Monday , 5 October 2026

ECI पर विवाद के बीच महाराष्ट्र में SIR के खिलाफ कोर्ट पहुंचा मामला, दो याचिकाओं में वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर उठे सवाल

महाराष्ट्र डेस्क: महाराष्ट्र में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी SIR प्रक्रिया अब कानूनी विवाद में पहुंच गई है। इसको लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट और उसकी कोल्हापुर सर्किट बेंच में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। याचिकाओं में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के तरीके, प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और चुनाव आयोग के भीतर सामने आई आपत्तियों का जिक्र किया गया है।

CEC के 14 आदेशों को चुनौती

कोल्हापुर बेंच में तीन स्थानीय निवासियों की ओर से वकील असीम सरोदे की टीम के जरिए पहली याचिका दाखिल की गई है। इसमें चीफ इलेक्शन कमिश्नर ज्ञानेश कुमार की ओर से जारी 14 प्रशासनिक आदेशों को रद्द करने की मांग की गई है।

याचिका में दावा किया गया है कि इलेक्शन कमिश्नर सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 14 बार वोटरों के नाम हटाने, डेटाबेस तक पहुंच, सॉफ्टवेयर में रुकावट और जुलाई महीने में फॉर्म 6 में किए गए बदलावों को लेकर आपत्ति जताई थी। याचिका में इन घटनाक्रमों को CEC और Other ECs Act, 2023 की धारा 18 के उल्लंघन का मामला बताया गया है।

दूसरी याचिका में बूथ अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल

मुंबई की प्रिंसिपल बेंच में दूसरी याचिका वंचित बहुजन आघाड़ी के युवा अध्यक्ष सागर रमेश गायकवाड़ और एक अन्य निवासी की ओर से दाखिल की गई है। इस याचिका में वकील हेमंत घडीगांवकर, संदेश मोरे और हितेंद्र गांधी पक्ष रख रहे हैं।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के ADR फैसले का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर मतदाताओं से पहचान पत्र मांग रहे हैं। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, यह चुनाव आयोग के निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है।

बिना सुनवाई नाम हटाने का आरोप

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जो मतदाता घर पर नहीं मिले, उन्हें बिना सुनवाई या लिखित आदेश के गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में दर्ज कर दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने वोटर लिस्ट में इस तरह की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कानूनी प्रक्रिया के पालन की मांग की है।

SIR पर रोक और स्वतंत्र जांच की मांग

याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि उनका उद्देश्य चुनाव को रोकना नहीं है, बल्कि कानून और निर्धारित प्रक्रिया का सही तरीके से पालन सुनिश्चित कराना है। दोनों याचिकाओं में हटाए गए मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने, महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने और पूरे मामले की जांच के लिए रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।

दोनों याचिकाओं पर अगले हफ्ते तत्काल सुनवाई होने की उम्मीद जताई गई है।

 

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