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Indian Organ Donation Day 2026: मौत के बाद भी दे सकते हैं कई लोगों को नई जिंदगी, जानिए कौन-कौन से अंग किए जा सकते हैं दान और क्या हैं नियम

हेल्थ डेस्क: भारत में हर वर्ष 3 अगस्त को भारतीय अंगदान दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य लोगों को अंगदान के महत्व के प्रति जागरूक करना और अधिक से अधिक लोगों को इसके लिए प्रेरित करना है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक व्यक्ति मृत्यु के बाद कई लोगों को नया जीवन देने में मदद कर सकता है। हालांकि, अंगदान से जुड़े नियम और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी होना भी बेहद जरूरी है।

किन अंगों का किया जा सकता है दान?

अंगदान दो प्रकार से किया जाता है—जीवित अवस्था में और मृत्यु के बाद। जीवित व्यक्ति एक किडनी, लिवर का एक हिस्सा और कुछ विशेष परिस्थितियों में अग्न्याशय का हिस्सा दान कर सकता है।

वहीं, ब्रेन स्टेम डेथ घोषित होने के बाद हृदय, दोनों किडनी, लिवर, फेफड़े, अग्न्याशय और आंत जैसे महत्वपूर्ण अंग दान किए जा सकते हैं। इसके अलावा कॉर्निया, त्वचा, हड्डियां, हार्ट वॉल्व और रक्त वाहिकाओं जैसे ऊतकों का भी दान संभव है।

भारत में अंगदान के क्या हैं नियम?

देश में अंगदान और अंग प्रत्यारोपण की प्रक्रिया मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण अधिनियम, 1994 के तहत संचालित होती है। किसी मृत व्यक्ति के अंग केवल निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और परिवार की सहमति मिलने के बाद ही निकाले जा सकते हैं।

भारतीय कानून के अनुसार, ब्रेन स्टेम डेथ को कानूनी रूप से मृत्यु माना जाता है। ऐसी स्थिति में आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद अंगदान किया जा सकता है।

जीवित अंगदान के मामलों में सामान्यतः माता-पिता, भाई-बहन, पति-पत्नी और संतान जैसे निकट संबंधियों को प्राथमिकता दी जाती है। विशेष परिस्थितियों में अधिकृत समिति की मंजूरी के बाद अन्य व्यक्ति भी अंगदान कर सकते हैं।

कौन करता है पूरी व्यवस्था की निगरानी?

देश में अंगदान और प्रत्यारोपण प्रणाली की निगरानी राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन करता है। यह संस्था अंगों के आवंटन, प्रतीक्षा सूची के प्रबंधन, जागरूकता कार्यक्रमों और राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय की जिम्मेदारी निभाती है। राज्यों में राज्य स्तरीय और क्षेत्रीय स्तर पर गठित संबंधित संस्थाएं भी इस प्रक्रिया में सहयोग करती हैं।

क्यों जरूरी है अंगदान?

भारत उन देशों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में अंग प्रत्यारोपण किए जाते हैं, लेकिन जरूरत के मुकाबले दान किए जाने वाले अंगों की उपलब्धता अभी भी काफी कम है। हर वर्ष हजारों मरीज समय पर उपयुक्त अंग नहीं मिलने के कारण अपनी जान गंवा देते हैं। ऐसे में एक मृतक दाता कई जरूरतमंद लोगों को नया जीवन देने का माध्यम बन सकता है।

 

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