Friday , 23 October 2026

पंजाब विधानसभा में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पारित, केरलम के बाद दूसरा राज्य

पंजाब डेस्क: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पंजाब विधानसभा में प्रस्ताव पारित किया गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित अनियमितताओं को लेकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। इससे पहले 12 अक्टूबर को केरलम विधानसभा भी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित कर चुकी है।

मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने विधानसभा में प्रस्ताव पेश किया। इसमें मतदाता सूची से योग्य नागरिकों के नाम कथित तौर पर हटाए जाने की शिकायतों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। प्रस्ताव में चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

प्रस्ताव के मुताबिक, जांच में किसी व्यक्ति के खिलाफ अनियमितता के पर्याप्त सबूत मिलने पर कानून के अनुसार आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके साथ ही केंद्र सरकार और संबंधित संवैधानिक संस्थाओं से चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की अपील की गई। प्रस्ताव की प्रतियां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजने की मांग भी उठाई गई।

हरपाल चीमा ने मतदान के अधिकार का मुद्दा उठाया

हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की नींव समानता, न्याय और जनता की सर्वोच्चता जैसे संवैधानिक सिद्धांतों पर टिकी है। उन्होंने मतदान के अधिकार को लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बताते हुए कहा कि किसी भी योग्य नागरिक को गैरकानूनी तरीके से इस अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

चीमा ने डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक भागीदारी को गरीबों और वंचित वर्गों तक पहुंचाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की शिकायतें गरीबों, दलितों और अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

वित्त मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) के सामने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और भ्रामक दावे पेश कर गरीबों तथा विपक्षी समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने इन शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।

AAP ने NDA के सहयोगी दलों से पूछे सवाल

आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के सहयोगी दलों को भी घेरा। उन्होंने सवाल उठाया कि मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार का समर्थन कर रहे दल इस मामले में क्या रुख अपना रहे हैं।

AAP नेताओं ने तेलुगु देशम पार्टी (TDP) प्रमुख चंद्रबाबू नायडू और जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार का नाम लेते हुए उनसे इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। पार्टी ने कहा कि लोकतांत्रिक अधिकारों और मतदाताओं के हितों की रक्षा सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है।

केरलम विधानसभा भी पारित कर चुकी है प्रस्ताव

पंजाब से पहले 12 अक्टूबर को केरलम विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन की ओर से पेश प्रस्ताव में SIR के दौरान कथित अनियमितताओं की जांच, मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए योग्य मतदाताओं के मतदान अधिकार बहाल करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग की गई थी।

केरलम विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश को शामिल करने की मांग भी उठाई थी। प्रस्ताव को कांग्रेस के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी वामपंथी गठबंधन का समर्थन मिला था, जबकि भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया था।

पंजाब और केरलम में पारित प्रस्तावों के बाद SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। हालांकि, विधानसभा में प्रस्ताव पारित होने का अर्थ मुख्य चुनाव आयुक्त को स्वतः पद से हटाना नहीं है। यह संबंधित मुद्दे पर विधानसभा का राजनीतिक और संस्थागत रुख सामने रखता है।

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