Saturday , 24 October 2026

‘CJP से मेरा कोई रिश्ता नहीं’, ध्रुव राठी ने वोट चोरी के आरोपों और प्रदर्शन को लेकर कही बड़ी बात

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन के बीच यूट्यूबर ध्रुव राठी ने संगठन से किसी भी तरह के संबंध होने से इनकार किया है। ध्रुव राठी ने कहा कि वह किसी राजनीतिक संगठन के प्रतिनिधि या पदाधिकारी के तौर पर नहीं, बल्कि अपनी व्यक्तिगत हैसियत से प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

ध्रुव राठी ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लोकतंत्र से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों की तरह प्रदर्शन में शामिल हुए हैं, जो चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर चिंतित हैं।

CJP नेताओं से दोस्ती को लेकर उठे थे सवाल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करने वाले वीडियो के लिए चर्चित ध्रुव राठी के CJP संस्थापक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरभ दास से दोस्ताना संबंधों की चर्चा होती रही है।

इससे पहले NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए आंदोलन के दौरान भी ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके के बीच वीडियो कॉल पर बातचीत सामने आई थी। अब चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन में उनकी मौजूदगी के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई थी।

बेंगलुरु से दिल्ली तक प्रदर्शन में नजर आए ध्रुव राठी

8 अक्टूबर को बेंगलुरु में आयोजित प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी आंदोलन से जुड़े और मंच से अपनी बात रखी थी। इस दौरान उन्होंने SIR के जरिए मतदाता सूची में कथित हेरफेर और वोट चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाया।

इसके बाद उन्होंने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले CJP प्रदर्शन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी दिल्ली पहुंचे और इंडिया गेट से एक वीडियो जारी कर लोगों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की।

CJP इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही थी। संगठन की ओर से चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, वोट चोरी के आरोपों को स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

हिरासत के बाद पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

10 अक्टूबर को दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने संगठन के नेताओं और समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसी दौरान ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया।

ध्रुव राठी के मुताबिक, उन्हें गुरुग्राम स्थित उनके आवास से पुलिस अपने साथ ले गई थी और इस दौरान उनके साथ कथित तौर पर बल प्रयोग किया गया। रिहाई के बाद उन्होंने दावा किया कि पुलिस उन्हें उनके बेडरूम से घसीटकर ले गई और इस दौरान उन्हें चोटें भी आईं।

ध्रुव राठी ने पुलिस की कार्रवाई को गिरफ्तारी के बजाय अपहरण बताया और पुलिस के व्यवहार पर सवाल उठाए। हालांकि, इस मामले को लेकर विवाद जारी है।

‘मैं व्यक्तिगत हैसियत से प्रदर्शन में शामिल हुआ हूं’

CJP से अपने संबंधों पर सफाई देते हुए ध्रुव राठी ने कहा कि वह संगठन में कोई पद नहीं रखते हैं और न ही उसकी ओर से प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

उन्होंने कहा कि वह व्यक्तिगत क्षमता से प्रदर्शन में पहुंचे थे, जैसे देश के कई लोग चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर अपनी चिंता जाहिर कर रहे हैं।

ध्रुव राठी ने कहा, “मैं यहां व्यक्तिगत तौर पर आया हूं। ऐसा नहीं है कि मैं CJP से जुड़ा हूं या कोई पदाधिकारी हूं। मैं व्यक्तिगत क्षमता से आया हूं, जैसे देश में लाखों लोग प्रदर्शन कर रहे हैं।”

‘चुनाव आयोग का निष्पक्ष होना लोकतंत्र के लिए जरूरी’

ध्रुव राठी ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियादी जरूरत है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी के आरोप गंभीर हैं और चुनावी प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

उन्होंने लोकतंत्र और तानाशाही के बीच अंतर पर अपनी राय रखते हुए कहा कि किसी देश की व्यवस्था को केवल पूरी तरह लोकतंत्र या पूरी तरह तानाशाही के रूप में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद से भारत की स्थिति तानाशाही की दिशा में बढ़ती गई है।

ध्रुव राठी के बयानों के बाद चुनाव आयोग, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की विश्वसनीयता को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। वहीं, CJP से औपचारिक संबंधों से इनकार के बावजूद आंदोलन में उनकी भागीदारी चर्चा का विषय बनी हुई है।

 

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