
नेशनल डेस्क: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। करीब छह साल तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष के पेश किए गए वैज्ञानिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को भरोसेमंद मानते हुए फैसला सुनाया। इस मामले में पुलिस ने 91 गवाहों की गवाही, फोरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार किया।
26 फरवरी 2020 को चांदबाग पुलिया के पास खजूरी नाले से आईबी अधिकारी अंकित शर्मा का शव बरामद हुआ था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में उनके शरीर पर 51 गंभीर चोटों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस की विशेष जांच टीम ने पूरे मामले की विस्तृत जांच शुरू की।
छह साल तक चली अदालत में सुनवाई
करीब छह वर्षों तक चले ट्रायल के बाद अदालत ने तत्कालीन पार्षद ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को हत्या और दंगों से जुड़े गंभीर अपराधों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों का अपराध संदेह से परे साबित करने में सफल रहा।
वैज्ञानिक जांच पर रहा सबसे ज्यादा जोर
जांच एजेंसी ने शुरुआत से ही मामले को केवल प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों तक सीमित नहीं रखा। घटनास्थल का वैज्ञानिक निरीक्षण कराया गया, फोरेंसिक टीम की मदद ली गई, सीसीटीवी फुटेज एकत्र किए गए, मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया तथा इलेक्ट्रॉनिक और मेडिकल साक्ष्यों को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया।
मोबाइल वीडियो बना सबसे अहम सबूत
जांच के दौरान पुलिस को एक प्रत्यक्षदर्शी के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया गया वीडियो मिला। इसमें तीन लोग चांदबाग पुलिया के पास खजूरी नाले में एक शव फेंकते हुए दिखाई दिए। फोरेंसिक जांच के बाद इस वीडियो को अदालत में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। ट्रायल कोर्ट ने इसे पूरे मामले के सबसे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों में शामिल माना।
सीसीटीवी और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी अहम कड़ियां
पुलिस ने आसपास के उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज जुटाए। जांच में यह भी सामने आया कि कई कैमरों का रुख बदल दिया गया था या उनके लेंस ढक दिए गए थे। इसके बावजूद उपलब्ध फुटेज का विस्तृत विश्लेषण किया गया। साथ ही आरोपियों के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए उनकी गतिविधियों और मौजूदगी की पुष्टि की गई।
पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट ने मजबूत किया केस
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गंभीर चोटों का उल्लेख था। जांच एजेंसी के अनुसार, शव के कुछ हिस्सों को जलाने की भी कोशिश की गई थी। घटनास्थल से जुटाए गए खून, मिट्टी और अन्य जैविक नमूनों की फोरेंसिक जांच कराई गई। अदालत ने माना कि मेडिकल और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की पुष्टि की।
हत्या में इस्तेमाल हथियार भी हुए बरामद
जांच के दौरान पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल होने वाले हथियार बरामद किए, जिन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया। रिपोर्ट में कहा गया कि पोस्टमार्टम में दर्ज चोटें बरामद हथियारों से पहुंचाई जा सकती थीं। अदालत ने इसे भी महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य माना।
ताहिर हुसैन के घर से मिली दंगाई सामग्री
जांच एजेंसी के अनुसार ताहिर हुसैन के मकान की तलाशी के दौरान छत से बड़ी मात्रा में पत्थर, ईंटें, पेट्रोल से भरी कांच की बोतलें, गुलेल और अन्य सामग्री बरामद हुई। इन सभी वस्तुओं की फोरेंसिक जांच कराई गई। अदालत ने माना कि गवाहों के बयान और बरामद सामग्री एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं।
91 गवाहों ने पेश की घटनाक्रम की पूरी तस्वीर
इस मामले में कुल 91 गवाहों की गवाही दर्ज की गई। इनमें प्रत्यक्षदर्शी, स्थानीय निवासी, पुलिस अधिकारी, जांच अधिकारी, डॉक्टर, फोरेंसिक विशेषज्ञ और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों में ऐसा कोई विरोधाभास नहीं मिला जिससे अभियोजन पक्ष की कहानी पर संदेह पैदा हो।
अदालत ने खुद किया घटनास्थल का निरीक्षण
11 मई 2026 को ट्रायल कोर्ट ने चांदबाग पुलिया और आसपास के घटनास्थल का स्वयं निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस द्वारा तैयार किए गए साइट प्लान का वास्तविक स्थिति से मिलान किया गया और उसे सही पाया गया। अदालत ने इसे भी जांच की विश्वसनीयता का महत्वपूर्ण आधार माना।
बचाव पक्ष की दलीलें क्यों नहीं टिक सकीं
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने एफआईआर, जांच प्रक्रिया, गवाहों की विश्वसनीयता और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर सवाल उठाए। हालांकि अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी, मेडिकल, फोरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर सभी आपत्तियों का जवाब दिया। अदालत ने माना कि सभी साक्ष्य एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और अभियोजन पक्ष का मामला मजबूत बनाते हैं।
ताहिर हुसैन समेत पांचों दोषियों की भूमिका पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि स्वतंत्र गवाहों, डिजिटल रिकॉर्ड, बरामद सामग्री और अन्य साक्ष्यों से यह स्थापित हुआ कि ताहिर हुसैन हिंसक भीड़ में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। वहीं नाजिम, कासिम, जावेद और अनस की मौजूदगी और भूमिका भी विभिन्न गवाहों तथा अन्य साक्ष्यों से साबित हुई। अदालत ने साझा उद्देश्य (कॉमन ऑब्जेक्ट) के आधार पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत सभी को दोषी ठहराया।
Navyug Samachar