रीनिंग में देरी के कारण अधिकांश मामलों का पता तब चलता है, जब बीमारी गंभीर अवस्था में पहुंच चुकी होती है। इसी स्थिति को देखते हुए राज्यसभा की स्वास्थ्य समिति ने सस्ती स्क्रीनिंग, जल्द जांच, बेहतर इलाज और किफायती कैंसर देखभाल को लेकर सुझाव आमंत्रित किए हैं।

देर से पहचान बन रही सबसे बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में बड़ी संख्या में कैंसर के मरीजों की पहचान स्टेज-3 या स्टेज-4 में होती है। इसका प्रमुख कारण शुरुआती लक्षणों के प्रति जागरूकता की कमी और नियमित स्क्रीनिंग न कराना है। माना जाता है कि यदि कैंसर की समय रहते पहचान हो जाए तो इलाज की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।

मुंह, ब्रेस्ट और सर्वाइकल कैंसर के मामले बढ़े

देश में मुंह का कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, सर्वाइकल कैंसर, फेफड़ों और पेट से जुड़े कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। तंबाकू का सेवन, शराब, प्रदूषण, मोटापा, असंतुलित खानपान, शारीरिक निष्क्रियता और कुछ संक्रमण ऐसे प्रमुख कारण हैं, जो कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं।

स्क्रीनिंग और जागरूकता पर दिया जा रहा जोर

राज्यसभा की स्वास्थ्य समिति ने कैंसर की स्क्रीनिंग को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के साथ-साथ समय पर जांच और बेहतर इलाज की व्यवस्था पर सुझाव मांगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कैंसर से लड़ाई अस्पताल पहुंचने के बाद नहीं, बल्कि जागरूकता, नियमित जांच और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने से शुरू होती है।

शुरुआती स्टेज में इलाज की संभावना अधिक

जानकारों के अनुसार, कैंसर का शुरुआती चरण में पता चलने पर इलाज की सफलता की संभावना काफी अधिक रहती है। बताया गया है कि लगभग 70 प्रतिशत मामलों में बीमारी का पता अंतिम चरण में चलता है, जिससे उपचार अधिक जटिल हो जाता है। वहीं रिपोर्ट के अनुसार, समय पर स्क्रीनिंग और जागरूकता बढ़ने से पिछले वर्षों में मृत्यु दर में कमी आई है और सर्वाइवल रेट लगभग 70 प्रतिशत तक पहुंच चुका है।

कैंसर के प्रमुख जोखिम कारक

कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले प्रमुख कारणों में मोटापा, धूम्रपान, शराब का सेवन, प्रदूषण, कीटनाशकों के संपर्क में आना और अत्यधिक धूप के कारण त्वचा को होने वाला नुकसान शामिल हैं।

इन चीजों का अधिक सेवन करने से बचने की सलाह

विशेषज्ञ प्रोसेस्ड फूड, तली-भुनी चीजें, रेड मीट और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का अधिक सेवन करने से बचने की सलाह देते हैं। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली कई गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मददगार मानी जाती है।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम, तंबाकू और शराब से दूरी तथा समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराना कैंसर के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसके अलावा व्हीटग्रास, गिलोय, एलोवेरा, नीम, तुलसी और हल्दी जैसी पारंपरिक औषधीय वनस्पतियों का उपयोग भी कई लोग स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली के हिस्से के रूप में करते हैं, हालांकि इन्हें कैंसर के इलाज का विकल्प नहीं माना जाता।

 

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