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अयोध्या में दसवें दीपोत्सव की भव्य तैयारी, 7 नवंबर को फिर बनेगा विश्व रिकॉर्ड? लाखों दीपों से जगमगाएगी रामनगरी

अयोध्या: रामनगरी में इस साल दीपोत्सव का आयोजन दसवीं बार होने जा रहा है। वर्ष 2017 में शुरू हुआ यह उत्सव अब अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। सात नवंबर को सरयू तट और राम की पैड़ी पर लाखों दीप जलाकर भव्य आयोजन किया जाएगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ‘योगी की पाती’ के माध्यम से प्रदेशवासियों को संदेश देते हुए परिवार और मित्रों के साथ अयोध्या पहुंचकर दीपोत्सव में शामिल होने की अपील की है।

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि प्रभु श्रीराम के अयोध्या लौटने की स्मृति से जुड़ा यह पर्व केवल दीप जलाने तक सीमित नहीं है। यह अंधकार से प्रकाश, निराशा से उम्मीद और आस्था से विकास की ओर बढ़ने का प्रतीक है। उनके मुताबिक, दीपोत्सव सनातन चेतना के पुनर्जागरण और देश के सांस्कृतिक गौरव का महत्वपूर्ण उत्सव बन गया है।

दीपोत्सव ने उत्तर प्रदेश को दिलाई ‘उत्सव प्रदेश’ की पहचान

योगी आदित्यनाथ ने अपने पत्र में आस्था और अर्थव्यवस्था के बीच संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि जनभागीदारी और धार्मिक आयोजनों को विकास की ताकत बनाकर उत्तर प्रदेश ने ‘उत्सव प्रदेश’ के रूप में अपनी अलग पहचान बनाई है। उनका कहना है कि प्रकाश से सुरक्षा का भाव मजबूत होता है, सुरक्षा निवेश के अवसर बढ़ाती है और निवेश से विकास, रोजगार तथा समृद्धि का रास्ता खुलता है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि दीपोत्सव से स्थानीय कारोबारियों को भी लगातार लाभ मिल रहा है। कुम्हारों के बनाए दीयों की मांग बढ़ने से उनकी आमदनी के नए रास्ते खुले हैं। फूल बेचने वालों, होटल कारोबारियों और अन्य स्थानीय व्यापारियों को भी इस आयोजन से फायदा पहुंच रहा है। इस तरह दीपोत्सव धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती दे रहा है।

भरत के त्याग का उदाहरण देकर समझाया जिम्मेदारी का महत्व

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में रामायण के भरत से जुड़े प्रसंग के जरिए शासन और जिम्मेदारी का अर्थ भी समझाया। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम के वनवास के दौरान भरत ने 14 वर्षों तक राजसुख का त्याग किया और उनकी चरण पादुकाओं को सिंहासन पर रखकर अयोध्या का शासन संभाला।

योगी आदित्यनाथ के अनुसार, यह प्रसंग सिखाता है कि सत्ता का असली अर्थ अधिकार जताना नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी निभाना है। दीपोत्सव के माध्यम से त्याग, मर्यादा और समर्पण जैसे आदर्शों को दुनिया के सामने रखने का अवसर मिलता है। यह आयोजन लोगों को अपनी सांस्कृतिक परंपराओं और जीवन मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा भी देता है।

सरयू तट और राम की पैड़ी पर जलेंगे लाखों दीप

सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव के लिए सरयू तट और राम की पैड़ी पर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। दोनों स्थानों पर लाखों पारंपरिक दीपों से दीपमालाएं सजाई जाएंगी। इसके अलावा ड्रोन के जरिए विशेष प्रस्तुतियां और कलाकारों की भागीदारी भी आयोजन का आकर्षण बढ़ाएगी।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में राम की पैड़ी पर जलने वाले लाखों दीपों की भव्यता का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि दीपों की रोशनी में ऐसा प्रतीत होता है, जैसे आकाशगंगा स्वयं अयोध्या में उतर आई हो। उनके मुताबिक, यह आयोजन परंपरा और आधुनिकता के सुंदर मेल का उदाहरण है।

जरूरतमंद परिवारों के साथ भी साझा करें त्योहार की खुशियां

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे दीपावली की खुशियां आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के साथ भी बांटें। उन्होंने कहा कि आसपास रहने वाले किसी जरूरतमंद परिवार की मदद अपनी क्षमता के अनुसार दीये, मिठाइयां और नए कपड़े देकर की जा सकती है, ताकि उनके घर में भी त्योहार की खुशियां पहुंच सकें।

उन्होंने लोगों से स्थानीय कारीगरों के बनाए दीये और दूसरे उत्पाद खरीदने का आग्रह किया, जिससे उनके काम को बढ़ावा मिले। युवाओं को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने, नकारात्मकता से दूर रहने और आसपास साफ-सफाई बनाए रखने का संदेश भी दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छता में ही श्री यानी लक्ष्मी जी का वास होता है।

1.71 लाख दीयों से हुई शुरुआत, 2025 में जले 26.17 लाख दीप

अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। पहले आयोजन में 1.71 लाख दीये जलाए गए थे। इसके बाद हर साल दीपों की संख्या में बढ़ोतरी हुई और इस उत्सव ने लगातार नए विश्व कीर्तिमान स्थापित किए।

वर्ष 2018 में 3.01 लाख, 2019 में 4.04 लाख और 2020 में कोरोना प्रतिबंधों के बावजूद 6.06 लाख दीये जलाए गए। वर्ष 2021 में 9,41,551 दीये प्रज्वलित किए गए, जिसके साथ गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बना। इसके बाद 2022 में 15,76,955 और 2023 में 22.23 लाख दीये जलाकर नए कीर्तिमान दर्ज किए गए।

राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद वर्ष 2024 में आयोजित पहले दीपोत्सव में 25.12 लाख दीये जलाए गए। वहीं, 2025 में 26.17 लाख दीप प्रज्वलित कर पिछला रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया गया। इसी आयोजन के दौरान 2,128 लोगों ने एक साथ आरती कर एक और विश्व कीर्तिमान बनाया था।

वर्ष 2017 में 1.71 लाख दीयों से शुरू हुआ यह आयोजन अब दसवें वर्ष में पहुंच गया है। सात नवंबर को होने वाले दीपोत्सव में एक बार फिर अयोध्या को लाखों दीपों से रोशन करने की तैयारी है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि क्या रामनगरी इस बार भी नया विश्व रिकॉर्ड कायम कर पाएगी।

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