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टाटा की साझेदारी वाली कंपनी बिकने की तैयारी में! 52 हजार करोड़ से ज्यादा की डील, 34 डेटा सेंटर पर किसकी होगी नजर?

नई दिल्ली: भारत के डेटा सेंटर उद्योग में अब तक के सबसे बड़े सौदों में से एक की तैयारी शुरू हो गई है। टाटा कम्युनिकेशंस की साझेदारी वाली कंपनी एसटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स इंडिया के भारतीय कारोबार को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस सौदे का मूल्य 5.5 अरब डॉलर यानी 52 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है। हालांकि, अभी तक किसी संभावित खरीदार का नाम सामने नहीं आया है और न ही सौदे को अंतिम मंजूरी मिली है।

इस प्रस्तावित बिक्री को भारतीय डेटा सेंटर बाजार के लिए अहम माना जा रहा है। पहली बार इतने बड़े डेटा सेंटर कारोबार को एक साथ बिक्री के लिए पेश किया जा रहा है। कंपनी के प्रमुख निवेशकों में केकेआर, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस शामिल हैं।

10 शहरों में फैले हैं 34 डेटा सेंटर

एसटीटी जीडीसी इंडिया देश की तीन सबसे बड़ी डेटा सेंटर सेवाएं देने वाली कंपनियों में शामिल है। इसके पास भारत के 10 शहरों में कुल 34 डेटा सेंटर हैं। इन सभी केंद्रों की संयुक्त क्षमता 613 मेगावाट है।

कंपनी के प्रमुख हिस्सेदार केकेआर, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस ने भारतीय कारोबार की बिक्री की प्रक्रिया शुरू की है। इस सौदे के लिए सलाहकारों की नियुक्ति भी की गई है, जो संभावित खरीदारों से बातचीत करेंगे।

क्यों बेचने की तैयारी में हैं हिस्सेदार?

इस बड़े सौदे के पीछे निवेशकों की अलग-अलग कारोबारी रणनीतियां बताई जा रही हैं। एक ओर वैश्विक स्तर पर पूंजी की जरूरतों को संतुलित करने की योजना है, वहीं दूसरी ओर टाटा समूह अपने डेटा सेंटर कारोबार को नए सिरे से व्यवस्थित करना चाहता है।

बिक्री प्रक्रिया से जुड़े सलाहकार उन वैश्विक कंपनियों से संपर्क करेंगे, जो पहले से भारत में कारोबार कर रही हैं या यहां प्रवेश करने की तैयारी में हैं। इसके अलावा बड़े भारतीय कारोबारी समूहों, बुनियादी ढांचा निवेश कोषों और निजी इक्विटी निवेशकों को भी संभावित खरीदारों के रूप में देखा जा रहा है।

आईपीओ लाने की भी हुई थी तैयारी

इससे पहले हिस्सेदारों ने जुलाई के आसपास एसटीटी जीडीसी इंडिया का भारतीय शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने की संभावना पर भी विचार किया था। उस समय कंपनी का संभावित मूल्यांकन 6 से 7 अरब डॉलर के बीच आंका गया था।

हालांकि, अब शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने के बजाय सीधे बिक्री के विकल्प पर ध्यान दिया जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिस्सेदार इस सौदे से कम से कम 5 अरब डॉलर हासिल करने की उम्मीद कर रहे हैं।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डेटा सेंटर कंपनियों का मूल्यांकन आमतौर पर उनके अनुबंधित एबिट्डा के 18 से 20 गुना तक किया जाता है। सितंबर 2024 में ब्लैकस्टोन और सीपीपीआईबी ने ऑस्ट्रेलिया की एयरट्रंक को 16 अरब डॉलर में खरीदा था। यह रकम कंपनी के एबिट्डा के करीब 22 से 23 गुना के बराबर थी। एसटीटी जीडीसी इंडिया के लिए भी इसी तरह के मूल्यांकन की उम्मीद जताई जा रही है।

इस मामले में केकेआर और एसटीटी जीडीसी इंडिया ने टिप्पणी करने से इनकार किया है। वहीं, सिंगटेल और टाटा कम्युनिकेशंस को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

2016 में टाटा के साथ शुरू हुआ था कारोबार

एसटीटी ने साल 2016 में टाटा कम्युनिकेशंस के भारतीय डेटा सेंटर कारोबार में 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर देश में प्रवेश किया था। टाटा कम्युनिकेशंस ने शेष 26 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखी थी।

