
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा अधिवक्ताओं से अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘रूल ऑफ माफिया’ से निकलकर ‘रूल ऑफ लॉ’ की व्यवस्था की ओर बढ़ा है। कोई भी व्यक्ति या पद संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। युवा वकीलों को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने कहा, “फैसला इतिहास सुनाएगा, बहस आपको करनी है।” वह शनिवार को डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में बोल रहे थे।
समारोह में मुख्यमंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। छात्राओं ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की, जबकि योगी आदित्यनाथ ने मेधावी विद्यार्थियों को पदक देकर सम्मानित किया।
आपातकाल का जिक्र कर समझाया कानून के शासन का महत्व
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 की तरह 25 जून 1975 भी भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की महत्वपूर्ण तारीख है। आपातकाल ने ‘रूल ऑफ लॉ’ यानी कानून के शासन और ‘रूलर ऑफ लॉ’ यानी शासक के अनुसार चलने वाली व्यवस्था के बीच का अंतर स्पष्ट किया।
उन्होंने न्यायमूर्ति एचआर खन्ना की असहमति का उल्लेख करते हुए कहा कि सिद्धांतों के पक्ष में लिया गया फैसला इतिहास में अपनी जगह बनाता है। मुख्यमंत्री ने युवा अधिवक्ताओं से कहा कि उन्हें संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। उनके मुताबिक, अन्याय सामने होने पर चुप रहना कोई विकल्प नहीं है।
‘सत्यं वद, धर्मं चर’ को जीवन में उतारें वकील
मुख्यमंत्री ने अधिवक्ताओं से संस्कृत के सूत्र ‘सत्यं वद, धर्मं चर, स्वाध्यायान्मा प्रमदः’ को केवल चैंबर की दीवारों तक सीमित न रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सत्य, नैतिकता और निरंतर अध्ययन एक अच्छे अधिवक्ता के जीवन का आधार होने चाहिए।
डॉ. राम मनोहर लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए योगी ने कहा कि एक विधिवेत्ता में शिव जैसा मस्तिष्क, कृष्ण जैसा हृदय और राम जैसा वचन होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जुड़े रहने और पेशेवर जीवन में सिद्धांतों से समझौता नहीं करने की सलाह दी।
2047 तक विकसित भारत बनाने में युवा वकीलों की अहम भूमिका
योगी आदित्यनाथ ने विकसित भारत के लक्ष्य को एक मुकदमे के रूप में प्रस्तुत करते हुए कहा कि 140 करोड़ देशवासियों के इस दावे की पैरवी तथ्यों, साक्ष्यों और ईमानदारी के साथ करनी होगी। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में युवा अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश को वर्ष 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रदेश के विकास और कानून के शासन को मजबूत करने में विधि विशेषज्ञों का योगदान महत्वपूर्ण है।
AI को सहायक बनाएं, अपने विवेक का विकल्प नहीं
कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक काम को आसान बना सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही होना चाहिए। कानूनी मामलों में लापरवाही से तैयार किया गया मसौदा किसी निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता पर असर डाल सकता है।
उन्होंने डीपफेक और साइबर अपराधों को साक्ष्यों की विश्वसनीयता के सामने नई चुनौती बताया। योगी ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर थाने स्थापित हैं और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क संचालित हैं। वहीं, ‘एआई प्रज्ञा’ कार्यक्रम के जरिए 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
अधिवक्ता की सबसे बड़ी पूंजी उसकी साख
मुख्यमंत्री ने कहा कि वकीलों को अपनी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता बनाए रखनी चाहिए। उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़ा होना चाहिए और किसी गलत काम के लिए दबाव बनाए जाने पर सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
उन्होंने अधिवक्ताओं से गांवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में भी योगदान देने की अपील की। उनके अनुसार, विधि पेशे का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज को न्याय दिलाने और कमजोर वर्गों की मदद करने में भी भूमिका निभाना है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ बोले- डिग्री मंजिल नहीं, नई यात्रा की शुरुआत
सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने विद्यार्थियों से कहा कि उपाधि हासिल करना मंजिल नहीं, बल्कि एक नई यात्रा की शुरुआत है। शिक्षा की वास्तविक परीक्षा विश्वविद्यालय से बाहर शुरू होती है। सफलता का आकलन इस आधार पर भी होना चाहिए कि कोई व्यक्ति दूसरों के जीवन में कितना सकारात्मक बदलाव लाता है। उन्होंने संवैधानिक मूल्यों, करुणा और संवेदनशीलता को जीवन में अपनाने पर जोर दिया।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली ने कहा कि डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय ने न्यायपालिका, विधि शिक्षा और लोकसेवा के क्षेत्र में योगदान दिया है। उन्होंने विद्यार्थियों से संस्थान की परंपराओं और उच्च मानकों को आगे बढ़ाते हुए कानून के शासन को मजबूत करने की उम्मीद जताई।
20 वर्षों में 250 से अधिक न्यायिक अधिकारी तैयार
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह ने बताया कि संस्थान ने पिछले 20 वर्षों में उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों की न्यायिक सेवाओं को 250 से अधिक अधिकारी दिए हैं। उन्होंने कहा कि विधि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत या आर्थिक सफलता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज सेवा और वंचित वर्गों के कल्याण में योगदान देना भी है।
मेधावी विद्यार्थियों को मिले स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक
दीक्षांत समारोह में एलएलएम पाठ्यक्रम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण पदक, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक दिया गया। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्वनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक से सम्मानित किया गया।
ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक मिला। तान्या वर्मा को टैक्सेशन में प्रदीप कुमार अग्रवाल मेमोरियल और मालविका पचौरी को सर्वश्रेष्ठ मूटिंग के लिए केके लूथरा मेमोरियल स्वर्ण पदक दिया गया।
डिप्लोमा पाठ्यक्रमों में साइबर लॉ के लिए भास्कर पांडे, जयंत अग्रवाल और चिराग निगम को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक प्रदान किए गए। बौद्धिक संपदा अधिकार में आशी पांडे, रितेश मेहता और ईशा अस्थाना को क्रमशः स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक मिला। मीडिया लॉ में अंशुमान सिंह को स्वर्ण और संतुष्ट सोनकर को रजत पदक से सम्मानित किया गया।
समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, कुलपति प्रो. अमर पाल सिंह, विभागाध्यक्ष प्रो. मनीष सिंह, कुलसचिव केशव कुमार सहित न्यायमूर्तिगण, शिक्षक, विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
Navyug Samachar