
यूपी डेस्क: उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को चुनाव होना है। इससे पहले बीजेपी ने 5 अक्टूबर को अपने 8 उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी ने धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पाण्डेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को मैदान में उतारा है।
इन उम्मीदवारों के चयन को सिर्फ राज्यसभा चुनाव तक सीमित करके नहीं देखा जा रहा है। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी ने उम्मीदवारों के जरिए संगठन, सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और महिला प्रतिनिधित्व को साधने की कोशिश की है।
कौन हैं BJP के 8 उम्मीदवार?
धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं। 15 जनवरी 1953 को जन्मे धर्मपाल सिंह कई बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और 2022 में भी आंवला से निर्वाचित हुए थे। उत्तर प्रदेश विधानसभा के रिकॉर्ड में उनकी सामाजिक पहचान लोधी-राजपूत के तौर पर दर्ज है। लोधी समाज राज्य के प्रमुख गैर-यादव OBC समूहों में शामिल है। ऐसे में उनका राज्यसभा जाना OBC प्रतिनिधित्व के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
राधाकांत ओझा प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। बीजेपी से उनका जुड़ाव लंबे समय से रहा है। 2024 में फूलपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम पार्टी के संभावित उम्मीदवारों में चर्चा में आया था। उनकी उम्मीदवारी से पार्टी की सूची में कानून के क्षेत्र से जुड़े ब्राह्मण चेहरे को जगह मिली है।
प्रकाश पाल फिलहाल बीजेपी उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जून 2026 में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। पार्टी संगठन में उनकी भूमिका OBC समाज के बीच बीजेपी की पहुंच से जुड़ी है। राज्यसभा उम्मीदवारों में उनका नाम शामिल होना पिछड़े वर्ग के संगठनात्मक नेटवर्क को प्रतिनिधित्व देने के तौर पर देखा जा रहा है।
विद्यासागर सोनकर जौनपुर से बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं। वह लोकसभा सांसद रह चुके हैं और पार्टी संगठन में प्रदेश महामंत्री जैसी जिम्मेदारियां भी संभाल चुके हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के रिकॉर्ड में उनकी शैक्षिक योग्यता MA, BEd और LLB दर्ज है। वह पेशे से अधिवक्ता और कृषक रहे हैं। उनकी राजनीतिक पहचान बीजेपी के दलित प्रतिनिधित्व से जुड़ी रही है।
गोपी कृष्ण पाण्डेय का नाम बीजेपी की इस सूची के बाद राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर प्रमुखता से सामने आया है। उनके राजनीतिक सफर से जुड़ी विस्तृत सार्वजनिक जानकारी सीमित है।
प्रियंका सिंह रावत 2014 में बाराबंकी लोकसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। वह बाराबंकी की पहली महिला सांसद बनी थीं। 2019 में पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया और उनकी जगह उपेंद्र सिंह रावत को उम्मीदवार बनाया था। फिलहाल प्रियंका सिंह रावत बीजेपी उत्तर प्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। सार्वजनिक राजनीतिक पहचान में उन्हें पासी समुदाय से जुड़े दलित चेहरे के तौर पर देखा जाता है।
आगरा के राम प्रताप सिंह चौहान बीजेपी के पुराने संगठनकर्ताओं में शामिल हैं। जून 2026 में उन्हें दोबारा उत्तर प्रदेश बीजेपी का प्रदेश महामंत्री बनाया गया था। इसके बाद उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। वह 1991-94 के दौरान बीजेपी युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी राजनीतिक पहचान ठाकुर चेहरे के रूप में बताई जाती है।
श्रुति गंगवार बरेली के बहेड़ी क्षेत्र में सक्रिय बीजेपी नेता हैं। वह अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन भी हैं और स्थानीय संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। रिपोर्टों में उन्हें कुर्मी समाज से जुड़े चेहरे के तौर पर बताया गया है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार के परिवार से आती हैं। उनकी उम्मीदवारी से पार्टी की सूची में महिला और नए चेहरे का प्रतिनिधित्व भी जुड़ता है।
किस जातीय वर्ग से कितने उम्मीदवार?
बीजेपी की 8 उम्मीदवारों वाली सूची में दो ब्राह्मण चेहरे राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पाण्डेय हैं। तीन OBC चेहरे धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल और श्रुति गंगवार हैं। दो दलित चेहरे विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत हैं। वहीं राम प्रताप सिंह चौहान को ठाकुर चेहरे के तौर पर देखा जाता है।
BJP ने सामाजिक समीकरण में क्या साधने की कोशिश की?
पूरी सूची पर नजर डालें तो बीजेपी ने केवल बड़े चुनावी चेहरों को ही जगह नहीं दी है। इसमें OBC संगठन से जुड़े नेता, दलित प्रतिनिधि, सवर्ण चेहरे, अनुभवी संगठनकर्ता और महिला नेताओं का मिश्रण दिखाई देता है।
OBC और दलित वर्ग से जुड़े चेहरों की संख्या खास तौर पर उल्लेखनीय है। धर्मपाल सिंह लोधी समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं, प्रकाश पाल पिछड़ा वर्ग संगठन की अगुआई कर रहे हैं और श्रुति गंगवार को कुर्मी चेहरे के तौर पर देखा जाता है। वहीं विद्यासागर सोनकर और प्रियंका सिंह रावत दलित प्रतिनिधित्व से जुड़े चेहरे हैं। दूसरी तरफ राधाकांत ओझा और गोपी कृष्ण पाण्डेय के जरिए ब्राह्मण प्रतिनिधित्व तथा राम प्रताप सिंह चौहान के जरिए ठाकुर चेहरा सूची में शामिल है।
2027 विधानसभा चुनाव से क्यों जोड़ी जा रही सूची?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में राज्यसभा उम्मीदवारों का चयन बीजेपी के लिए केवल संसद में संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है। उम्मीदवारों की सूची उन सामाजिक समूहों के लिए भी राजनीतिक संकेत के तौर पर देखी जा रही है, जिनके बीच पार्टी अपना आधार मजबूत रखना चाहती है।
बीजेपी की उत्तर प्रदेश की राजनीति में गैर-यादव OBC और गैर-जाटव दलित वोट बैंक लंबे समय से महत्वपूर्ण रहे हैं। ऐसे में राज्यसभा की इस सूची में इन समूहों से जुड़े कई चेहरों को जगह मिलना 2027 की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। साथ ही संगठन में सक्रिय नेताओं को राज्यसभा भेजने के फैसले से चुनाव से पहले पार्टी कार्यकर्ताओं को भी राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संदेश जाता है।
आठवीं सीट के लिए क्या है सियासी गणित?
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव होना है। बीजेपी के पास संख्या के आधार पर कई सीटें जीतने की स्थिति है, लेकिन आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन और राजनीतिक प्रबंधन की जरूरत पड़ सकती है। यही वजह है कि बीजेपी की 8 उम्मीदवारों वाली सूची को सामाजिक समीकरण के साथ-साथ विधानसभा में मौजूदा संख्या, सहयोगी दलों के समर्थन और संभावित क्रॉस-वोटिंग के गणित से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
इन नेताओं का खत्म हो रहा कार्यकाल
बीजेपी से डॉ. दिनेश शर्मा, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, अरुण सिंह, बीएल वर्मा, गीता शाक्य, अरदीप सिंह पुरी, ब्रजलाल का कार्यकाल खत्म हो रहा है। वहीं समाजवादी पार्टी से रामगोपाल यादव और बसपा से रामजीलाल गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
Navyug Samachar