उस समय इस कारोबार का मूल्य 3,140 करोड़ रुपये था। इसमें कुल 14 डेटा सेंटर शामिल थे और भारतीय बाजार में इसकी हिस्सेदारी करीब 28.5 फीसदी थी।

वर्तमान में एसटीटी जीडीसी इंडिया, एसटीटी टेलीमीडिया और टाटा कम्युनिकेशंस के बीच 74:26 फीसदी हिस्सेदारी वाला संयुक्त उद्यम है।

केकेआर और सिंगटेल का मूल कंपनी पर नियंत्रण

इसी साल फरवरी में केकेआर और सिंगटेल के समूह ने एसटी टेलीमीडिया ग्लोबल डेटा सेंटर्स का पूरा नियंत्रण हासिल करने के लिए 5.2 अरब डॉलर के नकद अधिग्रहण की घोषणा की थी।

बाकी 82 फीसदी हिस्सेदारी के मूल्य के आधार पर मूल कंपनी का कुल उद्यम मूल्य 10.2 अरब डॉलर आंका गया था। फिलहाल मूल कंपनी में केकेआर की हिस्सेदारी 75 फीसदी है, जबकि बाकी हिस्सा सिंगटेल के पास है।

टाटा ने वित्त वर्ष 2026 में किया 319.4 करोड़ का निवेश

टाटा कम्युनिकेशंस ने अपनी 26 फीसदी हिस्सेदारी बनाए रखने के लिए वित्त वर्ष 2026 में 319.4 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निवेश किया था।

इससे पहले सितंबर 2024 में कंपनी ने अगले पांच से छह वर्षों के दौरान डेटा सेंटर क्षमता में 550 मेगावाट की बढ़ोतरी के लिए 26,000 करोड़ रुपये निवेश करने की घोषणा की थी।

दूसरी ओर, टाटा समूह टीपीजी और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज के साथ मिलकर एक अलग डेटा सेंटर मंच शुरू करने का फैसला भी कर चुका है।

राजस्व में बढ़ोतरी, लेकिन मुनाफा घटा

टाटा कम्युनिकेशंस की सालाना रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026 में एसटीटी के भारतीय कारोबार का परिचालन राजस्व 17.8 फीसदी बढ़कर 2,747.5 करोड़ रुपये हो गया। इससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2,331.8 करोड़ रुपये था।

हालांकि, राजस्व बढ़ने के बावजूद कंपनी के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026 में मुनाफा 22.9 फीसदी घटकर 126 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह 163.5 करोड़ रुपये था।

इसी अवधि में कंपनी की शुद्ध संपत्ति 30.7 फीसदी बढ़कर 5,760.5 करोड़ रुपये पहुंच गई। इससे पहले यह 4,406.2 करोड़ रुपये थी। वित्त वर्ष 2021 से 2025 के बीच कंपनी के परिचालन राजस्व में सालाना औसतन 15 फीसदी की वृद्धि हुई।

बड़ी तकनीकी कंपनियों से मिलता है 75 फीसदी राजस्व

एसटीटी जीडीसी इंडिया की कुल कमाई में करीब 75 फीसदी योगदान हाइपरस्केलर्स का है। इन ग्राहकों के साथ आमतौर पर 7 से 15 साल तक के अनुबंध होते हैं। कंपनी के शीर्ष 10 ग्राहक कुल राजस्व में लगभग 76 फीसदी हिस्सेदारी रखते हैं।

प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 6,000 से 6,100 करोड़ रुपये के पूंजीगत खर्च का अनुमान लगाया था। इस खर्च को कर्ज, कंपनी की आंतरिक कमाई या इक्विटी के जरिए पूरा करने की योजना बनाई गई थी।

विदेशों में भी फैला है एसटीटी का कारोबार

भारत के अलावा एसटीटी समूह एशिया और यूरोप में 100 से अधिक डेटा सेंटर संचालित करता है। इनकी कुल क्षमता 2 गीगावाट से ज्यादा है।

साल 2025 के अंत से समूह की परिचालन क्षमता में 25 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और यह 780 मेगावाट तक पहुंच गई है। वहीं, अनुबंधित क्षमता में 50 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया है।

अब इस प्रस्तावित बिक्री पर बाजार की नजरें टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारत के 10 शहरों में फैले 34 डेटा सेंटर वाले इस कारोबार को कौन खरीदेगा और अंतिम सौदा कितनी रकम पर तय होगा।

 

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