Monday , 5 October 2026

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय किसे? CJP या विपक्ष…कांग्रेस ने दिया बड़ा जवाब, सियासी बहस तेज

नेशनल डेस्क: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 36 दिनों तक चले आंदोलन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने अपना देशव्यापी प्रदर्शन समाप्त करने का ऐलान कर दिया। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी लगातार पेपर लीक के मुद्दे पर सरकार को संसद और सड़क दोनों जगह घेरते रहे। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का श्रेय आखिर किसे मिलना चाहिए।

श्रेय पर कांग्रेस का साफ रुख

कांग्रेस के संगठन महासचिव और सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस मुद्दे पर पार्टी का पक्ष स्पष्ट किया है। एक साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि इस घटनाक्रम का श्रेय CJP को मिलेगा या विपक्ष को, तो उन्होंने कहा कि कांग्रेस किसी भी तरह का श्रेय लेने की इच्छुक नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह छात्रों, युवाओं और आम लोगों की जीत है, जिन्होंने सरकार के अहंकार, मनमानी, भ्रष्टाचार और कथित संरक्षण में चल रही अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई। उनके मुताबिक कांग्रेस पूरे आंदोलन के दौरान छात्रों के साथ खड़ी रही।

राहुल गांधी के प्रयासों का किया जिक्र

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राहुल गांधी कई महीनों से पेपर लीक और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन किया, महात्मा गांधी स्मारक पर विरोध जताया और संसद के भीतर भी विपक्ष ने लगातार इस मुद्दे को उठाया। उनका कहना था कि कांग्रेस ने विभिन्न स्तरों पर छात्रों की आवाज को मजबूती से सामने रखा।

उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक श्रेय लेने की आवश्यकता नहीं है और छात्र स्वयं तय करेंगे कि किसने उनके मुद्दों को सबसे मजबूती से उठाया।

जंतर-मंतर से दूरी की बताई वजह

कांग्रेस के जंतर-मंतर आंदोलन में प्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं होने पर भी केसी वेणुगोपाल ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस सीधे आंदोलन का हिस्सा बनती तो पूरा मुद्दा राजनीतिक रंग ले सकता था। इसी कारण पार्टी ने मंच से दूरी बनाए रखी ताकि आंदोलन अपनी मूल भावना के साथ आगे बढ़ सके।

हालांकि उन्होंने दावा किया कि यूथ कांग्रेस और सेवा दल के कार्यकर्ता पूरे आंदोलन के दौरान मौके पर मौजूद रहे। उनके अनुसार कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शनकारियों को पानी, भोजन, दवाइयां और कानूनी सहायता उपलब्ध कराई।

नई टास्क फोर्स पर कांग्रेस के सवाल

केंद्र सरकार द्वारा परीक्षा सुधारों के लिए गठित नई टास्क फोर्स पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने कहा कि वर्ष 2024 में गठित डॉ. के. राधाकृष्णन समिति की 101 सिफारिशों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई 2026 में परीक्षाओं में सामने आई नई गड़बड़ियों के बाद सरकार ने नई टास्क फोर्स का गठन किया, जबकि पहले से मौजूद सिफारिशों पर अमल नहीं हुआ। कांग्रेस का यह भी आरोप है कि वर्ष 2024 से 2026 के बीच नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में पूर्णकालिक महानिदेशक की नियुक्ति नहीं की गई।

हाई-पावर टास्क फोर्स में ये सदस्य शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए हाई-पावर टास्क फोर्स के गठन की घोषणा की है। इस समिति की अध्यक्षता इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि करेंगे। इसके अन्य सदस्यों में इसरो के पूर्व प्रमुख एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल और लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

 

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