Tuesday , 6 October 2026

‘मम्मी मुझे मारती हैं, गाली देती हैं’, कोर्ट में बेटी ने सुनाई आपबीती; इलाहाबाद HC ने कहा- अपनी मर्जी से रह सकती है

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज करते हुए कहा कि माता-पिता अपनी बालिग बेटी को उसकी इच्छा के खिलाफ अपने साथ रहने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। मऊ की रहने वाली कलावती देवी ने अपनी 25 वर्षीय बेटी कुमारी पूजा को अदालत के सामने पेश करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने बेटी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी पसंद से रहने के अधिकार को महत्व देते हुए याचिका खारिज कर दी।

बेटी बालिग है, अपनी पसंद से रहने के लिए स्वतंत्र

जस्टिस संदीप जैन ने 28 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पूजा बालिग है और वह अपनी पसंद की जगह और व्यक्ति के साथ रहने के लिए स्वतंत्र है। कलावती देवी की याचिका पर अदालत ने 17 अगस्त 2026 को राज्य को पूजा को कोर्ट के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पूजा को अदालत में पेश किया गया।

बेटी ने कहा- दिल्ली में अपनी मर्जी से रह रही हूं

अदालत से बातचीत के दौरान पूजा ने कहा कि वह अपनी इच्छा से दिल्ली में रह रही है और किसी तरह की अवैध हिरासत में नहीं है। उसने साफ कहा कि वह अपनी मां के साथ नहीं रहना चाहती।

पूजा ने आरोप लगाया कि उसकी मां का उसके प्रति व्यवहार सौहार्दपूर्ण नहीं रहा। उसका कहना था कि घर पर रहने के दौरान उसकी मां अक्सर उसे मारती-पीटती थीं और गाली देती थीं।

मां ने बेटी के आरोपों से किया इनकार

वहीं, कलावती देवी ने बेटी की ओर से लगाए गए आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि पूजा को अपने माता-पिता के साथ रहना चाहिए। हालांकि, अदालत ने पूजा के बयान पर गंभीरता से विचार किया और पाया कि वह बालिग है तथा अपनी मां के साथ रहने की इच्छा नहीं रखती।

बालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने कहा कि किसी बालिग व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध केवल इस वजह से किसी विशेष व्यक्ति के साथ रहने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि वह व्यक्ति उसके माता-पिता हैं। अदालत ने महिला की स्वायत्तता और उसके व्यक्तिगत फैसले लेने की स्वतंत्रता को उचित महत्व दिया।

इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 28 सितंबर को कलावती देवी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी।

पहले भी हाई कोर्ट ने माना था बालिग की पसंद सर्वोपरि

इससे पहले एक अन्य मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 18 साल की बेटी को अपने पति के साथ रहने की अनुमति दी थी। उस मामले में कोर्ट ने कहा था कि बालिग व्यक्ति को अपना जीवनसाथी चुनने का अधिकार है और माता-पिता की इच्छा इस अधिकार पर हावी नहीं हो सकती।

 

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