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Bankipur जीतते ही प्रशांत किशोर की NCP में नई भूमिका? सुनेत्रा पवार से 5 घंटे की मुलाकात के बाद BJP-कांग्रेस के सवाल

महाराष्ट्र डेस्क: जन सुराज के संस्थापक और विधायक प्रशांत किशोर को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। बांकीपुर उपचुनाव में जीत के बाद उनकी महाराष्ट्र की डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के साथ लंबी मुलाकात ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। मुंबई में हुई इस बैठक के बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने प्रशांत किशोर की संभावित राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाए हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि बिहार में बीजेपी के खिलाफ राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे प्रशांत किशोर महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी एनसीपी के लिए रणनीति क्यों तैयार कर रहे हैं।

सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने मुंबई स्थित सुनेत्रा पवार के आधिकारिक आवास ‘देवगिरी’ में करीब पांच घंटे तक बंद कमरे में बैठक की। इसके बाद एनसीपी में उनके राजनीतिक रणनीतिकार और सलाहकार के तौर पर भूमिका निभाने की चर्चा तेज हो गई है।

NCP के लिए क्या रणनीति तैयार करेंगे प्रशांत किशोर?

सूत्रों का दावा है कि एनसीपी ने प्रशांत किशोर को पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को नए सिरे से मजबूत करने की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। इसके अलावा सुनेत्रा पवार की राजनीतिक छवि को मजबूत करने और उन्हें 2029 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी के संभावित मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर पेश करने की रणनीति पर भी काम किए जाने की चर्चा है।

बताया जा रहा है कि एनसीपी ने इससे पहले बेंगलुरु स्थित राजनीतिक सलाहकार कंपनी Design Box के साथ अपना जुड़ाव खत्म किया था। इसके बाद पार्टी की ओर से प्रशांत किशोर के साथ संपर्क बढ़ाया गया।

सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा पवार और उनके बेटे तथा राज्यसभा सांसद पार्थ पवार की प्रशांत किशोर से दिल्ली में डिनर के दौरान पहली मुलाकात हुई थी। इसके बाद मुंबई में भी बैठक हुई। पिछले गुरुवार को देवगिरी में हुई बैठक करीब पांच घंटे तक चली।

सूत्रों का कहना है कि प्रशांत किशोर का फोकस एनसीपी के संगठन को दोबारा मजबूत करने के साथ महिलाओं, धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील मतदाताओं के बीच पार्टी का आधार बढ़ाने पर रहेगा।

कांग्रेस ने पूछा- प्रशांत किशोर आखिर किसके साथ?

प्रशांत किशोर की एनसीपी के साथ कथित रणनीतिक भूमिका को लेकर महाराष्ट्र कांग्रेस ने सीधे सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटील ने उनके राजनीतिक रुख पर सवाल करते हुए कहा कि यह समझना मुश्किल है कि प्रशांत किशोर आखिर किस राजनीतिक खेमे में खड़े हैं।

कांग्रेस नेता ने सवाल किया कि प्रशांत किशोर की पार्टी की विचारधारा बीजेपी के विरोध में होने का दावा किया जाता है और बिहार में बीजेपी के खिलाफ चुनावी सफलता का जिक्र किया जाता है। इसके बावजूद महाराष्ट्र में वही प्रशांत किशोर बीजेपी की सहयोगी एनसीपी के लिए रणनीति तैयार कर रहे हैं।

उन्होंने इसे राजनीतिक तौर पर विरोधाभासी स्थिति बताया। कांग्रेस की ओर से यह भी सवाल उठाया गया कि प्रशांत किशोर पहले राजनीतिक सलाहकार की भूमिका छोड़ने की बात कह चुके हैं। ऐसे में एनसीपी के सलाहकार के तौर पर उनकी कथित नई भूमिका कई सवाल खड़े करती है।

BJP में भी उठी ‘हितों के टकराव’ की बात

प्रशांत किशोर की संभावित भूमिका को लेकर केवल कांग्रेस ही नहीं, बीजेपी के कुछ नेताओं ने भी असहजता जताई है।

एक वरिष्ठ बीजेपी नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि बिहार उपचुनाव में प्रशांत किशोर ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया, जबकि महाराष्ट्र में वह बीजेपी की सहयोगी पार्टी एनसीपी की मदद कर रहे हैं। नेता ने इसे ‘हितों के टकराव’ का मामला बताते हुए प्रशांत किशोर से अपनी राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट करने की मांग की।

बीजेपी नेता के मुताबिक, अगर प्रशांत किशोर की विचारधारा बीजेपी के खिलाफ है तो फिर महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी एनसीपी को राजनीतिक रणनीति देने का फैसला सवालों के घेरे में आता है।

2029 के लिए अभी से बिछ रही सियासी बिसात?

प्रशांत किशोर की कथित नई भूमिका के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में 2029 के विधानसभा चुनाव को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। अगर एनसीपी वास्तव में सुनेत्रा पवार को भविष्य के मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर तैयार करने की रणनीति पर काम कर रही है, तो प्रशांत किशोर की संभावित एंट्री को पार्टी की लंबी चुनावी तैयारी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

फिलहाल सवाल यह है कि प्रशांत किशोर राजनीतिक सलाहकार की भूमिका में हैं या सक्रिय राजनीतिक खिलाड़ी के तौर पर आगे बढ़ रहे हैं। बिहार में बीजेपी के खिलाफ रणनीति और महाराष्ट्र में बीजेपी की सहयोगी एनसीपी के लिए संभावित सलाह के बीच का विरोधाभास अब उनकी भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है।

 

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