
नेशनल डेस्क: जींस की आगे वाली बड़ी जेब के भीतर बनी छोटी सी जेब आपने जरूर देखी होगी। आकार इतना छोटा होता है कि इसमें मोबाइल तो दूर, हाथ भी आसानी से नहीं जाता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इसे बनाया ही क्यों गया था? आज लोग इसमें सिक्के या छोटी चीजें रख लेते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत फैशन के लिए नहीं हुई थी। इस छोटी जेब का संबंध जींस के शुरुआती दौर और उस समय की एक खास जरूरत से जुड़ा है।
पॉकेट वॉच रखने के लिए बनाई गई थी छोटी जेब
जींस की इस छोटी जेब को आमतौर पर वॉच पॉकेट कहा जाता है। इसकी शुरुआत 1873 के आसपास मानी जाती है, जब लेवी स्ट्रॉस और जैकब डेविस ने मजबूत कीलों वाली डेनिम पैंट का पेटेंट कराया था। उस दौर में मोबाइल या ईयरफोन जैसी चीजें तो थीं ही नहीं। समय देखने के लिए लोग पॉकेट वॉच का इस्तेमाल करते थे।
ये छोटी घड़ियां अक्सर चेन से जुड़ी होती थीं। बड़ी जेब में रखने पर उनके टूटने या बाहर गिरने का खतरा रहता था। ऐसे में जींस के भीतर बनाई गई छोटी जेब पॉकेट वॉच को सुरक्षित रखने के लिए उपयोगी साबित होती थी।
उस समय जींस फैशन नहीं, काम की पोशाक थी
आज जींस लगभग हर उम्र के लोगों की अलमारी का हिस्सा है, लेकिन शुरुआती दौर में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मेहनत-मजदूरी करने वाले लोग करते थे। मजदूरों, किसानों, खदानों में काम करने वालों और रेलवे से जुड़े कर्मचारियों के लिए जींस मजबूत और टिकाऊ कपड़ों में गिनी जाती थी।
काम के दौरान कपड़ों पर काफी दबाव पड़ता था, इसलिए डेनिम को मजबूत बनाया जाता था। छोटी जेब भी उसी उपयोगिता को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई थी।
1890 के दशक में ज्यादा पहचान में आई छोटी जेब
1873 में पेटेंट के समय से ही आज की तरह हर जींस में यह छोटी जेब बड़े पैमाने पर मौजूद हो, ऐसा नहीं था। करीब 1890 के दशक में यह जींस के डिजाइन का ज्यादा पहचाना जाने वाला हिस्सा बनी। उस समय पॉकेट वॉच का इस्तेमाल आम था और कामकाजी लोग इन्हें अपने साथ रखते थे। ऐसे में घड़ी को सुरक्षित रखने वाली इस जेब की उपयोगिता बढ़ गई।
दूसरे विश्व युद्ध में हटाए गए थे छोटे कील
जींस की इस छोटी जेब से जुड़ी एक और दिलचस्प बात दूसरे विश्व युद्ध के दौर की है। उस समय जींस की जेबों पर लगाए जाने वाले छोटे-छोटे कील कुछ समय के लिए हटा दिए गए थे।
इसके पीछे वजह फैशन नहीं बल्कि युद्धकालीन जरूरत बताई जाती है। उस दौर में लोहे और अन्य धातुओं की जरूरत हथियार बनाने के लिए ज्यादा थी। इसलिए जींस में इस्तेमाल होने वाले इन कीलों को भी कुछ समय के लिए हटाया गया। युद्ध खत्म होने के बाद इन्हें फिर जींस के डिजाइन में शामिल कर लिया गया।
पॉकेट वॉच गई, तो सिक्कों की जेब बन गई
समय के साथ पॉकेट वॉच का चलन कम होता गया, लेकिन जींस की छोटी जेब बनी रही। इसके बाद लोगों ने इसमें सिक्के, माचिस, टिकट और दूसरी छोटी चीजें रखना शुरू कर दिया।
इसी वजह से अलग-अलग दौर में इस जेब को अलग-अलग नाम भी मिले। कहीं इसे सिक्कों वाली जेब कहा गया तो कहीं टिकट, माचिस या दूसरी छोटी वस्तुओं के लिए इस्तेमाल होने वाली जेब के तौर पर पहचाना गया। यानी जेब वही रही, लेकिन उसका इस्तेमाल समय के साथ बदलता गया।
आज भी जींस से क्यों नहीं हटाई गई?
अब सवाल यह है कि जब पॉकेट वॉच का दौर खत्म हो चुका है, तो यह छोटी जेब आज भी जींस में क्यों बनी हुई है? इसकी एक वजह यह है कि यह जींस के पारंपरिक डिजाइन की पहचान बन चुकी है। आगे की बड़ी जेबों के साथ इसका आकार जींस के डिजाइन में अच्छी तरह फिट बैठता है।
समय के साथ जींस के कई रूप आए। कभी स्किनी जींस का चलन रहा तो कभी ढीली जींस का। लो-वेस्ट और हाई-वेस्ट जैसे डिजाइन भी आए और रंगों में भी लगातार बदलाव हुए। इसके बावजूद छोटी जेब जींस के पारंपरिक डिजाइन का हिस्सा बनी रही।
150 साल पुरानी है इस छोटी जेब की कहानी
आज जींस की इस छोटी सी जेब पर शायद ही कोई खास ध्यान देता हो, लेकिन इसकी शुरुआत करीब 150 साल पहले की एक व्यावहारिक जरूरत से जुड़ी थी। कभी इसमें पॉकेट वॉच सुरक्षित रखी जाती थी, फिर सिक्कों और दूसरी छोटी चीजों का इस्तेमाल शुरू हुआ और धीरे-धीरे यह जींस की पहचान बन गई।
अगली बार जींस पहनते समय जब इस छोटी जेब पर नजर पड़ेगी, तो याद रखिएगा कि यह महज सजावटी डिजाइन नहीं है। इसके पीछे जींस के शुरुआती दौर, कामकाजी लोगों और पॉकेट वॉच के जमाने से जुड़ी एक लंबी कहानी है।
Navyug Samachar