
यूपी डेस्क: समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक रहे आलमबदी आजमी का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। कुछ समय पहले उनका इलाज लखनऊ के मेदांता अस्पताल में चल रहा था। चार दिन पहले उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद आजमगढ़ स्थित उनके आवास लाया गया था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सामने आते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
श्रद्धांजलि देने पहुंचने लगे नेता और समर्थक
आलमबदी आजमी के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में नेता, समर्थक और शुभचिंतक उनके आवास पहुंचने लगे। राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी मदनी, समाजवादी पार्टी के विधायक नफीस अहमद, उनके पुत्र मुस्तजाब आलम बाबू सहित कई लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके निधन को समाजवादी पार्टी ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है।
इंजीनियर से राजनीति तक का रहा लंबा सफर
आलमबदी आजमी का जन्म 16 मार्च 1936 को आजमगढ़ जिले में हुआ था। उनका निवास विंदावल क्षेत्र में था। उन्होंने 12वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया था। राजनीति में आने से पहले वह इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे, लेकिन बाद में नौकरी छोड़कर सार्वजनिक जीवन और जनसेवा का रास्ता चुना।
1996 में पहली बार बने विधायक
आलमबदी आजमी ने वर्ष 1996 में समाजवादी पार्टी के टिकट पर पहली बार विधानसभा चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने लगातार जनता के बीच सक्रिय रहकर अपनी अलग पहचान बनाई। सादगी, ईमानदार छवि और क्षेत्र की समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता उनकी प्रमुख पहचान रही, जिसके चलते उन्हें बार-बार जनता का समर्थन मिला।
पूरे राजनीतिक जीवन में सिर्फ एक चुनाव हारे
आलमबदी आजमी का राजनीतिक सफर बेहद सफल माना जाता है। वह अपने पूरे राजनीतिक करियर में केवल एक बार चुनाव हारे, जबकि पांच बार विधायक चुने गए। उत्तर प्रदेश की राजनीति में उन्होंने एक सम्मानित और प्रभावशाली जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी पहचान बनाई।
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के रहे करीबी
समाजवादी पार्टी में आलमबदी आजमी का विशेष स्थान था। वह पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी नेताओं में गिने जाते थे। बाद में पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ भी उनके अच्छे संबंध रहे। पार्टी के भीतर उनकी पहचान एक अनुभवी, सरल और ईमानदार नेता की रही, जिनकी राय को हमेशा महत्व दिया जाता था।
अपने पीछे छोड़ गए बड़ा परिवार
आलमबदी आजमी अपने पीछे पत्नी कुदैशा खान और छह बच्चों का परिवार छोड़ गए हैं। उन्होंने अपना सार्वजनिक जीवन जनसेवा और क्षेत्र के विकास के लिए समर्पित किया। उनके निधन से समाजवादी पार्टी और उत्तर प्रदेश की राजनीति ने एक अनुभवी और सम्मानित जनप्रतिनिधि को खो दिया है।
Navyug Samachar